अफ़ग़ानिस्तान में शरणार्थियों की सामूहिक वापसी, धन कटौती से सहायता प्रयासों में चुनौती
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) अपने साझीदार संगठनों के साथ मिलकर, पड़ोसी देशों से वापिस लौट रहे अफ़ग़ान शरणार्थियों के लिए समर्थन मुहैया कराने मे जुटी है, लेकिन सहायता धनराशि की कटौती की वजह चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है.
एक अनुमान के अनुसार, सितम्बर 2023 के बाद से अब तक पाकिस्तान और ईरान से 30 लाख से अधिक शरणार्थियों ने मजबूरी में या तो अफ़ग़ानिस्तान अपने आप वापसी की है या फिर उन्हें देश निकाला दिया गया है.
वर्ष 2025 में अब तक, 7.80 लाख शरणार्थियों के वापिस अफ़ग़ानिस्तान लौटने का अनुमान है, जिनमें 3.51 लाख लोगों को देश निकाला दिया गया है.
यूएन शरणार्थी एजेंसी ने सचेत किया कि आम नागरिक एक ऐसे देश में वापसी कर रहे हैं, जहाँ उनके लिए हालात अनुकूल नहीं हैं. यूएन विकास कार्यक्रम (UNDP) का कहना है कि देश की तीन-चौथाई आबादी किसी तरह पेट भरकर दैनिक गुज़र-बसर कर रही है, जबकि आधी आबादी को मानवीय सहायता की आवश्यकता है.
UNHCR समेत अन्य यूएन एजेंसियों और अन्तरराष्ट्रीय समुदायों ने शरणार्थियों को अनेक प्रकार की मदद मुहैया कराई है, जिसके तहत उन्हें जीवन फिर पटरी पर लाने, आवास निर्माण या छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए नक़दी अनुदान दिए गए हैं.
साथ ही, उन्हें क्लीनिक, स्कूल, आवास और रोज़गार अवसर भी प्रदान करने की कोशिशें की गई हैं.
जबरन देश वापसी
पिछले कई दशकों से लाखों अफ़ग़ान नागरिकों ने पाकिस्तान में शरण ली हुई है, मगर सितम्बर 2023 में पाकिस्तान ने ‘अवैध विदेशी नागरिकों’ को उनके देश वापिस भेजने के लिए अपनी मुहिम शुरू की. इस योजना के तहत पहले चरण में बिना दस्तावेज़ों के रह रहे अफ़ग़ान नागरिकों को, जबरन व स्वैच्छिक ढंग से वापिस भेजा गया.
ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान ने इस वर्ष 7 मार्च को इसका दूसरा चरण शुरू करने की घोषणा की थी. 3 अप्रैल से 3 मई के दौरान, 1 लाख 9 हज़ार अफ़ग़ान नागरिक, पाकिस्तान से वापिस अपने देश लौटे हैं.
ईरान से वापिस भेजे जा रहे नागरिकों की स्थिति भी बेहद चिन्ताजनक है. जनवरी से अप्रैल महीने के दौरान, बिना ज़रूरी दस्तावेज़ों के रह रहे 2.65 लाख अफ़ग़ान नागरिकों को वापिस भेजा गया है, जिनमे से क़रीब 75 फ़ीसदी जबरन वापसी का शिकार हुए हैं.
यूएन एजेंसी ने आगाह किया कि अफ़ग़ान नागरिकों की देश वापसी, स्थिरता, आर्थिक प्रगति और क्षेत्रीय समरसता का स्रोत हो सकती है, मगर तभी जब यह स्वैच्छिक हो और सुरक्षा व गरिमा के साथ इसे पूरा किया जाए.
बजट कटौती का गम्भीर असर
संयुक्त राष्ट्र मानवीय सहायता एजेंसियों को फ़िलहाल कठिन वित्तीय हालात से गुज़रना पड़ रहा है और राहत अभियान के लिए धनराशि की क़िल्लत है. इस पृष्ठभूमि में, यूएन शरणार्थी एजेंसी ने चिन्ता जताई है कि अफ़ग़ान नागरिकों को पर्याप्त स्तर पर समर्थन नहीं मिल पा रहा है.
देश वापसी करने वाले लोगों को सीमा चौकियों पर दी जाने वाली नक़द धनराशि में बड़ी कटौती करनी पड़ी है, और मौजूदा सहायता पैकेज में केवल बुनियादी सहायता पर ही ध्यान दिया रहा है. इससे उन्हें कुछ समय के लिए गुज़र-बरस में मदद मिल जाएगी, मगर जीवन में ठोस बदलाव ला पाना सम्भव नहीं होगा.
बजट कटौती की वजह से उन लोगों तक मदद पहुँचाने की क्षमता पर भी असर हुआ है, जो निजी जोखिम झेलते हुए अफ़ग़ान महिलाओं व लड़कियों को समर्थन दे रहे हैं, जो उनकी शिक्षा व कामकाज के लिए माहौल बनाने में जुटे हैं.
यूएन एजेंसी ने कहा कि अफ़ग़ान शरणार्थियों की देश वापसी के बावजूद, बड़ी संख्या में अन्य नागरिक ईरान, तुर्कीये और योरोपीय देशों का रुख़ करने की तैयारी कर रहे हैं.
UNHCR ने अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया है कि अफ़ग़ानिस्तान में निवेश से पीछे नहीं हटना होगा, वहाँ राजनैतिक व वित्तीय समर्थन जारी रखना होगा, ताकि लोग एक बार फिर अपने भविष्य को आकार दे सकें.
यूएन एजेंसी ने इस वर्ष अफ़ग़ानिस्तान में अपने सहायता प्रयासों के लिए 21 करोड़ डॉलर की धनराशि की अपील की है, मगर फ़िलहाल इसका 25 फ़ीसदी जुटाना ही सम्भव हुआ है.