4 ट्रिलियन डॉलर की कमी से वैश्विक विकास लक्ष्य ख़तरे में
संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष अधिकारियों ने, विकास के लिए हर साल 4 ट्रिलियन डॉलर की भारी वित्तीय कमी और बढ़ते व्यापार युद्धों के बीच, सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति के प्रयासों को जारी रखने और अन्तरराष्ट्रीय सहयोग को पुनर्जीवित करने के लिए त्वरित कार्रवाई की पुकार लगाई है.
न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में महासचिव एंतोनियो गुटेरेश, महासभा अध्यक्ष फ़िलेमॉन यैंग और आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (ECOSOC) के अध्यक्ष बॉब रे ने सोमवार को, अधिक संसाधनों और वैश्विक वित्तीय ढाँचे में बड़े बदलाव की आवश्यकता पर ज़ोर दिया.
उन्होंने आगाह किया कि यदि प्रभावी जवाबी कार्रवाई नहीं की गई, तो दुनिया ग़रीबी समाप्त करने, जलवायु परिवर्तन से लड़ने और नए सतत अर्थव्यवस्थाओं के निर्माण जैसे लक्ष्यों की प्राप्ति में और भी पीछे छूट सकती है.
सभी अधिकारी ECOSOC के वार्षिक "विकास के लिए वित्तपोषण" मंच को संबोधित कर रहे थे, जो पिछले सप्ताह विश्व बैंक और अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की बैठकों के बाद आयोजित हुई.
यह चर्चा वैश्विक विकास, व्यापार तनाव और विकासशील देशों में बढ़ते क़र्ज़ बोझ पर केन्द्रित रही.
व्यापार युद्ध में सभी को नुक़सान
महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा, "इस वर्ष का ECOSOC मंच एक बेहद महत्वपूर्ण समय पर आ रहा है," जब वैश्विक सहयोग ख़तरे में है.
उन्होंने बढ़ते व्यापार तनावों को एक बड़ा ख़तरा बताया और कहा कि जहाँ निष्पक्ष व्यापार अन्तरराष्ट्रीय सहयोग के लाभों का स्पष्ट उदाहरण है, वहीं व्यापार बाधाओं में वृद्धि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक "स्पष्ट और तात्कालिक ख़तरा" बन गई है.
ऐसा IMF, विश्व व्यापार संगठन (WTO) और संयुक्त राष्ट्र के अर्थशास्त्रियों द्वारा हाल ही में वैश्विक विकास अनुमानों में की गई वित्त कटौतियों में स्पष्ट दिखाई दिया.
उन्होंने कहा, "व्यापार युद्ध में सभी हारते हैं, ख़ासकर सबसे कमज़ोर देश और लोग, जो सबसे अधिक प्रभावित होते हैं."
हमें तेज़ गति से आगे बढ़ना होगा
महासचिव ने बताया कि किस तरह अनेक दाता देश सहायता प्रतिबद्धताओं से पीछे हट रहे हैं, जबकि क़र्ज़ लेने की बढ़ती लागत , सार्वजनिक निवेश को ख़त्म कर रही है, जिससे सतत विकास लक्ष्य (SDGs) "गम्भीर रूप से पटरी से उतरते जा रहे हैं."
उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "SDGs को हासिल करने के लिए हमारे पास केवल पाँच साल बचे हैं, इसलिए हमें तेज़ गति से आगे बढ़ना होगा."
साथ ही, उन्होंने देशों से आग्रह किया कि वे सेविले में होने वाले 'चौथे अन्तरराष्ट्रीय विकास वित्तपोषण सम्मेलन' में साहसिक और ठोस परिणाम सुनिश्चित करें.
उन्होंने चेतावनी दी कि "इस अस्थिर पृष्ठभूमि में हम विकास वित्तपोषण के अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को अनदेखा नहीं कर सकते."
क़र्ज़ के भारी बोझ
ECOSOC के अध्यक्ष बॉब रे ने कहा कि तीन अरब से अधिक लोग ऐसे देशों में रहते हैं, जहाँ सरकारें स्वास्थ्य और शिक्षा पर धन ख़र्च करने से ज़्यादा धन ब्याज भुगतान पर ख़र्च कर रही हैं.
उन्होंने कहा कि "हमें सख्त ज़रूरत है कि एक अधिक किफ़ायती ऋण व्यवस्था तैयार की जाए…"
साथ ही उन्होंने ऐसे तत्काल सुधारों की मांग की, जो देशों को अपना क़र्ज़ चुकाने के साथ-साथ अपने भविष्य में निवेश करने का उचित अवसर दें.
उन्होंने प्रमुख संयुक्त राज्य अमेरिका जैसी अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों द्वारा नए शुल्क लगाए जाने के हालिया क़दमों का हवाला देते हुए, बढ़ती व्यापार बाधाओं को लेकर भी चिन्ता जताई.
उन्होंने कहा, "व्यापार कोई ग़लत चीज़ नहीं है…यह देशों के लिए वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान करने और ग़रीबी से बाहर निकलने का एक सकारात्मक माध्यम है."
उन्होंने देशों से आग्रह किया कि वे व्यापार को 'जीत-हार' के खेल के रूप में न देखें, बल्कि निष्पक्ष और खुली व्यापार प्रणालियों को साझा समृद्धि के रास्ते के रूप में अपनाएँ.
सुधारों का आह्वान
महासभा के अध्यक्ष फ़िलेमॉन यैंग ने बढ़ते क़र्ज़ और घटती वित्तीय क्षमता के परिणामों को रेखांकित किया.
संयुक्त राष्ट्र के अर्थशास्त्रियों के अनुसार, 50 से अधिक विकासशील देशों में अब सरकारें अपने राजस्व का 10 प्रतिशत से अधिक केवल ऋण चुकाने में ख़र्च कर रही हैं और 17 देशों में यह आँकड़ा 20 प्रतिशत से भी अधिक है जो क़र्ज़ नहीं चुका पाने की स्थिति का स्पष्ट संकेत है.
अध्यक्ष यैंग ने चेतावनी दी कि "हमारी अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय ढाँचे में सुधार करने में विफलता, पूंजी तक पहुँच को गम्भीर रूप से बाधित कर रही है."
इस वित्तीय अन्तर को पाटना SDGs को हासिल करने के लिए बेहद ज़रूरी है, जो अब हर साल 4 ट्रिलियन डॉलर से अधिक आँका जा रहा है.