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कोविड-19 महामारी के दौरान, इंडोनेशिया के इस स्वास्थ्य केन्द्र को, चिकित्सा कर्मचारियों में संक्रमण के कारण, तीन बार बन्द करना पड़ा. WHO, महामारी का मुक़ाबला करने की तैयारी की बात कर रहा है.

जिनीवा में, ‘महामारी तैयारी सन्धि’ को मंज़ूरी के मुद्दे पर विश्व पंचायत

© UNICEF/Ulet Ifansasti
कोविड-19 महामारी के दौरान, इंडोनेशिया के इस स्वास्थ्य केन्द्र को, चिकित्सा कर्मचारियों में संक्रमण के कारण, तीन बार बन्द करना पड़ा. WHO, महामारी का मुक़ाबला करने की तैयारी की बात कर रहा है.

जिनीवा में, ‘महामारी तैयारी सन्धि’ को मंज़ूरी के मुद्दे पर विश्व पंचायत

स्वास्थ्य

क्या दुनिया अगली महामारी का मुक़ाबला करने के लिए बेहतर तरीक़े से तैयार है? ऐसे में जबकि देश अब भी कोविड-19 के स्थाई प्रभावों से जूझ रहे हैं, यही सवाल, भविष्य की महामारियों का सामना करने के बारे में एक अन्तरारष्ट्रीय समझौते को आकार दे रहा है. इस समझौते को अपनाए जाने के बारे में, जिनीवा में सोमवार को देशों के बीच अहम बैठक शुरू हुई है जो 27 मई तक चलेगी.

संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख स्वास्थ्य मंच - विश्व स्वास्थ्य सभा की इस वर्ष की बैठक में अनेक अहम मुद्दों पर बात होनी है. बैठक में देशों के अधिकारी महामारी का मुक़ाबला करने की तैयारी और जलवायु सम्बन्धी स्वास्थ्य जोखिमों से लेकर मानसिक स्वास्थ्य, मातृ देखभाल और पर्यावरण न्याय तक के व्यापक एजेंडे पर काम करेंगे.

लेकिन बैठक में, भू-राजनैतिक तनाव के कारण, इन और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर अन्तराष्ट्रीय सहयोग की परीक्षा होगी.

बैठक में अहम चर्चा में रहने वाले कुछ प्रमुख मुद्दे इस प्रकार हैं:

1. 'सतर्क आशावाद': महामारी तैयारी समझौते पर हस्ताक्षर

कोविड-19 महामारी ने दिखाया कि देशों के भीतर और उनके बीच निदान, उपचार और वैक्सीन व टीकों तक पहुँच में भारी असमानताएँ हैं. स्वास्थ्य सेवाएँ चरमरा गईं, अर्थव्यवस्थाएँ बुरी तरह प्रभावित हुईं और लगभग 70 लाख लोगों की जान चली गई.

यह आपदा, देशों के लिए एक साथ मिलकर काम करने की प्रेरणा थी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दुनिया अगली महामारी का मुक़ाबला, अधिक निष्पक्ष और अधिक कुशल तरीक़े से कर सके. देशों के प्रतिनिधि सोमवार 19 मई को जिनीवा पहुँचकर, इस समझौते के मसौदे पर चर्चा करेंगे, जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख डॉक्टर टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेब्रेयेसस ने "भविष्य की पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण" बताया है.

यदि इस समझौता मसौदे को सन्धि के रूप में अपना लिया जाता है, तो यह दुनिया में महामारी और स्वास्थ्य संकटों से निपटने के तरीक़े में एक बड़ी सफलता होगी. वैसे तो, बातचीत राजनैतिक रूप से नाज़ुक बनी हुई है: संयुक्त राज्य अमेरिका सहित कई देशों ने राष्ट्रीय सम्प्रभुता और बौद्धिक सम्पदा अधिकारों के बारे में चिन्ताएँ व्यक्त की हैं. फिर भी, हाल के सप्ताहों में, डॉक्टर टैड्रॉस ने सतर्कता के साथ यह आशा व्यक्त की है कि आम सहमति बन सकती है.

मलावी में एक महिला सुरक्षा मास्क पहने हुए. कोविड-19 ने दुनिया भर में 70 लाख से अधिक लोगों की जान ले ली थी.
© UNDP Malawi

2. जलवायु परिवर्तन: अस्तित्व के बारे में ख़तरा

जलवायु संकट, केवल बढ़ते तापमान का मुद्दा नहीं है – यह आपदा जीवन को ख़तरे में डाल रही है. चरम मौसम और बीमारी का प्रकोप बढ़ रहा है, जिससे लाखों लोगों के स्वास्थ्य को ख़तरा है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन - WHO द्वारा बनाई गई कार्ययोजना में, जलवायु और स्वास्थ्य नीतियों को साथ मिलकर काम करने, सहनक्षमता को मज़बूत करने और कमज़ोर समुदायों की सुरक्षा के लिए धन उपलब्धता सुनिश्चित करने का आहवान किया गया है.

2024 के सम्मेलन में अपनाए गए प्रस्ताव के बाद योजना का मसौदा संस्करण जारी किया गया था और इस वर्ष, प्रतिनिधियों से मसौदे को अन्तिम रूप देने की उम्मीद है, जिसमें जलवायु से सम्बन्धित स्वास्थ्य जोखिमों के असर को करने वाली रणनीतियाँ शामिल हैं.

3. सर्वजन के लिए स्वास्थ्य: सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा को फिर से पटरी पर लाना

सभी लोगों को उनकी ज़रूरत की तमाम गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक किफ़ायती पहुँच सुनिश्चित करना, सतत विकास लक्ष्यों (SDG) में शामिल है, जिस पर संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों ने 2015 में हस्ताक्षर किए थे.

अलबत्ता, स्वास्थ्य लक्ष्य की प्राप्ति पटरी से बहुत दूर है: वास्तव में, पिछले दस वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार ठहर गया है.

फिर भी, सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा (UHC) का मुद्दा, विश्व स्वास्थ्य सभा (WHA) में सर्वोच्च प्राथमिकता पर रहेगा, जहाँ प्रतिनिधि, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों को मजबूत करने, स्थाई वित्तपोषण की गारंटी सुनिश्चित करने और कमज़ोर आबादी की देखभाल करने की रणनीतियों पर चर्चा करेंगे.

ये ब्राज़ील के एक स्वास्थ्य केन्द्र का दृश्य है. अब बात यही उठ रही है कि क्या दुनिया कोविड-19 जैसी महामारी का मुक़ाबला करने के लिए तैयार है?
© WHO/Panos/Eduardo Martino

4. स्वस्थ शुरुआत: जच्चा-बच्चा स्वास्थ्य

हर साल गर्भावस्था या प्रसव के दौरान जटिलताओं के कारण, लगभग 3 लाख महिलाओं की मृत्यु हो जाती है, जबकि 20 लाख से अधिक बच्चे अपने जीवन के पहले महीने में ही मौत के मुँह में चले जाते हैं.

WHO ने जच्चा-बच्चा की इन रोकी जा सकने वाली मौतों को टालने के लिए, अप्रैल (2025) में एक साल का अभियान शुरू किया है. इस अभियान का शीर्षक "स्वस्थ शुरुआत, आशापूर्ण भविष्य" है.

इसमें सरकारों और स्वास्थ्य समुदाय से जच्चा-बच्चा की रोकी जा सकने वाली मृत्यु से बचाने के प्रयासों को बढ़ाने और महिलाओं के दीर्घकालिक स्वास्थ्य एवं कल्याण को प्राथमिकता देने का आग्रह किया जाएगा.

इस सभा में रोकी जा सकने वाली मौतों को टालने के लिए नए लक्ष्यों और नई प्रतिबद्धताओं की घोषणा किए जाने की उम्मीद है.

5. खाइयों को पाटना: ग़ैर-संचारी रोग

हृदय रोग, कैंसर और मधुमेह जैसी ग़ैर-संचारी बीमारियाँ (NCD) हर साल लाखों लोगों की जान लेती हैं. इनमें से लगभग तीन-चौथाई लोगों की मौतें, निम्न और मध्यम आय वाले देशों में होती हैं.

अगर ज़्यादा से ज़्यादा देश, रोगों की पहचान, जाँच और उपचार जैसी मज़बूत राष्ट्रीय प्रतिक्रियात्मक कार्रवाई करें, तो बहुत से लोगों की जान बचाई जा सकती है.

इस बैठक में प्रतिनिधि, सितम्बर (2025) में होने वाली WHO की NCD और मानसिक स्वास्थ्य पर बैठक की तैयारी के लिए यह समीक्षा करेंगे कि संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी, इन बीमारियों को रोकने और नियंत्रित करने के लिए सरकारों, नागरिक समाज और निजी क्षेत्र के साथ किस तरह से सहयोग करती है.

साथ ही, आवश्यक दवाओं और स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों तक पहुँच को बेहतर बनाने के तरीक़ों पर भी विचार किया जाएगा.

दुनिया भर में कोविड-19 महामारी का संक्रमण, स्वास्थ्य कर्मियों में भी फैलने के कारण, विशाल चुनौतियों का सामना करना पड़ा था. अब WHO कह रहा है कि दुनिया भविष्य के लिए बेहतर तैयारियाँ कर सकती है.
WHO/Eduardo Martino

6. वित्त को सुचारू बनाना

इस वर्ष (2025) को संयुक्त राष्ट्र में अब तक के सबसे चुनौतीपूर्ण वर्षों में से एक बताया गया है, जो अपनी वित्तीय स्थिति को लेकर अत्यधिक दबाव से जूझ रहा है.

एक प्रमुख दानदाता देश संयुक्त राज्य अमेरिका घोषणा कर चुका है कि वह जनवरी में WHO से बाहर हो जाएगा, और अन्य देशों ने भी विकास व सहायता धन में कटौती की है.

इस वर्ष की सभा में सदस्य देश, आधार बजट में 50 प्रतिशत की वृद्धि पर बातचीत करेंगे, जो 2022 की बैठक के बाद से ही चल  रही है. यदि धन उपलब्धता बढ़ाने को मंज़ूरी मिल जाती है, तो इससे इस चुनौतीपूर्ण समय में, हौसला बढेगा.

WHO ने अतिरिक्त स्वैच्छिक दान राशि के लिए भी आग्रह किया है और सदस्य देशों व समाज सेवी संगठनों से, कुछ अतिरिक्त धन सहायता दिए जाने के संकल्प व्यक्त किए जाने की भी अपेक्षा है.

विश्व स्वास्थ्य सभा के इस 78वें सत्र की कार्रवाई यहाँ देखी जा सकती है.