संक्षेप में: नौका हादसों में सैकड़ों रोहिंग्या लोगों की मौत, दक्षिण सूडान में हिंसा से बिगड़ते हालात
शरणार्थी मामलों के लिए संयुक्त राष्ट्र एजेंसी (UNHCR) ने इस महीने, म्याँमार के तटीय क्षेत्र में दो नौका दुर्घटनाओं पर गहरी चिन्ता व्यक्त की है, जिनमें कम से कम 427 रोहिंग्या लोगों के मारे जाने की ख़बर है. उधर, यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने दक्षिण सूडान में मनमाने ढंग से की जा रही गिरफ़्तारियों, तनातनी और नफ़रत भरे सन्देशों व भाषणों के बीच मानवाधिकारों के लिए बिगड़ती स्थिति पर चेतावनी जारी की है.
यूएन शरणार्थी संगठन ने कहा है कि इस वर्ष सुरक्षा की तलाश में जा रहे रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए, समुद्री मार्ग पर यह अब तक की सबसे जानलेवा त्रासदी है.
UNHCR के अनुसार, इस क्षेत्र में वार्षिक मॉनसून मौसम की शुरुआत हो चुकी है और इन नौकाओं में एक ख़तरनाक समय में यात्राएँ की जा रही थीं, जोकि रोहिंग्या समुदाय की हताशा को दर्शाता है.
बताया गया है कि इस क्षेत्र में जोखिम भरे समुद्री रास्तों पर आवाजाही की कोशिश करने वाले लगभग हर पाँच में से एक व्यक्ति की इस वर्ष अब तक या तो मौत हो गई या फिर वो लापता है.
इसके मद्देनज़र, अंडमान सागर और बंगाल की खाड़ी, दुनिया में सबसे घातक जल क्षेत्रों में आँका गया है.
UNHCR ने इस क्षेत्र में प्रशासनिक एजेंसियों से भविष्य में ऐसी त्रासदियों को टालने के लिए तुरन्त क़दम उठाने का आग्रह किया है. साथ ही, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से इस क्षेत्र में स्थित उन देशों के साथ एकजुटता व्यक्त करने की अपील की है, जो रोहिंग्या शरणार्थियों की मेज़बानी कर रहे हैं.
इस वर्ष, यूएन एजेंसी को शरणार्थियों, और बांग्लादेश, भारत, इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड में उनकी मेज़बानी करने वाले समुदायों, और म्याँमार में विस्थापितों के लिए 38 करोड़ डॉलर की आवश्यकता है. मगर, फ़िलहाल इस धनराशि का केवल 30 प्रतिशत जुटा पाने में ही सफलता मिली है.
दक्षिण सूडान: नए सिरे से भड़की लड़ाई रोकने की अपील
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने इस वर्ष फ़रवरी से दक्षिण सूडान में मनमाने ढंग से की जा रही गिरफ़्तारियों, तनातनी और नफ़रत भरे सन्देशों व भाषणों के बीच मानवाधिकारों के लिए बिगड़ती स्थिति पर चेतावनी जारी की है.
यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त ने आगाह किया है कि दक्षिण सूडान की सेना (SSPDF) और विरोधी गुट (SPLA-IO) के बीच टकराव में अब तक कम से कम 75 नागरिकों की जान जा चुकी है. यह विरोधी गुट एक राजनैतिक दल भी है और प्रथम उप राष्ट्रपति रिएक मचार के वफ़ादार लड़ाकों का गुट भी.
दक्षिण सूडान ने वर्ष 2011 में सूडान से स्वाधीनता हासिल की थी, मगर उसके बाद से ही यह टकराव और अस्थिरता से जूझता रहा है. वर्ष 2013 में राष्ट्रपति सल्वा कीर के वफ़ादार सैन्य बलों और पूर्व उप राष्ट्रपति रिएक मचार के समर्थकों में गृहयुद्ध भड़क उठा था.
कई वर्षों तक जातीय हिंसा, सामूहिक अत्याचार और मानवीय संकट जारी रहने के बाद 2018 में नाज़ुक हालात में एक शान्ति समझौते पर सहमति हुई. मगर, कुछ समय पहले प्रथम उप राष्ट्रपति रिएक मचार को नज़रबन्द किए जाने की ख़बरों के बाद परस्पर विरोधी सैन्य बलों के बीच तनातनी बढ़ी हैं.
3 मई से 20 मई के दौरान दक्षिण सूडान की सेना ने जोंगलेई और अपर नाइल क्षेत्र में विद्रोही गुट, SPLA-IO के ठिकानों पर हवाई बमबारी की, और नदी के रास्ते व ज़मीनी हमले किए.
इसके बाद, विद्रोही गुद द्वारा जोंगलेई में किए गए हमले से आम नागरिक विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए हैं.
मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने आगाह किया है कि बढ़ते टकराव से, देश में मानवाधिकारों और मानवीय हालात के लिए पहले से ही गम्भीर चुनौती है, और हालात निरन्तर बिगड़ रहे हैं. इसके मद्देनज़र, उन्होंने सभी पक्षों से कगार से वापिस लौट आने की अपील की है.
डीआरसी: हिंसा से खाद्य सुरक्षा के लिए बिगड़ते हालात
विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने आगाह किया है कि काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) के पूर्वी हिस्से में बढ़ते हिंसक टकराव की वजह से खाद्य असुरक्षा की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है. इससे उन पड़ोसी देशों पर भी असर हुआ है, जहाँ जान बचाने के लिए डीआरसी के 1.40 लाख नागरिकों ने इस वर्ष जनवरी से अब तक शरण ली है.
डीआरसी पिछले कई दशकों से हिंसा से ग्रस्त है, विशेष रूप से देश का पूर्वी हिस्सा. इस वर्ष की शुरुआत में, एम23 विद्रोही गुट द्वारा नॉर्थ कीवू प्रान्त की राजधानी गोमा को अपने नियंत्रण में लेने से हिंसक टकराव ने गम्भीर रूप धारण कर लिया. इसके एक महीने बाद, साउथ कीवू के बुकावू पर भी उसका क़ब्ज़ा हो गया.
बदतरीन सुरक्षा व मानवीय हालात में एमपॉक्स समेत अन्य बीमारियों का प्रकोप है, जिसकी एक बड़ी वजह गंदगी भरे माहौल में बड़ी संख्या में लोगों का रहना है.
यूएन खाद्य एजेंसी ने अनुमान जताया है कि हिंसक टकराव से ग्रस्त पूर्वी क्षेत्रों में 79 लाख लोग खाद्य असुरक्षा का शिकार हैं. देश भर में 2.8 करोड़ लोगों को खाद्य सहायता की आवश्यकता है.
1.40 लाख लोगों ने भागकर बुरुंडी, युगांडा, रवांडा और तंज़ानिया में शरण ली है, और यह एक क्षेत्रीय संकट के रूप में उभर रहा है.
पूर्वी डीआरसी में ग्रैंड नॉर्ड एक अहम कृषि केन्द्र है, जहाँ विस्थापन व हिंसा के कारण खाद्य उत्पादन में गिरावट आई है. गोमा का हवाई अड्डा बन्द होने से भी मानवीय सहायता अभियान पर असर हुआ है.
इन चुनौतियों के बावजूद, WFP ने जनवरी व मार्च महीनों के दौरान 11 लाख लोगों तक खाद्य मदद पहुँचाई है. यूएन एजेंसी ने बताया है कि बढ़ती आवश्यकताओं के मद्देनज़र सहायता में कटौती के लिए मजबूर होना पड़ा है और मौजूदा हालात को ध्यान में रखते हुए वित्तीय समर्थन मुहैया कराया जाना होगा.