सीरिया: असुरक्षा और स्वास्थ्य संकट के बीच लोगों की ज़रूरतों में बेतहाशा वृद्धि
संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों का कहना है कि सीरिया में लाखों लोग अब भी बिना फटे या इस्तेमाल हुए हथियारों, बीमारी और कुपोषण के कारण जानलेवा ख़तरे का सामना कर रहे हैं और उन्हें कहीं अधिक अन्तरराष्ट्रीय सहायता की तत्काल आवश्यकता है.
संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय – OCHA के संचालन और पैरोकारी विभाग का नेतृत्व करने वाली ऐडेम वोसोर्नू ने कहा है कि वह सीरिया में पूर्व राष्ट्रपति बशर अल असद के शासन के तहत वर्षों की पीड़ा और कठिनाई के बाद, ज़मीन पर "बदलाव की गति को महसूस कर सकती हैं." ग़ौरतलब है कि दिसम्बर (2024) में, असद सरकार का तख़्तापलट कर दिया गया था.
ऐडेम वोसोर्नू ने हालाँकि यह भी कहा है कि कठिन चुनौतियाँ बनी हुई हैं. लगभग एक करोड़ 60 लाख सीरियाई लोगों को मानवीय सहायता और सुरक्षा की आवश्यकता है, और ज़रूरतें "बहुत अधिक" हैं.
उन्होंने सीरियाई सीमा के पार तुर्कीये के गाज़ियांटेप में स्थित एक मानवीय सहायता केन्द्र से बताया कि देश से बाहर रहने वाले शरणार्थियों में, दिसम्बर (2024) से देश को वापिसी के दौरान उत्साह देखा गया है.
उन्होंने कहा कि आन्तरिक रूप से विस्थापित दस लाख से अधिक लोग अपने मूल इलाक़ों वापिस आ गए हैं, और संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) के अनुसार, पड़ोसी देशों से पाँच लाख से अधिक शरणार्थी वापिस लौट आए हैं.
घरों और अवसरों की तबाही
OCHA की अधिकारी ने असुरक्षा, क्षतिग्रस्त घर, अपर्याप्त सेवाएँ, आजीविका के अवसरों की कमी और अप्रयुक्त आयुध (विस्फोटकों) के ख़तरे को, लोगों को स्वदेश वापिस लौटने से रोकने वाली “मुख्य बाधाएँ” बताया.
उन्होंने ज़ोर देकर कहा, “लोग कहते हैं कि सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्हें सुरक्षा चाहिए.”
ऐडेम वोसोर्नू ने कहा कि देश में टकराव व हिंसा का स्तर कम हो गया है, लेकिन स्थानीय तनाव और झड़पें “बड़ी चिन्ता” बनी हुई हैं.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के स्वास्थ्य आपात निदेशक डॉक्टर अल्ताफ़ मुसानी ने कहा कि भारी लड़ाई के अवशेषों से, आम लोगों के लिए लगातार ख़तरा पैदा हो रहा है
उन्होंने दिसम्बर 2024 से अप्रयुक्त आयुध यानि बिना फटे विस्फोटकों और इस्तेमाल नहीं किए गए हथियारों से कम से कम 909 लोगों के हताहत होने की ओर ध्यान दिलाया, जिनमें लगभग 400 लोगों की मौतें शामिल हैं. इनमें से अधिकांश महिलाएँ और बच्चे हैं.
उन्होंने कहा, "हम आपातकालीन कक्षों में पहुँचने वाले लोगों और और चिकित्सा परामर्श की ज़रूरत वाले लोगों की संख्या में वृद्धि देख रहे हैं... बच्चे और महिलाएँ, दैनिक जीवन जीने की कोशिश करते हुए, पानी हासिल करने की कोशिश करते हुए, भोजन पाने की कोशिश करते हुए, पुनर्निर्माण की कोशिश करते हुए," कृषि भूमि, सड़कों और नदियों से गुज़र रहे हैं जहाँ बिना विस्फोट वाले हथियार छिपे हो सकते हैं.
शिविर के निवासियों को सबसे अधिक ख़तरा
डॉक्टर अल्ताफ़ मुसानी ने कहा कि हैज़ा और तीव्र जलीय दस्त (diarrhoea) जैसी बीमारियाँ फैल रही हैं. हैज़ा के 1,444 से अधिक संदिग्ध मामले व उससे सम्बन्धित सात लोगों की मौत होने के मामले दर्ज किए गए हैं.
उन्होंने कहा, "यह स्थिति विशेष रूप से लताकिया और अलेप्पो इलाक़ों में, ख़ासतौर पर विस्थापन शिविरों के आसपास है."
"हम जानते हैं कि जब शिविरों में हैज़ा फैल जाता है, तो यह स्थिति एक बड़ी समस्या बन सकती है, जिससे बीमारियाँ और मृत्यु दर दोनों बढ़ जाते हैं."
WHO अधिकारी ने आगाह किया कि सीरिया में 4 लाख 16 हज़ार से अधिक बच्चे गम्भीर कुपोषण के जोखिम में हैं, और च वर्ष से कम उम्र के, गम्भीर तीव्र कुपोषण से पीड़ित, आधे से अधिक बच्चों को उपचार नहीं मिल रहा है.
उन्होंने कहा, "सार्वजनिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से, हमें उस जोखिम पर नज़र रखने और सहायता उपलब्ध कराने तथा उन बच्चों को बचाने में सक्षम होने की आवश्यकता है."
चिकित्सा सेवाएँ स्थगित
डॉ अल्ताफ़ मुसानी ने यह भी ध्यान दिलाया कि सीरिया के पश्चिमोत्तर इलाक़े के आधे प्रसूति अस्पतालों ने, वित्तीय कटौती के कारण सितम्बर 2024 से अपनी सेवाएँ स्थगित कर दी हैं.
इस तरह की वित्तीय कटौती के प्रभाव, मानवतावादियों को "विश्व स्तर पर देखने पड़ रहे हैं" लेकिन ये प्रभाव सीरिया में "वास्तव में स्पष्ट" नज़र आ रहे हैं.
सीरिया में मानवीय सहायता के लिए पहले से ही धन की कमी होने की समस्या मौजूद है.
OCHA के समन्वय प्रभाग के प्रमुख रमेश राजसिंघम ने इस सप्ताह की शुरुआत में, सुरक्षा परिषद को बताया कि जनवरी से जून 2025 तक, बेहद कमज़ोर हालात वाले 80 लाख से अधिक लोगों तक पहुँचने के लिए, संयुक्त राष्ट्र और उसके भागीदारों के लिए आवश्यक 2 अरब डॉलर में से केवल 10 प्रतिशत राशि ही प्राप्त हुई है.