यूएन शान्तिरक्षा को ख़तरों के बीच, बर्लिन सम्मेलन में व्यापक समर्थन
बर्लिन में हुए एक उच्च स्तरीय मंत्रिस्तरीय शिखर सम्मेलन में, 130 से अधिक देशों और अन्तरराष्ट्रीय भागीदारों ने संयुक्त राष्ट्र के शान्तिरक्षा अभियानों के लिए समर्थन दिया है जिसके तहत इन देशों ने, सैन्य, तकनीकी और राजनैतिक प्रतिबद्धता के संकल्प भी व्यक्त किए हैं.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने इस बीच आगाह किया है कि शान्तिरक्षा अभियान बढ़ते दबावों का सामना कर रहे हैं और इन अभियानों को, स्वयं को आज के दौर के बढ़ते ख़तरों के अनुकूल ढालना होगा.
इस दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन जर्मनी किया जिसमें रक्षा और विदेश मंत्रियों सहित 1,000 से अधिक उपस्थित लोगों ने, संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की.
यह सम्मेलन 88 सैन्य और पुलिस इकाइयों, विशेष प्रशिक्षण और उभरती प्रौद्योगिकियों में निवेश की प्रतिज्ञाओं के साथ बुधवार को सम्पन्न हुआ.
यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने ज़ोर देकर कहा कि टकराव वाले क्षेत्रों में "ब्लू हैलमेट" यानि शान्तिरक्षक, जीवन और मृत्यु के बीच अन्तर की हद तक महत्वपूर्ण हो सकते हैं.
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की एक ऐसी शान्तिरक्षा की आवश्यकता पर बल दिया जो आज की वास्तविकताओं और भविष्य की चुनौतियों का मुक़ाबला करने के लिए पूर्ण रूप से शक्तिशाली हो.
जर्मनी इस समय दक्षिण सूडान, लेबनान, और पश्चिमी सहारा में शान्तिरक्षा अभियानों में, शान्तिरक्षकों के ज़रिए योगदान कर रहा है.
जर्मनी ने इस सम्मेलन में, 8 करोड़ 20 लाख योरो की धन सहायता के साथ ही, प्रशिक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा समाधानों और ड्रोन प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी प्रतिबद्धताएँ व्यक्त कीं.
जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने कहा कि उनका देश, यूएन शान्तिरक्षा अभियानों का एक प्रबल और टिकाऊ समर्थक बना हुआ है.
व्यापक और विविध प्रतिबद्धताएँ
कुल चौहत्तर सदस्य देशों ने विशिष्ट संकल्प व्यक्त किये, जिनमें वर्दीधारी कर्मचारियों से लेकर प्रशिक्षण और रणनैतिक समर्थन शामिल हैं.
यूएन महासचिव ने सम्मेलन समाप्त होने के बाद एक प्रैस वार्ता में वैश्विक टकरावों और शान्तिरक्षकों के लिए ख़तरों में वृद्धि का ज़िक्र करते हुए स्वीकार किया कि शान्तिरक्षकों को, लगातार जटिल होते और ख़तरनाक माहौल में अपना काम करना पड़ता है.
उन्होंने प्रैस वार्ता को, जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान्न वादेफ़ुल और रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस के साथ संयुक्त रूप से सम्बोधित करते हुए कहा, “इन अभियानों को रास्ता दिखाने वाले शासनादेशों के बारे में हमें कुछ कठिन सवाल पूछने होंगे, और नतीजों व समाधनों को किस तरह दिखना चाहिए.”
उन्होंने कहा, “हर एक सन्दर्भ भिन्न होता है, और मिशनों को स्वयं को उनके अनुरूप ढालना होगा.”
यूएन प्रमुख ने शान्तिरक्षा अभियानों के लिए धन की कमी के मद्देनज़र, सदस्य देशों से निरन्तर वित्तीय सहायता की आवश्यकता पर बल दिया.
“यह बहुत अनिवार्य है कि सदस्य देश अपने वित्तीय योगदान का सम्मान करें और अपनी देनदारियाँ समय पर अदा करें.”
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब संयुक्त राष्ट्र में भी व्यापक सुधार की पेशकश की जा रही है, जिसमें सहनशीलता और किफ़ायत को बढ़ाने के उद्देश्य से, शान्तिरक्षा अभियानों की समीक्षा किया जाना भी शामिल है.
यह मंत्री स्तरीय शिखर सम्मेलन, संयुक्त राष्ट्र की 80वीं वर्षगांठ के साथ मेल खाता है और शान्तिरक्षा पर 2015 के न्यूयॉर्क शिखर सम्मेलन के एक दशक का प्रतीक है.
इस समय 119 देशों के 61 हज़ार से अधिक वर्दीधारी शान्तिरक्षक, 11 मिशनों में तैनात हैं, जिन्हें 7 हज़ार से अधिक नागरिक कर्मियों की भी मदद मिलती है.