ग़ाज़ा में सहायता प्रवेश पर इसराइली पाबन्दी से, मानवीय त्रासदी बढ़ने की चेतावनी
संयुक्त राष्ट्र और उसके सहयोगी संगठनों ने, ग़ाज़ा में मानवीय संकट गहराने के बारे में कड़ी चेतावनी जारी की है, क्योंकि इसराइल ने, ग़ाज़ा में मानवीय सहायता सामग्री के प्रवेश के लिए तमाम सीमा चौकियों को पिछले दो महीने से भी अधिक समय से बन्द कर रखा है. ये प्रतिबन्ध ग़ाज़ा में किसी भी तरह की सहायता सामग्री नहीं पहुँचने दे रहा है.
फ़लस्तीनी क्षेत्र में, संयुक्त राष्ट्र की मानवीय टीम ने रविवार को एक वक्तव्य जारी किया है जिसमें, मौजूदा सहायता प्रणाली को ख़त्म करने के इसराइली प्रयासों की निन्दा की गई है.
फ़लस्तीनी क्षेत्र में संयुक्त राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करने वाले शीर्ष सहायता अधिकारी के नेतृत्व वाली टीम और ग़ैर सरकारी संगठनों (NGO) ने कहा कि इसराइल की योजनाएँ "मौलिक मानवीय सिद्धान्तों का उल्लंघन" करेंगी; और पहले से ही भोजन, पानी और चिकित्सा देखभाल की गम्भीर कमी से जूझ रहे लोगों की पीड़ा को और बढ़ा देंगी.
फ़लस्तीनी क्षेत्र में यूएन आपदा राहत समन्वय एजेंसी (OCHA-OPT) के वक्तव्य में कहा गया, "तमाम बेकरी बन्द हो गई हैं. सामुदायिक रसोई बन्द हो गई हैं. गोदाम ख़ाली पड़े हैं. बच्चे भूखे पेट सोने को मजबूर हैं."
संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि इसराइली अधिकारी एक नई सहायता वितरण प्रणाली लागू करने का प्रयास कर रहे हैं, जो संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों और ग़ैर सरकारी संगठनों को स्वतंत्र रूप से काम करने की अनुमति देने के बजाय, सैन्य-नियंत्रित केन्द्रों के माध्यम से मानवीय सहायता सामग्री की आपूर्ति करेगी.
इसराइली प्रस्ताव 'ख़तरनाक'
संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि इसराइली प्रस्ताव "ग़ाज़ा के बड़े हिस्से और चलने-फिरने में कठिनाइयों का सामना करने वाले व शारीरिक रूप से कमज़ोर लोगों को, सहायता सामग्री की उपलब्धता के अभाव में छोड़ देगा. और आम लोगों को बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सामान हासिल करने के वास्ते, सैन्यीकृत क्षेत्रों में प्रवेश करने के लिए मजबूर करेगा.
संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी भरे शब्दों में कहा, "यह ख़तरनाक है, यह आम लोगों को खाद्य सामग्री इकट्ठी करने के लिए सैन्यीकृत क्षेत्रों में जाने के लिए मजबूर करेगा, मानवीय कार्यकर्ताओं सहित जीवन को ख़तरे में डालेगा," जिससे ग़ाज़ा पट्टी में जबरन विस्थापन भी बढ़ेगा.
ख़बरों के अनुसार, इसराइल सरकार ने इस नीति की एक सुरक्षा उपाय के रूप में हिमायत की है. साथ ही, इसराइली सेना ग़ाज़ा के मध्य और दक्षिणी इलाक़ों में अपने अभियान बढ़ाने की योजना बना रही है.
शनिवार को, कथित तौर पर हज़ारों इसराइली सैन्यआरक्षितों को ड्यूटी के लिए तैयार रहने के नोटिस जारी किए गए थे, जो ग़ाज़ा पट्टी के अन्दर हमलों में वृद्धि का संकेत देते हैं.
मार्गदर्शक सिद्धान्त
संयुक्त राष्ट्र के वक्तव्य में यह पुष्टि की गई कि सहायता अभियान “मानवता, निष्पक्षता, स्वतंत्रता और तटस्थता” के सिद्धान्तों से निर्देशित रहने चाहिए और यह भी कहा गया है कि ग़ाज़ा में काम कर रहे संयुक्त राष्ट्र के सभी 16 निकायों और प्रमुख मानवीय साझेदारों ने, इस एकीकृत स्थिति का समर्थन किया है.
यूएन टीम ने कहा है, “मानवीय कार्रवाई लोगों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए की जाती है, चाहे वे कहीं भी हों.”
संयुक्त राष्ट्र की टीमें ज़मीन पर मुस्तैद हैं, जो नाकाबन्दी हटने के बाद “ज़रूरी सामान और सेवाओं की अहम आपूर्ति को फिर से बढ़ाने के लिए तैयार हैं.”
उन्होंने वैश्विक नेताओं से हस्तक्षेप करने और इसराइल पर, सीमा चौकियाँ तुरन्त खोलने के लिए दबाव डालने का आग्रह किया है.
संयुक्त राष्ट्र ने कहा, “समय बिल्कुल यही है.”
फ़लस्तीन शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र सहायता एजेंसी - UNRWA ने रविवार को एक सोशल मीडिया सन्देश में बताया कि ग़ाज़ा पट्टी में आम लोगों के लिए जीवन रक्षक खाद्य सामग्री का लगभग एक तिहाई भंडार ख़त्म हो चुका है, जबकि दीगर एक तिहाई भंडार के, अगले दो महीने से कम समय में ख़त्म हो जाने का अनुमान है.