अन्तरराष्ट्रीय सहायता धनराशि जल्द मिलने के बहुत कम आसार, टॉम फ़्लैचर
संयुक्त राष्ट्र के आपात सहायता समन्वयक टॉम फ़्लैचर ने आगाह करते हुए कहा है कि वैश्विक सहायता व्यवस्था का अब एक "मानवीय पुनर्गठन" किए जाने की ज़रूरत है, जिसके तहत, इसे कहीं अधिक प्रभावी बनाना होगा. और साथ ही, धन जुटाने के नए स्रोत तलाश करने होंगे, क्योंकि संयुक्त राज्य अमेरिका सहित कई बड़े दाता देश, आर्थिक सहायता राशि में भारी कटौती कर रहे हैं.
यूएन मानवीय सहायता समन्वय एजेंसी - OCHA के मुखिया टॉम फ़्लैचर इन दिनों अफ़ग़ानिस्तान की यात्रा पर हैं और उन्होंने गुरूवार को वहीं से बात करते हुए कहा कि वह धन की कमी का, आम लोगों पर पड़ने वाले गम्भीर प्रभाव को देख पा रहे हैं.
उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान से ही यूएन न्यूज़ के साथ बात करते हुए बताया कि उन्होंने तालेबान अधिकारियों के साथ, मानवीय सहायता प्रयासों में महिलाओं की भागेदारी और उनके शिक्षा - अधिकार की अहमियत पर बात की. उन्होंने उम्मीद जताई कि ये बातचीत सकारात्मक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ेगी.
इस इंटरव्यू को संक्षिप्तता और सटीकता की ख़ातिर सम्पादित किया गया है:
यूएन न्यूज़: आपने कहा था कि जिन नीति-निर्माताओं ने मदद में कटौती को मंज़ूरी दी है, उन्हें अफ़ग़ानिस्तान आकर इसके असर ख़ुद देखने चाहिए. क्या आप निजी बातचीत में उनके साथ साफ़ और तीखी भाषा का इस्तेमाल करते हैं?
टॉम फ़्लैचर: हाँ, असली असर दिखने में थोड़ा समय लगता है, लेकिन यहाँ पहले ही 400 क्लीनिक बन्द हो चुके हैं. एनजीओ अपने आधे स्टाफ़ को निकाल रहे हैं, और स्थानीय एनजीओ पर सबसे ज़्यादा असर पड़ा है. इन धन कटौतियों की वजह से लोगों की जान जाएगी. यही सबसे बड़ी त्रासदी है.
यूएन न्यूज़: नेताओं की प्रतिक्रिया कैसी होती है?
टॉम फ़्लैचर: दो प्रकार के नेता होते हैं: एक वो, जो आर्थिक संकट और करदाताओं के दबाव के कारण, मजबूरी में कठिन फैसले लेते हैं, वे मानवीय प्रयासों के महत्व को भली-भाँति समझते हैं. और दूसरे वो नेता, जो दुर्भाग्यवश, सहायता में कटौती को लेकर गर्व महसूस करते हैं. मैं चाहता हूँ कि इस दूसरी श्रेणी के लोगों को उस माँ से मिलवाऊँ, जिसने अपना बच्चा इसलिए खो दिया क्योंकि उसे अपनी गर्भावस्था में ही अस्पताल पहुँचने के लिए साइकिल चलाकर तीन घंटा लम्बा और मुश्किल सफ़र तय करना पड़ा.
एक अच्छा नेतृत्व वही होता है जो समस्याओं की जड़ तक पहुँचकर उनका समाधान खोजे. हमें अपने तरीक़ों को अलग-अलग समूहों तक पहुँचने के लिए ढालना होगा और अपने कार्यों के बचाव में मज़बूती से खड़ा रहना होगा. मानवीय समुदाय ने करोड़ों लोगों को ग़रीबी से बाहर निकाला है और अनगिनत जानें बचाई हैं, हमें इस पर गर्व है.
यूएन न्यूज़: आप एक कठिन समय में यूएन के आपातकालीन राहत प्रमुख बने हैं. फ़रवरी में आपने अपने विभाग के बजट में 20% कटौती की घोषणा की थी. आप इससे कैसे निपटेंगे?
टॉम फ़्लैचर: यह वाक़ई मुश्किल है. यह पूरा क्षेत्र लगभग एक-तिहाई तक सिमट सकता है, और आगे दीगर कटौतियाँ होने की भी आशंका है. हम नए साझीदारों की तलाश करेंगे और निजी क्षेत्र को भी जोड़ने की कोशिश करेंगे, ताकि "एकजुटता" को लेकर चर्चा का स्वरूप बदला जा सके. हमें इस नई स्थिति के साथ काम करना होगा जो हमारे पास है, ना कि जो हम चाहते हैं.
मैं सीनेटर मार्को रूबियो के साथ उन चर्चाओं को लेकर आशावादी हूँ, जो जीवन रक्षक सहायता की रक्षा पर केन्द्रित हैं, और मैं यह समझना चाहता हूँ कि दुनिया भर में लोगों का जीवन बचाने में अमेरिका की क्या भूमिका हो सकती है, इस पर उनका क्या दृष्टिकोण है.
यूएन न्यूज़: मौजूदा हालात को देखते हुए, क्या हमें यह दोबारा सोचने की ज़रूरत है कि ‘मदद’ का असल मतलब क्या है और इसके लिए धन की ज़रूरत को पूरा कैसे किया जाना चाहिए?
टॉम फ़्लैचर: बिल्कुल. हम एक "मानवीय पुनर्गठन" के दौर से गुज़र रहे हैं. हम आकार में छोटे हो रहे हैं, लेकिन कोशिश है कि जीवन रक्षक काम पर इसका असर कम से कम पड़े. साथ ही, हम अधिक दक्षता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. मैंने पहले ही दिन से पूरे सैक्टर में दक्षता अभियान शुरू किया. अन्तर-एजेंसी स्थाई समिति (IASC) ने इसका समर्थन करते हुए नौकरशाही कम की है, विभागीय टकराव ख़त्म किए हैं, और ज़मीनी, स्थानीय स्तर के असर पर ध्यान दिया है.
यूएन न्यूज़: क्या आज भी कई सदस्य देश अन्तरराष्ट्रीय सहायता के महत्व में विश्वास रखते हैं?
टॉम फ़्लैचर: हाँ, आर्थिक दबावों के बावजूद अनेक दाता देश अब भी प्रतिबद्ध हैं, और हम कुछ नए देशों को भी उभरते देख रहे हैं, ख़ासकर खाड़ी देशों और चीन में, जहाँ सहयोग बढ़ रहा है. हम अब केवल सरकारों पर निर्भर नहीं रहना चाहते, इसलिए निजी क्षेत्र और आम नागरिकों को भी इस सहयोग में शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं.
यूएन न्यूज़: अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान ने महिलाओं की शिक्षा और रोज़गार परक अवसरों पर गम्भीर प्रतिबन्ध लगाए हैं. क्या तालेबान के साथ बातचीत सम्भव है?
टॉम फ़्लैचर: हाँ. इन बातचीतों में दो मुख्य बातें हैं. पहली बात, हम महिलाओं की मदद के बिना, मानवीय सहायता उपलब्ध नहीं करा सकते, वे हमारे काम की रीढ़ हैं. दूसरी बात, महिलाओं के अधिकारों का व्यापक मुद्दा, विशेष रूप से शिक्षा, बेहद अहम है. पिछले तीन वर्षों में लाखों लड़कियों से यह अधिकार छीन लिया गया है. ये बातचीत कठिन होती हैं, लेकिन बतौर पूर्व राजनयिक, मेरा मानना है कि सम्मानजनक संवाद, सुनने की इच्छा, और सांस्कृतिक व वैचारिक मतभेदों के बावजूद बातचीत ज़रूरी है.
यूएन न्यूज़: इस पद को संभालने से पहले, क्या आपके मन में अपने कार्यकाल के लिए कोई स्पष्ट लक्ष्य था?
टॉम फ़्लैचर: हाँ. सबसे पहले तो यह कि मैं इस पद पर इतना समय तक बना रहूँ कि वास्तव में कोई असर डाल सकूँ, क्योंकि इतने चुनौतीपूर्ण काम में निरन्तरता बहुत मायने रखती है.
दूसरी बात, मैंने मानवीय सहायता व्यवस्था में सुधार लाने का स्पष्ट लक्ष्य लेकर काम शुरू किया, उसे ज़्यादा प्रभावी बनाना और उन लोगों के और क़रीब पहुँचाना, जिनकी हम सेवा करते हैं. और सबसे महत्वपूर्ण बात है कि मेरा पूरा ध्यान लोगों की ज़िन्दगियाँ बचाने पर है, हमें अपने हर काम को इसी मानक से आँकना चाहिए.