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अमेरिका से गै़र-नागरिकों के निर्वासन से उठीं गम्भीर मानवाधिकार चिन्ताएँ

एक किशोर अमेरिका से निर्वासित किए जाने के बाद अपने परिवार से दोबारा मिलते हुए.
© UNICEF/Rodrigo Mussapp
एक किशोर अमेरिका से निर्वासित किए जाने के बाद अपने परिवार से दोबारा मिलते हुए.

अमेरिका से गै़र-नागरिकों के निर्वासन से उठीं गम्भीर मानवाधिकार चिन्ताएँ

मानवाधिकार

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने हाल ही में अमेरिका द्वारा बड़ी संख्या में गै़र-नागरिकों को निर्वासित किए जाने, विशेषकर उन्हें उनके मूल देशों से इतर देशों में भेजे जाने पर गहरी चिन्ता व्यक्त है.

यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय - OHCHR को जानकारी मिली है कि वेनेज़्वेला के 100 से अधिक नागरिकों को अल सल्वाडोर की एक कुख्यात जेल में हिरासत में रखा गया है.

OHCHR के अनुसार, आधिकारिक आँकड़े बताते हैं कि 20 जनवरी से 29 अप्रैल के बीच, एक लाख 42 हज़ार लोगों को जबरन , अमेरिका से बाहर भेजा गया है.

हिरासत में कठोर बर्ताव

वेनेज़्वेला के क़रीब 245 नागरिकों और अल सल्वाडोर के लगभग 30 नागरिकों को अल सल्वाडोर भेजे जाने के बाद उनके ठिकाने और हालात के बारे में कोई जानकारी नहीं है.

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इनमें से अनेक लोगों को अमेरिका के विदेशी शत्रु अधिनियम (Alien Enemies Act) के तहत निर्वासित किया गया है. उन पर आपराधिक गिरोहों से जुड़े होने का आरोप है. 

ख़बरों के अनुसार, इन्हें अल सल्वाडोर के आतंकवाद निरोधक केन्द्र (Centre for Terrorism Confinement, CECOT), की अधिकतम-सुरक्षा वाली जेल में रखा गया है.

इस जेल में बन्दियों के साथ बेहद कठोर व्यवहार किया जाता है. उन्हें क़ानूनी सहायता, परिवार या बाहरी दुनिया से किसी भी तरह के सम्पर्क का अधिकार नहीं दिया जाता.

गम्भीर मानवाधिकार चिन्ताएँ

OHCHR को परिवारजन और वकीलों से ऐसी जानकारी मिली है कि वेनेज़ुएला के 100 से अधिक नागरिकों को CECOT जेल में रखा गया है.

ख़बरों के अनुसार, अमेरिका सरकार ने, इनमें से अनेक लोगों को, किसी तीसरे देश में हिरासत में रखने के इरादे की पूर्व सूचना नहीं दी.

इसके अलावा, अनेक लोगों को क़ानूनी सहायता का अधिकार नहीं मिला और वे अपने निर्वासन से पहले यह चुनौती भी नहीं दे सके कि उन्हें हटाया जाना क़ानूनी तौर पर सही है या नहीं.

मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने कहा, “यह स्थिति उन कई मौलिक अधिकारों को लेकर गम्भीर चिन्ता उत्पन्न करती है, जो अमेरिकी और अन्तरराष्ट्रीय क़ानून दोनों के तहत मौलिक रूप से प्राप्त हैं.”

इनमें उचित क़ानूनी प्रक्रिया, मनमानी हिरासत से सुरक्षा, क़ानून के समक्ष समानता, और किसी तीसरे देश में यातना या जीवन को बदल देने वाले नुक़सान की सम्भावना से सुरक्षा हासिल होने जैसे अधिकार शामिल हैं.

असहाय महसूस करते परिवार

अमेरिका और अल सल्वाडोर की सरकारों ने अब तक हिरासत में लिए गए लोगों की कोई आधिकारिक सूची प्रकाशित नहीं की है, और अल सल्वाडोर में उनकी क़ानूनी स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है.

कई परिवार के लोगों ने, OHCHR से बातचीत में गहरी पीड़ा और चिन्ता जताई कि उन्हें यह तक नहीं मालूम कि उनके प्रियजन कहाँ और किन परिस्थितियों में हिरासत में हैं. 

कुछ परिवारों को केवल तब मालूम हुआ जब उन्होंने अपने परिजन को CECOT जेल में या वहाँ ले जाए जाते हुए, सोशल मीडिया पर वीडियो में पहचान लिया.

मानवाधिकार उच्चायुक्त  वोल्टकर टर्क ने कहा, “जिन परिवारों से हमने बात की, उन्होंने जो कुछ हुआ उसमें ख़ुद को पूरी तरह असहाय महसूस किया है. 

"उनके लिए यह अत्यन्त पीड़ादायक है कि उनके अपनों को बिना किसी अदालती निर्णय के हिंसक अपराधी या आतंकवादी के रूप में पहचान करके हिरासत में लिया गया.”

उन्होंने यह भी कहा, “जिन तरीक़ों से कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया और निर्वासित किया गया, और प्रवासियों के ख़िलाफ़ जिस अपमानजनक भाषा का प्रयोग हुआ, वह भी बेहद चिन्ताजनक है. इसमें बेड़ियों का इस्तेमाल भी शामिल है.”

मानवाधिकार उच्चायुक्त ने इस परिस्थिति में अमेरिका की न्यायपालिका, क़ानूनी समुदाय और सिविल सोसायटी की भूमिका की सराहना की, जो मानवाधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने में जुटे हैं.

उन्होंने कहा, “मैंने अमेरिकी सरकार से आग्रह किया है कि वह उचित प्रक्रिया के पालन को सुनिश्चित करे, अपनी अदालतों के निर्णयों को तुरन्त और पूरी तरह लागू करे, बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा करे, और किसी भी व्यक्ति को, ऐसे देश में नहीं भेजे जहाँ उसे यातना या भरपाई नहीं हो सकने वाले अन्य तरह के नुक़सान का वास्तविक ख़तरा हो.”