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ग़ाज़ा: बढ़ती आवश्यकताओं के बीच, टुकड़ों में जीवनरक्षक सहायता पहुँचाने की अनुमति

गाजा में फिलिस्तीनी बच्चे खाद्य सहायता की प्रतीक्षा करते हुए खाली धातु के डिब्बे पकड़े हुए हैं।
UN News मानवीय सहायता एजेंसियों का कहना है कि सहायता सामग्री के ग़ाज़ा में प्रवेश पर लगी इसराइली पाबन्दी से, वहाँ भोजन सामग्री ख़त्म हो रही है.

ग़ाज़ा: बढ़ती आवश्यकताओं के बीच, टुकड़ों में जीवनरक्षक सहायता पहुँचाने की अनुमति

मानवीय सहायता

संयुक्त राष्ट्र प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने बताया है कि ग़ाज़ा पट्टी में क़रीब तीन महीनों की नाकाबन्दी के बाद, मानवीय सहायता आपूर्ति फिर से शुरू हुई है, हालांकि विशाल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए यह फ़िलहाल पर्याप्त स्तर पर नहीं है.

यूएन प्रवक्ता ने मंगलवार को न्यूयॉर्क में पत्रकारों को जानकारी देते हुए कहा कि सबसे ज़रूरतमन्दों को जल्द से जल्द, सीधे तौर पर राहत मुहैया कराई जानी अहम है.

यूएन मानवतावादी कार्यालय (OCHA) के अनुसार, इसराइल ने केरेम शलोम सीमा चौकी के रास्ते सोमवार को 9 ट्रकों को स्वीकृति दी थी, लेकिन केवल पाँच को ही प्रवेश करने दिया गया.

यूएन प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने कहा कि सीमा चौकी के फ़लस्तीनी हिस्से में राहत सामग्री को ट्रकों से उतारा जाएगा. फिर ग़ाज़ा में मानवीय सहायता टीम को अनुमति मिलने व सम्पर्क स्थापित होने के बाद इस सामान को अलग से लादा जाएगा ताकि ज़रूरतमन्दों तक पहुँचाया जा सके.

मंगलवार को, यूएन राहत टीमों को हरी झंडी मिलने के लिए कई घंटों तक प्रतीक्षा करनी पड़ी है.

“मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूँ कि वैसे तो ग़ाज़ा पट्टी में और अधिक मात्रा में आपूर्ति पहुँची है, हम इन सामान को अपने भंडार गृह व वितरण केन्द्रों तक पहुँचा नहीं पाए हैं.”

यूएन मानवीय सहायताकर्मी केरेम शलोम सीमा चौकी के ज़रिये ग़ाजा में आटा, दवाएँ, पोषक आहार और अन्य बुनियादी सामान भेज रहे हैं. इससे पहले, बच्चों के भोजन के लिए फ़ॉर्मूला और अन्य सेहतमन्द सामग्री पहुँचाई गई थी.

इसराइल ने 2 मार्च को ग़ाज़ा में मानवीय सहायता की आपूर्ति पर पूर्ण रूप से पाबन्दी थोप दी थी, जिसका अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर विरोध बढ़ता जा रहा था. फ़लस्तीनी आबादी के लिए अकाल और भुखमरी की आशंका बढ़ने के बाद, इसराइल ने ग़ाज़ा में सहायता आपूर्ति के साथ चंद ट्रकों को ग़ाज़ा में प्रवेश की अनुमति दी है.

इस बीच, इसराइली सैन्य बलों ने ग़ाज़ा में अपनी कार्रवाई तेज़ करने की भी बात कही है. बमबारी और बार-बार दिए जाने वाले विस्थापन आदेशों की वजह से आम लोग बेहद कठिन हालात में जीवन गुज़ार रहे हैं.

गाजा शहर की एक सड़क पर पैदल यात्री चल रहे हैं, जिसके पीछे मलबे का एक बड़ा ढेर दिखाई दे रहा है। बादलों से घिरे आसमान के नीचे सड़क के किनारे इमारतें बनी हुई हैं।
UN News ग़ाज़ा सिटी की सड़कें.

लूटपाट की आशंका

यूएन मानवीय सहायता टीमों को इसराइल ने क़रीब 100 सहायता ट्रकों को ग़ाज़ा भेजने की अनुमति दी है, हालांकि राहत सामग्री का यह स्तर पूरी तरह से अपर्याप्त है.

आपात राहत मामलों के लिए यूएन कार्यालय (OCHA) के प्रवक्ता येन्स लार्क ने कहा कि ग़ाज़ा में आम लोगों में हताशा बढ़ रह है, और उसके नतीजों का अन्दाज़ा लगाया जा सकता है.

उन्होंने जिनीवा में पत्रकारों को बताया कि “इनमें से एक यह है कि अपर्याप्त आपूर्ति की लूटपाट होने का जोखिम अधिक होता है.”

ग़ाज़ा में लूटे गए उत्पादों की कालाबाज़ारी हो रही है और उन्हें ऊँची क़ीमतों पर बेचा जा रहा है. ऐसे में बड़े पैमाने पर सहायता सामग्री पहुँचाए जाने से स्थिति में बेहतरी लाई जा सकती है.

घातक हमले व विस्थापन

स्थानीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में हुए इसराइली हमलों में सैकड़ों फ़लस्तीनी मारे गए हैं.

सोमवार को इंडोनेशियाई अस्पताल पर हमला किया गया था, जिससे बिजली जनरेटर क्षतिग्रस्त हुआ है और स्वास्थ्य सेवाओं को स्थगित करने के लिए मजबूर होना पड़ा है. इस घटना के समय वहाँ 55 लोग मौजूद थे, जिनमें मरीज़ और स्वास्थ्यकर्मी हैं.

सोमवार को अल नुसेरात इलाक़े में एक इसराइली हवाई हमले में एक स्कूल में शरण ले रहे सात लोग मारे गए जबकि कई अन्य घायल हुए. मृतकों में फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए यूएन एजेंसी (UNRWA) के दो कर्मचारी भी हैं.

इस बीच, इसराइल ने मंगलवार को एक और विस्थापन आदेश जारी किया है, जिससे उत्तरी ग़ाज़ा के 26 इलाक़े प्रभावित हुए हैं. ग़ाज़ा पट्टी का 80 फ़ीसदी हिस्सा अब विस्थापन आदेशों से प्रभावित है या फिर इसराइली सैन्य बलों के इलाक़े में स्थित है.

7 अक्टूबर 2023 को इसराइल पर हमास के आतंकी हमलों में 1,200 लोगों की जान गई थी और 250 से अधिक को बन्धक बना लिया गया था. 58 बन्धक अब भी क़ब्ज़े में है, जिनमें से 23 के जीवित होने की सम्भावना है.

इन हमलों के बाद शुरू हुए ग़ाज़ा युद्ध में अब तक 300 से अधिक मानवीय सहायताकर्मियों की जान जा चुकी है. क़रीब 53 हज़ार फ़लस्तीनी मारे गए हैं और 1.19 लाख घायल हुए हैं.