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'सहायता धन में कटौती से होगी लाखों लोगों की मौत', टॉम फ़्लैचर

अफगानिस्तान के बघलान में बाढ़ के बाद अफगान महिलाएं और बच्चे खाद्य सहायता के थैलों के साथ बैठे हैं।
© WFP/Rana Deraz अफ़ग़ानिस्तान में लगातार अस्थिरता के कारण, बड़ी आबादी को निर्धनता का सामना करना पड़ रहा है.

'सहायता धन में कटौती से होगी लाखों लोगों की मौत', टॉम फ़्लैचर

मानवीय सहायता

संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष सहायता अधिकारी टॉम फ़्लैचर ने कहा है कि सहायता कार्यों के लिए उपलब्ध धन में व्यापक कटौती के कारण, हर जगह जीवन रक्षक अभियान बन्द हो रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप लाखों लोगों की मौत होगी.

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संयुक्त राष्ट्र के आपातकालीन राहत समन्वयक टॉम फ़्लैचर ने आगाह किया है कि "सबसे अधिक ज़रूरतमन्द लोगों के लिए, सहायता धन में कटौती किया जाना, कोई ऐसी बात नहीं है जिस पर गर्व महसूस किया जाए... सहायता में कटौती का असर यह होता है कि लाखों लोगों की मौत हो जाती है."

टॉम फ़्लैचर ने यह चेतावनी, बुधवार को अफ़ग़ानिस्तान के एक दक्षिणी शहर कन्दाहार में एक भीड़भाड़ वाले अस्पताल से बात करते हुए दी है.

इस अस्पताल में इतनी विकट स्थिति है कि वहाँ तीन या चार मरीज़ों को एक बिस्तर साझा करना पड़ता है.

टॉम फ़्लैचर यह चेतावनी भी दी है कि वित्तीय संकट ने पहले ही, संयुक्त राष्ट्र सहायता टीमों को देश भर में 400 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों को बन्द करने के लिए मजबूर कर दिया है.

उनकी चेतावनी, पुरानी और अब गम्भीर रूप धारण कर चुकी धन कटौती के हालात में, कठोर उपाय अपनाए जाने की भयानक घोषणाओं को प्रतिध्वनित करती है. 

इसमें संयुक्त राष्ट्र की अनेक राहत एजेंसियों द्वारा चयनित सहायता कार्यक्रमों को समाप्त करना शामिल है.

इनमें विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP), विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF), संयुक्त राष्ट्र सहायता समन्वय कार्यालय (OCHA), संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) और यूएनएड्स (UNAIDS) शामिल हैं.

जीवन-या-मृत्यु के बीच का धागा

टॉम फ़्लैचर मीरवाइस क्षेत्रीय अस्पताल से कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में, सहायता धन में कटौती की वास्तविकता इसके अस्पतालों में नज़र आ रही है, "जहाँ आप डॉक्टरों को इस बारे में सबसे भयावह निर्णय लेते हुए देख सकते हैं कि किसकी जान बचानी है और किसकी नहीं.".

उन्होंने कहा कि सहायता राहत में धन व संसाधन निवेश की कमी ने, महिला अफ़ग़ान स्वास्थ्य कर्मियों को भी प्रभावित किया है जिनके वेतन में दो-तिहाई तक की कटौती की जा रही है.

देश में महिलाओं की दुर्दशा अच्छी तरह से जगज़ाहिर है और अन्तरराष्ट्रीय समुदाय ने इस स्थिति की निन्दा भी की है.

वर्ष 2021 में देश की सत्ता पर क़ब्ज़ा करने वाले अधिकारियों (तालेबान) द्वारा जारी किए गए अनेक निषेधात्मक आदेशों के बाद, महिलाओं की स्थिति और भी बदतर हो गई है.

टॉम फ़्लैचर ने, अफ़ग़ानिस्तान की अपनी आधिकारिक यात्रा के हिस्से के रूप में देश के मानवीय संकट को दूर करने की आवश्यकता पर चर्चा करने के लिए, प्रान्तीय गवर्नर मुल्लाह शिरीन अखुंद से भी मुलाक़ात की.

ग़ौरतलब है कि अफ़ग़ानिस्तान, चार से भी अधिक दशकों से युद्ध व अस्थिरता से जूझता रहा है जिसमे लगभग आधी आबादी यानि, लगभग 2.29 करोड़ लोगों को, जीवित रहने के लिए मानवीय सहायता की आवश्यकता है.

महिलाओं की अहम भूमिका

टॉम फ़्लैचर ने, अपनी आधिकारिक यात्रा के दौरान इससे पहले हुई बातचीत में ज़ोर देकर कहा कि लड़कियों की शिक्षा और देश की अर्थव्यवस्था में उनकी पूर्ण भागेदारी के बिना, देश का विकास सम्भव नहीं है.

अफ़ग़ानिस्तान में बढ़ते कुपोषण, बुनियादी सेवाओं की कमी और भयानक आर्थिक पूर्वानुमानों के बीच, देश के पास, पाकिस्तान और ईरान सहित पड़ोसी देशों से वापस भेजे गए अफ़ग़ान शरणार्थियों की बढ़ती संख्या से निपटने के लिए बहुत कम संसाधन उपलब्ध हैं.

इस तरह वापिस लौट रहे लोगों की संख्या बहुत बड़ी है. केवल अप्रैल (2025) में ही ढाई लाख से अधिक अफ़ग़ान लोग स्वदेश वापिस लौटे हैं, जिनमें से 96 हज़ार लोगों को जबरन निर्वासित किया गया.

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी – UNHCR ने मंगलवार को, महिलाओं और लड़कियों के भविष्य पर विशेष रूप से चिन्ता व्यक्त की, जो तालेबान शासन के तहत बढ़ते दमन का सामना कर रही हैं.

टॉम फ़्लैचर ने, कन्दाहार में ही एक सुविधा केन्द्र का भी दौरा किया, जहाँ संयुक्त राष्ट्र और मानवीय साझीदार एजेंसियाँ, स्वास्थ्य जाँच और नक़दी सहित सहायता प्रदान करते हैं.

उन्होंने कहा कि क्षेत्र में सैकड़ों स्वास्थ्य सुविधाओं के बन्द होने से, तीस लाख से ज़्यादा लोगों को प्राथमिक देखभाल तक पहुँच से वंचित होना पड़ा है.