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भविष्य में महामारियों से बचाव के लिए देशों का ऐतिहासिक समझौता

WHO, यूनीसेफ़ और GAVI ने 2022 में सोलोमन द्वीप में दूरदराज़ के स्थानों पर रहने वाले समुदायों को कोविड-19 व अन्य टीके प्रदान किए. (फ़ाइल)
© WHO/Neil Nuia
WHO, यूनीसेफ़ और GAVI ने 2022 में सोलोमन द्वीप में दूरदराज़ के स्थानों पर रहने वाले समुदायों को कोविड-19 व अन्य टीके प्रदान किए. (फ़ाइल)

भविष्य में महामारियों से बचाव के लिए देशों का ऐतिहासिक समझौता

स्वास्थ्य

कोविड-19 स्वास्थ्य आपदा से सबक़ सीखने के इरादे से प्रेरित तीन साल की बातचीत के बाद, देशों ने भविष्य की महामारियों को बेहतर ढंग से रोकने, उनका मुक़ाबला करने के लिए तैयार रहने और जवाबी कार्रवाई करने के लिए दुनिया का प्रथम ऐतिहासिक अन्तरराष्ट्रीय समझौता अपनाया है.

यह नया समझौता जीवन की रक्षा करने और भविष्य में होने वाले प्रकोपों ​​के विनाशकारी परिणामों से बचने के लिए मज़बूत वैश्विक सहयोग सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा क़दम है.

इसने कोई सन्देह नहीं है कि विनाशकारी कोविड-19 महामारी के प्रभाव अब भी महसूस किए जा रहे हैं. कोविड-19 महामारी के कारण लगभग 70 लाख लोगों की मौत हुई, स्वास्थ्य प्रणालियाँ चरमरा गईं और वैश्विक अर्थव्यवस्था असल में से पूरी तरह ठप होने के निकट पहुँच गई थी.

उस वैश्विक उथल-पुथल से स्तब्ध हुए अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को इस तरह की भयावह घटना को फिर से होने से रोकने के उद्देश्य से, एक समझौते पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया - और यह सुनिश्चित किया कि दुनिया भविष्य में इस तरह की महामारियों का मुक़ाबला करने के लिए बेहतर तरीक़े से तैयार हो.

यह ऐतिहासिक निर्णय मंगलवार को जिनीवा में, विश्व स्वास्थ्य सभा की बैठक में लिया गया, जोकि विश्व स्वास्थ्य संगठन – WHO की वार्षिक बैठक होती है.

वैसे तो इस समझौते को औपचारिक रूप से इसे मंगलवार को अपनाया गया, मगर WHO के सदस्य देशों ने सोमवार को ही इस समझौते को भारी बहुमत से मंज़ूरी दे दी. 

इसके पक्ष में, 124 वोट पड़े और 11 सदस्य देश अनुपस्थित रहे. इसके विरोध में कोई मत नहीं पड़ा. इस तरह यह समझौता सर्वसम्मति से पारित हुआ.

इसका मतलब यह हुआ कि अन्तिम क्षणों में आश्चर्यजनक रूप से मतदान होने के बजाय, इस समझौते को सर्वसम्मति से अपनाया जाना एक उत्सव जैसा अनुभव था. WHO के महानिदेशक डॉक्टर टैड्रॉस मतदान के दिन से पहले, केवल "सतर्क आशावाद" ही व्यक्त कर पाए थे.

WHO के सदस्य देशों द्वारा, मंगलवार 20 मई को, विश्व महामारी तैयारी समझौते के मंज़ूरी दिए जाने के समय का नज़ारा.
WHO/Christopher Black

मंगलवार को, समझौता पारित होने के बाद डॉक्टर टैड्रॉस ने कहा, "यह समझौता सार्वजनिक स्वास्थ्य, विज्ञान और बहुपक्षीय कार्रवाई की जीत है. यह सुनिश्चित करेगा कि हम सामूहिक रूप से भविष्य की महामारी के ख़तरों से दुनिया की बेहतर तरीक़े से रक्षा कर सकें.”

"यह अन्तरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा भी एक मान्यता है कि हमारे नागरिकों, समाजों और अर्थव्यवस्थाओं को, कोविड-19 के दौरान झेले गए नुक़सानों की तरह, फिर से असुरक्षित नहीं छोड़ा जा सकता."

‘जीवन में एक बार मिलने वाला अवसर’

कोविड-19 महामारी ने निदान, उपचार और वैक्सीन के मामले में देशों के बीच और उनके भीतर मौजूद घोर असमानताओं को उजागर किया. इस समझौते का मुख्य उद्देश्य, कमियों को दूर करना व भविष्य में किसी भी महामारी का अधिक निष्पक्ष और कुशल तरीक़े से इलाज करना है.

फिलीपीन्स के स्वास्थ्य विभाग के सचिव और इस वर्ष की विश्व स्वास्थ्य सभा के अध्यक्ष डॉक्टर टेओडोरो हर्बोसा ने घोषणा की, “अब जबकि समझौता लागू हो गया है, हम सभी को इसके महत्वपूर्ण तत्वों को लागू करने के लिए समान तत्परता से काम करना होगा, जिसमें महामारी का मुक़ाबला करने से सम्बन्धित जीवनरक्षक स्वास्थ्य उत्पादों तक समान पहुँच सुनिश्चित करने की प्रणालियाँ शामिल हैं.”

डॉक्टर टेओडोरो हर्बोसा ने ही, समझौते को अपनाने वाली बैठक की अध्यक्षता की.

उन्होंने कहा, “चूँकि कोविड-19 जीवन में एक बार मिलने वाली आपदा थी, इसलिए WHO महामारी समझौता उस संकट से सीखे गए सबक़ पर काम करने और यह सुनिश्चित करने का, जीवन में एक बार मिलने वाला अवसर प्रदान करता है कि भविष्य में महामारी आने पर दुनिया भर के लोग बेहतर तरीक़े से सुरक्षित रहें.”

समझौते पर बातचीत की प्रक्रिया के दौरान राष्ट्रीय सम्प्रभुता का मुद्दा कई बार उठाया गया है, जिसमें ऑनलाइन मंचों किए जा रहे पर झूठे दावे नज़र आते हैं WHO किसी तरह से, सम्प्रभु देशों से नियंत्रण छीनने का प्रयास कर रहा है.

समझौते में इन दावों का खंडन करते हुए बड़ी तकलीफ़ के साथ कहा गया है कि ऐसी बात नहीं है. इसमें निहित कोई प्रावधान, WHO को, राष्ट्रीय क़ानूनों में बदलाव या हस्तक्षेप करने या देशों को यात्रियों पर प्रतिबन्ध लगाने, टीकाकरण लागू करने या तालाबन्दी लागू करने जैसे उपाय करने के लिए मजबूर करने का कोई अधिकार नहीं देता है.

11 देश मतदान से अनुपस्थित और अमेरिका बाहर रहा

इस समझौते पर हुए मतदान में, पोलैंड, इसराइल, इटली, रूस, स्लोवाकिया और ईरान सहित 11 देश अनुपस्थित रहे. अनुपस्थित रहने वाले देशों को, मतदान के बाद यह बताने का अवसर दिया गया कि उन्होंने यह फ़ैसला क्यों लिया.

पोलैंड के प्रतिनिधि ने बताया कि वो अपने देश द्वारा की गई समीक्षा से पहले, इस सन्धि का समर्थन नहीं कर सकते, जबकि रूस ने सम्प्रभुता के मुद्दे पर चिन्ता व्यक्त की. ईरान के प्रतिनिधि ने कहा कि, “विकासशील देशों की कुछ बहुत अहम चिन्ताओं पर बात नहीं की गई है.”

मतदान से पहले आयोजित हुए उच्चस्तरीय चरण में, एक प्रमुख आपत्ति संयुक्त राज्य अमेरिका की तरफ़ से दाख़िल की गई, जिसने जनवरी (2025) में WHO से बाहर होने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी, जिसके लागू होने में एक वर्ष का समय लगता है. अमेरिका ने मतदान में भी शिरकत नहीं की.

WHO के सदस्य देशों ने महामारी तैयारी समझौते को, मतदान के ज़रिए आम सहमति से पारित किया.
© WHO/Christopher Black

अगले क़दम

  • इस समझौते को पारित किए जाने की एक महत्वपूर्ण क़दम के रूप में सराहना की गई है, मगर यह चरण पूरी प्रक्रिया की शुरुआत भर है.
  • अगला क़दम एक अन्तर-सरकारी कार्य समूह के माध्यम से, इस समझौते को लागू करना है.
  • इस प्रक्रिया के परिणाम पर, वर्ष 2026 में होने वाली विश्व स्वास्थ्य सभा में विचार किया जाएगा.
  • विश्व स्वास्थ्य सभा जब एक बार कार्य समूह की रिपोर्ट को अपना लेती है, तो समझौता हस्ताक्षर और अनुसमर्थन (ratification) के लिए खोल दिया जाएगा. 60 देशों द्वारा आरम्भिक मंज़ूरी के बाद, यह समझौता लागू हो माना जाएगा.

अन्य प्रावधानों में महामारी की रोकथाम, तैयारी और प्रतिक्रिया के लिए एक नया वित्तीय तंत्र, और एक वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला व रसद नैटवर्क का निर्माण शामिल है, ताकि "अन्तरराष्ट्रीय चिन्ता की सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों के दौरान जरूरतमन्द देशों के लिए महामारी से सम्बन्धित स्वास्थ्य उत्पादों तक न्यायसंगत, समय पर, त्वरित, सुरक्षित और किफ़ायती पहुँच सुनिश्चित करने और बाधाओं को दूर करने के लिए काम किया जा सके.

इसमें महामारी आपातस्थितियाँ, और ऐसी आपातस्थितियों की रोकथाम भी शामिल है.