ग़ाज़ा: अस्थाई आश्रय स्थल बने स्कूल पर इसराइली हमले में 30 लोगों की मौत
ग़ाज़ा पट्टी में संयुक्त राष्ट्र द्वारा संचालित एक स्कूल पर इसराइली हवाई हमले में कम से कम 30 फ़लस्तीनियों के मारे जाने की ख़बर है. बताया गया है कि इस स्कूल में क़रीब दो हज़ार विस्थापितों ने शरण ली हुई थी.
फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए यूएन एजेंसी (UNRWA) ने यूएन न्यूज़ को बताया है कि मध्य ग़ाज़ा के अल बुरेजी में इसराइली सेना ने दो बार निशाना बनाया गया.
“स्कूल को गम्भीर क्षति पहुँची और शरण स्थल में आग लग गई, जिससे हताहतों को वहाँ से निकाल पाना कठिन हो गया. वहाँ के निवासियों ने दीवार में एक छेद करके, मृतकों और घायलों को वहाँ से बाहर निकाला है.”
यूएन ने सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से बताया है कि 7 अक्टूबर 2023 को इसराइल पर हमास के हमलों के बाद शुरू हुए इस युद्ध में अब तक 400 स्कूलों को सीधे तौर पर निशाना बनाया जा चुका है.
घटनास्थल से मिली फ़ुटेज दर्शाती है कि स्कूल की मुख्य इमारत की दीवारें और फ़र्श ध्वस्त हो चुके हैं. बाहर अहाते में सैकड़ों लोग हमले के बाद, मलबे के बीच खड़े हैं.
UNRWA ने कहा कि हताहतों में महिलाएँ व बच्चे भी हैं, जबकि तलाश एवं बचाव टीमें अब भी लापता लोगों को ढूंढने में जुटी हैं.
संयुक्त राष्ट्र की सैटेलाइट सेवा (UNOSAT) के अनुसार, ग़ाज़ा में 95 फ़ीसदी से अधिक स्कूलों को युद्ध शुरू होने के बाद से क्षति पहुँची है.
ग़ाज़ा में 564 स्कूलों में से 501 को या तो पूरी तरह से पुनर्निर्माण या फिर पुनर्वास की आवश्यकता है.
विफल रणनीति, कारगर नहीं
इस बीच, यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने इसराइल की उस कथित योजना की निन्दा की है, जिसमें ग़ाज़ा की आबादी को दक्षिणी हिस्से के एक छोटे से इलाक़े में जबरन हस्तांतरित किए जाने की बात कही गई है.
उन्होंने बुधवार को जारी अपने एक वक्तव्य में कहा कि यह चिन्ताजनक है कि इसराइल की मंशा, आम फ़लस्तीनियों के लिए ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न करने की है, जिससे उनकी ग़ाज़ा में मौजूदगी बेहद मुश्किल साबित हो जाए.
मानवाधिकार कार्यालय प्रमुख ने कहा कि यह मानने का कोई आधार नहीं है कि जिन सैन्य रणनीतियों से पिछले एक वर्ष और आठ महीनों में कोई स्थाई समाधान नहीं निकल पाया है, उन्हें और मज़बूती से अपनाकर अब सफलता हासिल कर ली जाएगी.
वोल्कर टर्क ने सचेत किया कि ग़ाज़ा में सैन्य कार्रवाई का दायरा बढ़ाने से और सामूहिक विस्थापन होगा, और संख्या में मौतें होंगी और निर्दोष लोगों की जान जाएगी. साथ ही, ग़ाज़ा में बचा-खुचा बुनियादी ढाँचा भी ध्वस्त हो सकता है.
क़ाबिज़ पश्चिमी तट में हालात
उधर, क़ाबिज़ पश्चिमी तट में संयुक्त राष्ट्र मानवीय सहायता टीमों ने आगाह किया है कि फ़लस्तीनी समुदायों के लिए हालात बद से बदतर हो रहे हैं, जबकि इसराइली सैन्य बलों और बस्तियों के बाशिन्दों द्वारा हिंसा को अंजाम दिया जा रहा है.
सोमवार को इसराइली सैन्य बलों द्वारा हेब्रान गवर्नरेट में कम से कम 30 ढाँचों को ध्वस्त किए जाने की ख़बर है, जिससे एक दर्जन परिवार विस्थापित हुए हैं.
मानवीय सहायता मामलों में समन्वय के लिए यूएन कार्यालय ने बताया कि फ़रवरी महीने के बाद से अब तक, ध्वस्तीकरण की यह तीसरी घटना है जोकि सबसे बड़े पैमाने पर हुई है. इस इलाक़े को इसराइल ने सैन्य प्रशिक्षण ज़ोन के रूप में चिन्हित किया है.
इसराइली बलों ने तुल्कर्म में सोमवार को एक शरणार्थी शिविर में छह घर ढहाए हैं, जिससे 17 परिवार प्रभावित हुए हैं.
OCHA ने ध्यान दिलाया कि क़ाबिज़ शक्ति के तौर पर यह इसराइल का दायित्व है कि पश्चिमी तट में फ़लस्तीनियों की रक्षा की जाए और उनकी सुरक्षा व गरिमा का ख़याल रखा जाएग.
मगर, इन शिविरों में रह रहे परिवारों को उनके घर ध्वस्त करने से पहले अपना सामान समेटने के लिए बहुत कम समय दिया गया था. यूएन कार्यालय के अनुसार, जिस तरह से इस इलाक़े में फ़लस्तीनियों को बेदख़ल किया जा रहा है, उससे स्थानीय आबादी के जबरन हस्तांतरण के प्रति चिन्ता उपजती है.