सहायता राशि में कटौती से मिडवाइफ़ सेवाएँ प्रभावित: गर्भवती महिलाओं और शिशुओं को जोखिम
सहायक नर्स मिडवाइफ़ या दाइयाँ, अग्रिम पंक्ति की वो महत्वपर्ण कार्यकर्ता हैं, जो यौन, प्रजनन, मातृ और नवजात स्वास्थ्य जैसी आवश्यक सेवाओं का 90 प्रतिशत तक मुहैया कराती हैं. इसमें सुरक्षित प्रसव करवाने से लेकर, यौन हिंसा के पीड़ितों की देखभाल करने जैसी सेवाएँ शामिल हैं.
जीवनरक्षक कार्रवाई में मिडवाइफ़ या दाइयों की भूमिका बेहद अहम होती है.
लेकिन सहायता राशि में गम्भीर कटौती के कारण, दाइयों की महत्वपूर्ण सेवाओं को दिया जा रहा संयुक्त राष्ट्र का समर्थन गम्भीर ख़तरे में पड़ गया है.
संयुक्त राष्ट्र की प्रजनन स्वास्थ्य एजेंसी, यूएनएफ़पीए के अनुसार, हर साल, मातृ मृत्यु के कुल मामलों में से तीन-चौथाई मामले केवल 25 देशों में होते हैं, जिनमें से अधिकाँश उप-सहारा अफ़्रीका और दक्षिण एशिया में स्थित हैं.
जिन संकटग्रस्त क्षेत्रों में गर्भावस्था या प्रसव के दौरान मौत होने का ख़तरा दोगुना होता है, वहाँ अक्सर मिडवाइफ़ दाइयाँ ही गर्भवती महिलाओं व उनके नवजात शिशुओं को जीवनरक्षक देखभाल मुहैया कराने वाली पहली या फिर एकमात्र साधन होती हैं.
वित्तीय कटौती के कारण अब यूएनएफ़पीए को दाइयों के लिए अपना समर्थन कम करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.
यह एजेंसी 2025 में, प्रभावित आठ देशों में मौजूद 3 हज़ार 521 दाइयों के समर्थन के लिए तैयार थी, लेकिन अब उनमें से में से 47 प्रतिशत को ही वित्तीय सहायता प्रदान करना सम्भव होगा.
अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ता
महिलाएँ, अक्सर संकट के समय में, महत्वपूर्ण प्रसव सेवाओं तक पहुँच खो देती हैं.
इन बदतर परिस्थितियों में गर्भवती महिलाओं के बचाव के लिए आगे आने और उनके लिए जीवन रेखा के रूप में कार्य करने वाली दाइयों की अहम भूमिका पर यूएनएफ़पीए की कार्यकारी निदेशक नतालिया कानेम ने कहा, "दाइयाँ जान बचाती हैं."
संयुक्त राष्ट्र, मानवीय संकट के दौरान दाइयों को प्रशिक्षण, आपूर्ति और उपकरण प्रदान करता है, जिनमें कभी-कभी सचल स्वास्थ्य क्लीनिक के लिए परिवहन भी शामिल होता है. वित्तीय सहायता कटौती के बीच इन सभी सेवाओं में कमी करनी पड़ रही है.
यूएनएफ़पीए ने अन्तरराष्ट्रीय दाई (Midwife) दिवस पर कहा, "जब संकट आता है और प्रणालियाँ ध्वस्त हो जाती है. ऐसे में दाइयाँ आगे आकर काम सम्भालती हैं."
वित्तीय कटौती
वैश्विक स्तर पर लगभग 10 लाख दाइयों की कमी के बीच, बजट में कटौती के कारण अशान्त व संवेदनशील क्षेत्रों में महिलाओं और नवजात शिशुओं के बीच मृत्यु दर में वृद्धि हो रही है.
संवेदनशील संघर्ष प्रभावित इलाक़ों में प्रसव के दौरान होने वाली मौतें, वैश्विक स्तर पर होने वाली कुल मातृ मृत्यु संख्या का 60 प्रतिशत हिस्सा हैं.
सहायता राशि में भारी वित्तीय कटौती से, दुनिया भर में, यह प्रवृत्ति और बढ़ जाती है. उदाहरण के लिए, आशंका है कि यमन में बच्चे पैदा करने की उम्र की 5 लाख 90 हज़ार से अधिक महिलाएँ दाइयों तक पहुँच से वंचित हो सकती हैं.
नई पहल
यूएनएफ़पीए और साझीदारों ने वर्तमान वित्तीय संकट के मद्देनज़र, हाल ही में वैश्विक मिडवाइफ़री एक्सेलेरेटर शुरू किया है. इस समन्वित पहल का उद्देश्य, उच्चतम मातृ मृत्यु दर वाले देशों में दाई-नेतृत्व वाली देखभाल को बढ़ाना है.
यह पहल, सबसे संवेदनशील परिस्थितियों में ज़िन्दगियाँ बचाने और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों को मज़बूत करने पर केन्द्रित एक लागत-प्रभावी रोडमैप प्रस्तुत करती है.
यूएनएफ़पीए ने मिडवाइफ़ या दाइयों के कामकाज के लिए अधिक धनराशि, प्रशिक्षण और समर्थन जुटाने का आहवान किया.
एजेंसी ने इस बात पर बल दिया कि दाई-नेतृत्व वाली सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज से, दो-तिहाई मातृ एवं नवजात मृत्यु की रोकथाम सम्भव है. इससे, स्वास्थ्य सेवा की लागत घट सकती है और कार्यबल की उत्पादक क्षमता बढ़ सकती है.