दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों में स्थित धोखाधड़ी अड्डे एक ‘मानवाधिकार संकट’
संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों को, लोगों को घोटाले के जाल में फँसने से बचाने के लिए और अधिक प्रयास करने चाहिए. ऐसा माना जाता है कि विभिन्न राष्ट्रीयताओं के सैकड़ों-हज़ारों लोगों को कम्बोडिया, म्याँमार, लाओस, फिलीपीन्स और मलेशिया में स्थित केन्द्रों में, धोखाधड़ी करने के लिए मजबूर किया जाता है.
मानवाधिकार विशेषज्ञ टोमोया ओबोकाटा, सिओभान मुल्लाली और विटिट मुंटरभॉर्न ने बुधवार को कहा, “स्थिति मानवीय और मानवाधिकार संकट के स्तर पर पहुँच गई है.”
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि रिहा किए गए हज़ारों पीड़ित जन, म्याँमार-थाईलैंड सीमा पर अमानवीय परिस्थितियों में फँसे हुए हैं.
भूमिगत यानि अवैध काम या गतिविधियाँ अक्सर आपराधिक नैटवर्क से जुड़े होते हैं जो पीड़ितों को वैश्विक स्तर पर भर्ती करते हैं और उन्हें मुख्य रूप से कम्बोडिया, म्याँमार, लाओस, फिलीपीन्स और मलेशिया में स्थित धोखाधड़ी केन्द्रों में काम पर लगाते हैं.
ये मानवाधिकार विशेषज्ञ या विशेष रैपोर्टेयर, मानवाधिकार परिषद को अपनी रिपोर्ट सौंपते हैं. वे संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारी नहीं होते हैं और स्वतंत्र क्षमता में काम करते हैं. उन्हें संयुक्त राष्ट्र की तरफ़ से कोई वेतन आदि भी अदा नहीं किया जाता है.
इन मानवाधिकार विशेषज्ञों ने कहा है कि अनेक पीड़ितों का अपहरण कर लिया जाता है और उन्हें धोखाधड़ी वाली अन्य गतिविधियों के लिए बेच दिया जाता है.
उन्होंने कहा कि जब तक उनके परिवारों की तरफ़ से फिरौती नहीं दी जाती, तब तक इन पीड़ितों या कामगारों को मुक्त नहीं किया जाता है. और यदि वे भागने का प्रयास करते हैं, तो उन्हें किसी क़ानूनी कार्रवाई या दंड की परवाह किए बिना प्रताड़ित किया जाता है या मार भी दिया जाता है. इसमें भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों की भी मिलीभगत होती है.
मानवाधिकार विशेषज्ञों ने कहा, "पीड़ितों की एक बार तस्करी होने के बाद, उनसे उनकी स्वतंत्रता छीन ली जाती है और उन्हें अत्यन्त गम्भीर दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है, जिसमें यातना, दुर्व्यवहार, गम्भीर हिंसा और मारपीट, बिजली के झटके, एकान्त कारावास व यौन हिंसा भी शामिल होते हैं."
'साइबर-अपराध के ज़िम्मेदारों से निपटें'
संयुक्त राष्ट्र के इन स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने कहा है कि इन पीड़ितों को, भोजन और स्वच्छ पानी तक सीमित पहुँच होती है और रहने के स्थान अक्सर तंग और स्थितियाँ अस्वास्थ्यकर होते हैं.
विशेषज्ञों ने दक्षिण पूर्व एशियाई देशों और तस्करी के शिकार श्रमिकों के मूल देशों से, अधिक तेज़ी से सहायता प्रदान करने और पीड़ितों की सुरक्षा व धोखाधड़ी को रोकने के प्रयासों को बढ़ाने का आग्रह किया है.
इसमें ऐसे प्रयास शामिल होने चाहिए जो "सतही स्तर के सार्वजनिक जागरूकता अभियानों से परे हों" और जो जबरन साइबर अपराध के कारणों - ग़रीबी, उचित कार्य स्थितियों, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच की कमी, जैसे मुद्दों से निपटा जाए.
सरकारों को दी गई अन्य सिफ़ारिशों में अपर्याप्त नियमित प्रवास विकल्पों पर ध्यान देना शामिल है जो लोगों को मानव तस्करों के चंगुल में धकेलते हैं.
महामारी के बाद घोटालों का प्रसार
यूएन न्यूज़ ने, साल 2024 में, क जाँच में घोटाले के बड़े-बड़े स्थानों के अन्धकारमय स्थितियों में चलाई जा रही गतिविधियों का रहस्य खोला था, जिसमें पाया गया था कि कोविड-19 महामारी के बाद उनमें बहुत वृद्धि हुई थी.
संयुक्त राष्ट्र की ड्रग्स व अपराध नियंत्रण एजेंसी – UNODC के एक पदाधिकारी बेनेडिक्ट हॉफ़मैन का कहना है, "दक्षिणपूर्व एशिया क्षेत्र, वैश्विक घोटाला उद्योग का केन्द्र है."
UNODC के, दक्षिणपूर्व एशिया और प्रशान्त क्षेत्र के उप क्षेत्रीय प्रतिनिधि बेनेडिक्ट हॉफमैन ने फिलीपीन्स के एक घोटाले वाले स्थल से कहा, "इस क्षेत्र में स्थित अन्तरराष्ट्रीय संगठित आपराधिक समूह, इन गतिविधियों की चौतरफ़ा योजना बनाने और उन पर अमल करने में संलिप्त रहे हैं और वो ही इनसे सबसे अधिक लाभ कमा रहे हैं."
उस स्थल को मार्च 2024 में अधिकारियों ने बन्द कर दिया था.
बेनेडिक्ट हॉफ़मैन ने बताया कि जब यूएन न्यूज़ ने परिसर में प्रवेश किया था, तो पाया गया कि इसमें 700 कर्मचारी रहते थे, जिन्हें "मूल रूप से बाहरी दुनिया से अलग रखा गया था."
"उनकी सभी दैनिक ज़रूरतें पूरी की जाती हैं. यहाँ रेस्तराँ, सामूहिक आवास, नाई की दुकानें और यहाँ तक कि गीत-संगीत वाले मनोरंजन स्थल भी हैं. इसलिए, लोगों को वास्तव में यहाँ से कहीं बाहर जाने की ज़रूरत नहीं है और वे महीनों तक यहाँ रह सकते हैं."
वहाँ से निकलकर भागना लगभग असम्भव काम था और अगर कोई ऐसे प्रयास करते भी थे तो इसकी भारी क़ीमत चुकानी पड़ती थी.
यूएनओडीसी अधिकारी ने ज़ोर देकर कहा, "कुछ लोगों को, धोखाधड़ी के ज़रिए ऐंठे जाने वाले धन के मामले में अपना दैनिक कोटा पूरा नहीं करने पाने या वहाँ से बाहर निकलने की कोशिश करने की सज़ा के रूप में हर रोज़ प्रताड़ित किया गया है और उन्हें अकल्पनीय हिंसा का सामना करना पड़ा है."
पीड़ित लोग कई तरह के होते हैं, वे लोग जो दुनिया भर में अपने स्थानों पर रहते हुए ही ठगे जाते हैं, लेकिन वे लोग भी होते हैं जिन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध यहाँ तस्करी करके लाया जाता है और जो हिंसा की चपेट में आते हैं."