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ग़ाज़ा: फ़लस्तीनी आबादी के लिए, घातक हमलों व घेराबन्दी की एक और आतंक भरी रात

विस्थापन शिविर में रह रहे फिलिस्तीनी बच्चे सर्दियों के दौरान एक अस्थायी चूल्हे पर खाना पका रहे हैं।
© WHO ग़ाज़ा में विस्थापित फ़लस्तीनी बच्चे. (फ़रवरी 2025)

ग़ाज़ा: फ़लस्तीनी आबादी के लिए, घातक हमलों व घेराबन्दी की एक और आतंक भरी रात

मानवीय सहायता

संयुक्त राष्ट्र सहायता एजेंसियों ने ग़ाज़ा पट्टी में मानवीय सहायता को हमास की ओर भेजे जाने के आरोपों का एक बार फिर पुरज़ोर ढंग से विरोध किया है, और सहायता आपूर्ति पर इसराइली रोक वापिस लेने की मांग की है. इस बीच, इसराइली बमबारी में बीती रात कम से कम 64 लोगों के मारे जाने की ख़बरें हैं.

WHO प्रवक्ता डॉक्टर मार्गरेट हैरिस ने जिनीवा में पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए बताया कि ग़ाज़ा में यह आतंक की एक और रात थी.

उन्होंने कहा कि हमलों में घायल हुए कुछ लोगों ने उत्तरी ग़ाज़ा में इंडोनेशियाई अस्पताल से मदद मांगी है, हालांकि 19 महीनों से जारी युद्ध के बाद यह केवल एक ढाँचा ही रह गया है.

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“हमने इसे वापिस खड़ा करने के लिए अपने सर्वोत्तम प्रयास किए हैं, और वे [स्वास्थ्यकर्मी] हर किसी का उपचार करने के लिए अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रहे हैं, लेकिन उनके पास हर ज़रूरी सामान की क़िल्लत है.”

यूएन एजेंसी ने राहत आपूर्ति को हमास को दे दिए जाने के आरोपों को ख़ारिज किया है. “हमने स्वास्थ्य क्षेत्र में यह नहीं देखा है. हम बस हर समय हताशा भरी आवश्यकताओं को देखते हैं.”

मानवीय सहायता में संयोजन के लिए यूएन कार्यालय (OCHA) के अनुसार, निरीक्षण और दानदाताओं को जानकारी देने की सख़्त व्यवस्था की वजह से सभी राहत सामान की वास्तविक समय में नज़दीकी निगरानी की गई, और उन्हें कहीं और भेजे जाने की सम्भावना कम है.

वैकल्पिक सहायता योजना का विरोध

OCHA प्रवक्ता येन्स लार्क ने कहा कि अगर ऐसा हो भी रहा होगा, तो यह उस स्तर पर नहीं है कि जीवनरक्षक सहायता अभियान को पूरी तरह से बन्द कर दिए जाने को न्यायसंगत ठहराया जा सके.

“अगर आप पिछले तीन वर्ष से कोमा में थे, और आप अभी उठे हों और ये सब कुछ पहली बार देखें तो सहज बोध के साथ कोई भी कहेगा कि यह उन्माद है.”

ग़ौरतलब है कि ग़ाज़ा में इसराइली प्रशासन ने पिछले 10 सप्ताह से अधिक समय से भोजन, ईंधन, दवा समेत अन्य आवश्यक सामान की आपूर्ति पर पूरी तरह से रोक लगा दी है.

इसराइल ने मौजूदा यूएन एजेंसियों को किनारे कर देने वाले एक वैकल्पिक राहत योजना का प्रस्ताव दिया है, जिसकी अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी समुदाय ने व्यापक आलोचना की है. इस योजना को फ़िलहाल लागू नहीं किया गया है.

मानवीय सहायता आपूर्ति का प्रवेश न हो पाने से कुपोषण मामले बढ़ रहे हैं, अकाल का जोखिम गहरा रहा है, जबकि हज़ारों की संख्या में ट्रकों में लदे सामान को जॉर्डन व मिस्र में रखने के लिए मजबूर होना पड़ा है, जिसे ग़ाज़ा भेजा जाना था.

OCHA ने अपने नए अपडेट में बताया कि संयुक्त राष्ट्र और उसके साझेदार संगठनों के पास ग़ाज़ा रवाना करने के लिए 9 हज़ार ट्रकों में महत्वपूर्ण आपूर्ति तैयार है. इनमें से आधे से अधिक ट्रकों में खाद्य सहायता लदी है, जिसके ज़रिये 21 लाख लोगों को अगले कई महीनों तक भोजन मुहैया कराया जा सकता है.

पास्ता और पढ़ाई का सामान: य़ुद्ध के हथियार?

यूएन मानवतावादी कार्यालय के प्रवक्ता येन्स लार्क ने कहा कि सहायता आपूर्ति में बच्चों की पढ़ाई-लिखाई के लिए ज़रूरी सामान, स्कूल बैग, तीन से 10 वर्ष के बच्चों के लिए जूते, स्टेशनरी, खिलौने, चावल, आटा, पास्ता, बिस्किट, शैम्पू, साबुन समेत अन्य सामान हैं.

“मैं आपसे पूछता हूँ, आप इन सबसे कितना युद्ध लड़ सकते हैं.”

उन्होंने कहा कि यूएन अधिकारियों ने इसराइली प्रशासन के साथ अब तक, प्रस्तावित सहायता योजना पर 14 बैठकें की है. यदि इसे लागू किया गया, तो मानवीय सहायता वितरण केवल ग़ाज़ा के कुछ हिस्सों में ही सम्भव होगा और इसमें सर्वाधिक निर्बल शामिल नहीं होंगे.

“यह भुखमरी को मोलभाल करने के औज़ार के रूप में इस्तेमाल करना है.”

स्थानीय स्वास्थ्य प्रशासन के अनुसार, 7 अक्टूबर 2023 को इसराइल में हमास द्वारा आतंकी हमले किए जाने के बाद ग़ाज़ा में इसराइली सैन्य कार्रवाई शुरू हुई, जिसमें अब तक 53 हज़ार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं.

WHO का कहना है कि 18 मार्च के बाद से अब तक, केवल 255 मरीज़ों को ग़ाज़ा से बाहर विशेष स्वास्थ्य देखभाल के लिए भेजने की अनुमति दी गई है, जबकि 10 हज़ार से अधिक मरीज़ों को इसकी आवश्यकता है. इनमें साढ़े चार हज़ार बच्चे भी हैं.