दक्षिण सूडान में स्वास्थ्य सेवाओं पर हमले, लोगों की ज़िन्दगी पर गहराया संकट
दक्षिण सूडान में राहत कार्य करने वाली टीमों ने चेतावनी दी कि स्वास्थ्य सुविधाओं पर लगातार हो रहे हमले, आम लोगों के सामने मौजूद "कई तरह की मुश्किलों" के ताज़ा उदाहरण हैं. बीते सप्ताहान्त के दौरान ही जोंगलेई में एक अस्पताल पर बम हमला किया गया.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दक्षिण सूडान प्रतिनिधि डॉक्टर हमफ़्री करामागी ने कहा, “हर बार जब ऐसा होता है, तो लोग स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित हो जाते हैं और कभी-कभी अपनी उम्मीद भी खो बैठते हैं. स्वास्थ्य अन्तिम सुरक्षा कवच है. अगर यह टूट गया तो बाक़ी सब कुछ भी ढह जाएगा.”
संयुक्त राष्ट्र की मानवीय सहायता एजेंसी (OCHA) के अनुसार, पूर्वी जोंगलेई प्रान्त के ओल्ड फंगक में MSF (Médecins Sans Frontières) द्वारा संचालित अस्पताल पर हुए हवाई हमले में, सात लोगों की मौत हो गई और 20 अन्य घायल हो गए.
स्वास्थ्य सेवा पर हमले बन्द हो
WHO के अधिकारी डॉक्टर हमफ़्री करामागी ने जिनीवा में पत्रकारों को बताया कि जनवरी से अब तक यह आठवाँ मौक़ा है जब स्वास्थ्य सेवाओं को निशाना बनाया गया है, जिसमें स्वास्थ्यकर्मियों की हत्या, सुविधाओं और ज़रूरी दवाओं की लूटपाट व तबाही शामिल हैं.
उन्होंने आगाह करते हुए कहा, “अगर ऐसे हमले जारी रहे, तो नाइल नदी के पास की आधी स्वास्थ्य सुविधाओं को बन्द करना पड़ सकता है.”
डॉक्टर हमफ़्री करामागी ने बताया कि मानवीय राहत सामग्री पहुँचाने वाले क़ाफ़िले और कोल्ड चेन जैसी आवश्यक सुविधाएँ भी हिंसा की चपेट में आ रही हैं.
ग़ौरतलब है कि दक्षिण सूडान को साल 2011 में आज़ादी मिली थी, लेकिन, देश उसके तुरन्त बाद देश गृहयुद्ध में फँस गया.
कोल्ड चेन का मतलब है ऐसी एक श्रृंखला या प्रणाली, जिसमें दवाओं, टीकों, रक्त, या अन्य तापमान-संवेदनशील वस्तुओं को एक निश्चित ठंडे तापमान पर संग्रहित, पहुँचाया और वितरित किया जाता है.
बीमारियों का तेज़ी से फै़लाव
दक्षिण सूडान में हालात और बिगड़ते जा रहे हैं. हैज़ा, मलेरिया, ख़सरा और मंकीपॉक्स जैसी बीमारियों के प्रकोप तेज़ी से फैल रहे हैं. WHO ने, बढ़ती हिंसा और सहायता तक पहुँच की सीमाओं के बीच, त्वरित प्रतिक्रिया दल तैनात किए हैं और यथा सम्भव, वहाँ स्थानीय भागीदारों के साथ समन्वय किया जा रहा है.
WHO अधिकारी ने चेतावनी दी है कि, “अगर हम कुछ नहीं करते, तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है.”
उन्होंने कहा कि आने वाले छह सप्ताहों में हैज़ा के मामलों की सँख्या दोगुनी हो सकती है और ख़सरे से होने वाली मौतें 40 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं.
केवल हैज़ा की ही बात करें तो सितम्बर से अब तक यह बीमारी 55 हज़ार से ज़्यादा लोगों को संक्रमित कर चुकी है, जिनमें से 1 हज़ार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है.
'युद्ध अपराध’ की निन्दा
इस हमले को लेकर दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (OHCHR) ने बमबारी को सम्भावित युद्ध अपराध क़रार देते हुए इसकी कड़ी निन्दा की है.
आयोग की अध्यक्ष यासमीन सूका ने कहा, “यह कोई दुखद दुर्घटना नहीं थी, बल्कि एक सोची-समझी, गै़रकानूनी कार्रवाई थी, जो एक संरक्षित चिकित्सा सुविधा पर हमला था.”
MSF ने पुष्टि की है कि अस्पताल पूरी तरह तबाह हो गया है, जिसमें फ़ार्मेसी और आपातकालीन चिकित्सा इकाइयाँ भी शामिल थीं.
कार्रवाई की अपील
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग ने अस्पताल पर बमबारी की तत्काल जाँच की माँग की है और आगाह किया है कि ऐसे लगातार उल्लंघनों से दक्षिण सूडान की नाज़ुक शान्ति प्रक्रिया पूरी तरह पटरी से उतर सकती है.
इस बीच, जब अफ़्रीकी संघ और पूर्वी अफ़्रीकी अन्तरसरकारी संगठन (IGAD) के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल, राजधानी जूबा पहुँचे हैं, तो शान्ति वार्ता को फिर से शुरू करने की माँग तेज़ हो गई है.
यासमीन सूका ने कहा, “दक्षिण सूडान जिस रास्ते पर चल रहा है, वह बेहद ख़तरनाक है. अगर इस तरह के हमले बेख़ौफ़ जारी रहे, तो शान्ति समझौता केवल एक काग़ज़ी दस्तावेज़ बनकर रह जाएगा.”
डॉक्टर करामागी ने भी अपनी अपील में कहा, “हमें मदद कीजिए ताकि यह क्षण, वो पल नहीं बन जाए जब स्वास्थ्य के साथ-साथ उम्मीद भी टूट जाए.”