म्याँमार: भूकम्प की तबाही के बाद संकट गहराया, बच्चे मानसिक पीड़ा में
म्याँँमार में, 28 मार्च को आए विनाशकारी भूकम्प में लगभग 3 हज़ार 800 लोगों के मारे जाने का अनुमान है, छह सप्ताह बीत जाने के बाद भी म्याँमार की स्थिति बेहद गम्भीर बनी हुई है, जहाँ पूरी आबादी अब भी सदमे में और बेहद असुरक्षित महसूस कर रही है.
पाँच साल की ख़िन यदानर ने इस त्रासदी में अपनी माँ को खो दिया, यदानर ने UNICEF से कहा, "मुझे भूकम्प से नफ़रत है. भूकम्प ने मेरी माँ और मेरी मौसी को छीन लिया."
म्याँमार में, भूकम्प से पहले ही क़रीब 65 लाख बच्चों को मानवीय मदद की ज़रूरत थी. इस आपदा ने साल 2021 के सैन्य तख़्तापलट और गृहयुद्ध से उपजी, पहले से जारी मुश्किलों को और बढ़ा दिया है.
अब मॉनसून आने से बाढ़ और भूस्खलन का ख़तरा भी मंडरा रहा है.
दाइयों की अहम भूमिका
मैंडाले की मिडवाइफ़ यू यू ने UNFPA से कहा, “भूकम्प के बाद स्वास्थ्य सेवाएँ चरमरा गईं, जिससे "ख़ासतौर पर गर्भवती महिलाएँ बुरी तरह प्रभावित हुईं."
अराजकता के बीच दाइयाँ बेहद अहम किरदार निभा रही हैं. उन्होंने मुश्किल हालात के बावजूद लोगों को उम्मीद और जीवनरक्षक सहायता मुहैया कराई है.
UNFPA ने महिलाओं और लड़कियों को ज़रूरी स्वास्थ्य सेवाएँ जारी रखने के लिए, सचल क्लीनिक खोले हैं.
गहरा सदमा
भूकम्प की तबाही ने बच्चों पर मानसिक और भावनात्मक असर डाला है. कई इलाक़ों में माता-पिता बच्चों को अचानक चिन्ता, चुप्पी और नींद नहीं आने जैसी समस्याओं से घिरा पा रहे हैं.
UNICEF और साझीदारों ने इस मानसिक स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए, बच्चों के लिए मनो-सामाजिक सहायता शुरू की है.
UNICEF बच्चों के लिए सुरक्षित जगहें बनाकर, उन्हें कलाकृतियों जैसी गतिविधियों के ज़रिए, पीड़ा से उबरने में मदद कर रहा है.
अपनी माँ को भूकम्प में खो देने वाली ख़िन का कहना है, "मैंने अपनी माँ की तस्वीर बनाई…ऐसा करने से मुझे अच्छा लगता है."
भले ही घर और ढाँचे फिर से बनाने में वर्षों लगें, लेकिन बच्चों की मानसिक पीड़ा को नज़रअन्दाज़ नहीं किया जा सकता.
भूकम्प से बचाव
भूकम्प प्रकृति की सबसे विनाशकारी आपदाओं में से एक हैं, लेकिन सबसे ज़्यादा नुक़सान इमारतों के गिरने से होता है. इसलिए इमारतों को भूकम्प-रोधी बनाना और आपदा जोखिम कम करना ज़रूरी है.
यूएन हैबिटाट और UNDRR, म्याँमार में ऐसे शहरी विकास पर काम कर रहे हैं, जो जोखिम को ध्यान में रखे और भविष्य के भूकम्पों से नुक़सान को कम कर सके.
भले ही भूकम्प को रोका नहीं जा सकता, लेकिन इसके प्रभाव को कम करना सम्भव है.
यूएन हैबिटैट की कार्यकारी निदेशक अनाक्लाउडिया रॉसबाख़ ने कहा, “हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि पुनर्निर्माण का हर क़दम प्रभावित क्षेत्रों को पहले से अधिक मज़बूत और टिकाऊ बनाए.”