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ग़ाज़ा में '21वीं सदी का ज़ुल्म रोकना होगा', टॉम फ़्लैचर की सुरक्षा परिषद से गुहार

ग़ाज़ा में मानवीय सहायता सामग्री के प्रवेश पर इसराइली पाबन्दी के कारण, वहाँ भोजन सामग्री की उपलब्धता का भीषण संकट उत्पन्न हो गया है.
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ग़ाज़ा में मानवीय सहायता सामग्री के प्रवेश पर इसराइली पाबन्दी के कारण, वहाँ भोजन सामग्री की उपलब्धता का भीषण संकट उत्पन्न हो गया है.

ग़ाज़ा में '21वीं सदी का ज़ुल्म रोकना होगा', टॉम फ़्लैचर की सुरक्षा परिषद से गुहार

शान्ति और सुरक्षा

सुरक्षा परिषद की मंगलवार को एक अहम बैठक में ग़ाज़ा पट्टी में भयावह हालात पर चर्चा हुई है, जहाँ मानवतावादी संगठनों ने फ़लस्तीनी आबादी के लिए अकाल के गम्भीर जोखिम के प्रति चेतावनी जारी की है. इसराइली सैन्य हमलों के बीच वहाँ सहायता आपूर्ति के प्रवेश पर पिछले 70 दिनों से इसराइली पाबन्दी जारी है. आपात राहत मामलों के लिए यूएन प्रमुख टॉम फ़्लैचर ने प्रतिनिधियों से आग्रह किया है कि जनसंहार को टालने और अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के प्रति सम्मान के लिए निर्णायक क़दम उठाए जाने होंगे.

आपात राहत समन्वयक टॉम फ़्लैचर ने मंगलवार को अपने सम्बोधन की शुरुआत में, सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों से पूछा कि 21वीं सदी में, ग़ाज़ा में जिस तरह की क्रूरताओं को अंजाम दिया जा रहा है, उन्हें देखते हुए भावी पीढ़ियों को क्या बताया जाएगा कि हमने इसे रोकने के लिए क्या क़दम उठाए.

पिछले 10 सप्ताह से अधिक समय से, ग़ाज़ा में भोजन, दवा, जल, टैंट समेत अन्य सहायता सामग्री ने प्रवेश नहीं किया है. लाखों फ़लस्तीनी लोग फिर से जबरन विस्थापन का शिकार हुए हैं और उनके रहने के लिए जगह सिकुड़ती जा रही है.

ग़ाज़ा की पूरी आबादी, क़रीब 21 लाख लोग, अकाल के जोखिम का सामना कर रही है. भीषण बमबारी के बाद जिन अस्पतालों में स्वास्थ्य देखभाल सेवाएँ प्रदान की जा रही हैं, उन पर भारी दबाव है.

“आज भी, ख़ान युनिस में योरोपीय ग़ाज़ा अस्पताल पर फिर से बमबारी हुई, और आम नागरिकों के हताहत होने की ख़बर है.”

“मैं ग़ाज़ा की बची-खुची मेडिकल व्यवस्था का दौरा करने के बाद आपको बता सकता हूँ कि इस स्तर पर मौतों की एक आवाज़, एक गंध है, जो आपका पीछा नहीं छोड़ती है.” 

अवर महासचिव फ़्लैचर ने हमास से सभी बन्धकों को रिहा किए जाने और आम नागरिकों को जोखिम से बचाने की मांग की है.

अमानवीय परिस्थितियाँ

ग़ाज़ा में मानवीय सहायता सामग्री की आपूर्ति पर इसराइल ने पिछले कई हफ़्तों से पूरी तरह पाबन्दी थोपी हुई है, जिससे स्थानीय आबादी के लिए खाद्य सामग्री की क़िल्लत होती जा रही है और भुखमरी का ख़तरा बढ़ रहा है.

आपात राहत मामलों के प्रमुख ने क्षोभ जताया कि इसराइल द्वारा जानबूझकर, बेशर्मी के साथ ग़ाज़ा और पश्चिमी तट में आम नागरिकों पर अमानवीय परिस्थितियाँ थोपी जा रही हैं.

उन्होंने कहा कि इसराइल ने वहाँ राहत वितरण के लिए जो नई योजना पेश की है, वो मौजूदा हालात का कोई जवाब नहीं है.

टॉम फ़्लैचर ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ और साझेदार संगठन, ग़ाज़ा में मानवता, निष्पक्षता, स्वतंत्रता और तटस्थता के सिद्धान्तों के अनुरूप जल्द से जल्द मानवीय सहायता प्रयासों के लिए पूरी तरह से तैयार हैं.

“उनके पास एक योजना है और उन्होंने दर्शाया है कि वे आवश्यकताओं को पूरा कर सकते हैं. हज़ारों ट्रक हाल ही में हुए युद्धविराम के दौरान आम नागरिकों तक पहुँचे हैं.”

“हम लाखों जीवितों को बचा सकते हैं. हमारे पास यह सुनिश्चित करने के लिए ठोस व्यवस्था है कि मानवीय सहायता आम नागरिकों तक पहुँचे, हमास तक नहीं.”

खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के न्यूयॉर्क कार्यालय की निदेशक एंजेलिका जैकोम.
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खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के न्यूयॉर्क कार्यालय की निदेशक एंजेलिका जैकोम.

खाद्य प्रणाली हुई ध्वस्त

खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के न्यूयॉर्क कार्यालय की निदेशक एंजेलिका जैकोम ने बताया कि ग़ाज़ा में हालात बेहद कठिन हैं और लाखों लोग खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं.

“अकाल का जोखिम आसन्न है.” उन्होंने सोमवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए बताया कि यहाँ की पूरी आबादी गम्भीर खाद्य असुरक्षा की चपेट में है.

निदेशक जैकोम के अनुसार, हर पाँच में से एक व्यक्ति, पाँचवे चरण की खाद्य असुरक्षा से जूझ रहा है, जोकि एक विनाशकारी स्थिति है. कुछ ही हफ़्तों के भीतर, गुज़र-बसर के लिए आवश्यक सामान के ख़त्म हो जाने की आशंका है.

यूएन एजेंसी की वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यदि मानवीय सहायता और बाज़ारों के लिए सामान की आपूर्ति पर रोक बरक़रार रहती है, तो बदतरीन हालात पनपेंगे और लोगों के पास भोजन, जल, दवा और बुनियादी सेवाएँ उपलब्ध नहीं होंगी.

उन्होंने ध्यान दिलाया कि ग़ाज़ा में एक समय खाद्य उत्पादन प्रणाली, विविधतापूर्ण व अपने आप में पर्याप्त थी, लेकिन यह अब पूरी तरह से ढह चुकी है.

कुपोषण मामलों में उछाल

FAO अधिकारी के अनुसार, बच्चे और महिलाएँ इस संकट से अछूते नहीं हैं. 7 अक्टूबर 2023 से पहले, ग़ाज़ा में कुपोषण की दर की तुलना योरोपीय देशों से की जा सकती थी, जिसकी एक वजह किफ़ायती, स्थानीय स्तर पर उगाई गई खाद्य वस्तुएँ थी.

मगर, अब परिस्थितियाँ बदल चुकी हैं. मई 2025 से अप्रैल 2026 के दौरान, पाँच साल से कम आयु के क़रीब 71 प्रतिशत बच्चे, कुपोषण का शिकार हो सकते हैं, जिनमें से 14 हज़ार गम्भीर मामले हो सकते हैं.

वहीं, 17 हज़ार गर्भवती व स्तनपान करा रही महिलाओं के लिए कुपोषण के उपचार की आवश्यकता होगी.

उन्होंने कहा कि ग़ाज़ा में कृषि-खाद्य व्यवस्था तबाह हो चुकी है, 75 प्रतिशत खेती योग्य भूमि क्षतिग्रस्त या बर्बाद हो चुकी है और सभी मवेशी मारे जा चुके हैं. खाद्य क़ीमतों में उछाल आया है और गेहूँ का आटा, फ़रवरी महीने की तुलना में अब तीन हज़ार प्रतिशत अधिक क़ीमत पर बिक रहा है.

निदेशक जैकोम ने कहा कि ग़ाज़ा में आम लोग न केवल भोजन के अभाव का सामना कर रहे हैं, बल्कि वे स्वास्थ्य, आजीविका, सामाजिक ताने-बाने को तहस-नहस होते देख रहे हैं, जिससे पूरे समुदाय हताश हैं.