ग़ाज़ा: महीनों में पहली बार सहायता टीमों तक पहुँची जीवनरक्षक सामग्री
ग़ाज़ा में मौजूद संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने गुरूवार को पुष्टि की है कि इसराइल की लगभग 11 सप्ताह की पाबन्दी के बाद, अन्तत: क्षेत्र के अन्दर स्थित गोदामों में अति-आवश्यक सहायता सामग्री पहुँच गई है.
संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष राहत सहायता समन्वयक टॉम फ़्लैचर ने कहा है, "आज का दिन महत्वपूर्ण है. जीवनरक्षक सामग्री से लदे ट्रक, आख़िरकार फिर से चल पड़े हैं."
एक प्रमुख घटनाक्रम में, कुछ घंटे पहले 198 ट्रकों ने केरेम शेलोम सीमाक चौकी के ज़रिए ग़ाज़ा में प्रवेश किया. इनमें पोषण सामग्री, दवाएँ और गेहूँ का आटा ले जाया गया है.
टॉम फ़्लैचर ने इस समाचार की ऑनलाइन घोषणा करते हुए बताया कि मानवतावादी संगठनों ने रात भर काम करते हुए "सामान से भरे लगभग 90 ट्रकों" से सामग्री उतारकर वितरण के लिए तैयार की है.
टॉम फ़्लैचर ने कहा है कि अब भी ‘सामग्री को ट्रकों में लादने व भेजने’ में महत्वपूर्ण चुनौतियाँ बरक़रार हैं.
उन्होंने सुरक्षा और सामान के लूटे जाने सम्बन्धी चिन्ताओं का ज़िक्र करते हुए "समन्वय स्वीकृति में देरी और माल की आवाजाही के लिए इसराइली बलों द्वारा मुहैया कराए गए अव्यवहारिक मार्गों का हवाला दिया."
इसराइल ने 2 मार्च से ग़ाज़ा में कोई व्यावसायिक या मानवीय सहायता सामग्री लाए जाने की अनुमति नहीं दी थी, जिससे पहले से ही भयावह भुखमरी संकट और भी गम्भीर हो गया है. अन्तरराष्ट्रीय समुदाय ने व्यापक स्तर पर इसकी निन्दा की है.
संयुक्त राष्ट्र विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक़, कुपोषण की वजह से कम से कम 57 बच्चों की मृत्यु हो चुकी है.
यह संख्या एक अनुमान मात्र है और आशंका है कि अगर राहत सहायता पर पाबन्दी जारी रही, तो इस संख्या में वृद्धि हो सकती है.
संयुक्त राष्ट्र के सम्मानित भागीदारों, खाद्य असुरक्षा विशेषज्ञों ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में, चेतावनी दी है कि अगर ग़ाज़ा के लोगों को पर्याप्त भोजन और स्वास्थ्य देखभाल तक पहुँच हासिल नहीं हुई, तो पाँच वर्ष से कम उम्र के लगभग 71 हज़ार बच्चों को अगले 11 महीनों में तीव्र कुपोषण का सामना करना पड़ेगा.
रात भर चला अभियान
संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) द्वारा ऑनलाइन प्रकाशित वीडियो फुटेज में सहायता दल को तत्परता से, तेज़ रौशनी वाले गोदामों में ट्रकों से आटे की बोरियाँ उतारते हुए दिखाया गया है.
एजेंसी ने बताया, "हमारी टीमें बेकरियों को फिर से चलाने के लिए बिना रुके काम कर रही हैं."
31 मार्च को गेहूँ का आटा और ईंधन समाप्त होने पर, 25 बेकरियों को बन्द करना पड़ा था.
लेकिन संयुक्त राष्ट्र एजेंसी ने आगाह किया, “यह सामग्री ज़रूरतमन्द लोगों की मदद के लिए अब भी पर्याप्त नहीं है. हमें खाद्य सामग्री से भरे अधिक ट्रकों व अधिक भोजन की ज़रूरत है."
खाद्य असुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लगातार 19 महीनों से जारी इसराइली बमबारी के बाद, पाँच में से एक ग़ाज़ा निवासी भुखमरी का सामना कर रहा है.
संयुक्त राष्ट्र के सहायता समन्वय कार्यालय - OCHA ने तबाह हुए इलाक़े में अधिक जीवन रक्षक आपूर्ति पहुँचाए जाने की तत्काल आवश्यकता को दोहराते हुए इस बात पर बल दिया कि मानवीय त्रासदी से बचने के लिए और भी अधिक सहायता की आवश्यकता होगी.
ईंधन लाने की अनुमति नहीं
संयुक्त राष्ट्र एजेंसी ने कहा कि इसराइली अधिकारियों ने किसी भी तरह के स्वच्छता उत्पादों या ईंधन को इलाक़े में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी है.
OCHA ने अपने नवीनतम अपडेट में बताया, "संयुक्त राष्ट्र और इसके साझीदार, ग़ाज़ा में सहायता के प्रवाह को बाधित या निलम्बित नहीं होने देने के लिए, केरेम शेलोम से ज़रिए ग़ाज़ा में प्रवेश का सबसे उचित मार्ग पहचानने के लिए इसराइली अधिकारियों के सम्पर्क में हैं.
यूएन साझीदार, ग़ाज़ा में समुदाय के नेताओं के साथ संवाद कर रहे हैं ताकि लूट के जोखिम को कम किया जा सके. साथ ही यह सुनिश्चित किया जा सके कि ग़ाज़ा में प्रवेश करने वाली सामग्री उन लोगों तक पहुँच सके, जो इनपर निर्भर हैं."
उधर, ग़ाज़ा के लोग हर रोज इसराइली बमबारी व गोलाबारी का सामना कर रहे हैं. मंगलवार को ही कई लोगों के मारे जाने की ख़बर है.
इसके ठीक एक दिन बाद OCHA ने बताया कि स्वास्थ्य अधिकारियों ने बीमार व घायल लोगों के इलाज के लिए रक्त दाताओं से तत्काल रक्तदान का अनुरोध किया है.
संयुक्त राष्ट्र एजेंसी ने कहा, "हिंसा के बीच, बड़ी संख्या में लोगों का विस्थापित होना जारी है - लोग अपने समुदायों पर हो रही तेज़ बमबारी से बचने के लिए, एक बार फिर भागने को मजबूर हैं और कोई सुरक्षित स्थान नहीं है जहाँ वे शरण या आपूर्ति हासिल कर सकें."
एजेंसी के अनुसार, ग़ाज़ा की 80 प्रतिशत आबादी को या तो विस्थापन आदेश दिए जा चुके हैं या फिर वो इसराइली सैन्य क्षेत्रों में मौजूद है, जिससे उन तक पहुँचने के लिए सहायता टीमों को इसराइली अधिकारियों के साथ समन्वय की जरूरत पड़ती है.
OCHA ने कहा, "साझीदारों ने बताया कि हाल ही में विस्थापित लगभग आधे लोग बिना किसी सामान के ही भागने को मजबूर हुए हैं. ग़ाज़ा की आबादी का लगातार जारी विस्थापन, मानवीय टीमों पर भारी दबाव डाल रहा है - ख़ासतौर पर ऐसे समय में, जब उनके लिए भोजन या अन्य बुनियादी सामग्री उपलब्ध नहीं है."