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हर चार में से एक महिला जननांग विकृति को स्वास्थ्यकर्मी दे रहे हैं अंजाम

इथियोपिया के सिदामा क्षेत्र की पांच युवतियां फ़िरोज़ी रंग की दीवार वाले एक कमरे में प्रशिक्षण सत्र में भाग ले रही हैं।
© UNICEF/Mulugeta Ayene इथियोपिया के सिदामा क्षेत्र की लड़कियांँ महिला जननांग विकृति सहित हानिकारक प्रथाओं पर एक सत्र में भाग लेते हुए.

हर चार में से एक महिला जननांग विकृति को स्वास्थ्यकर्मी दे रहे हैं अंजाम

महिलाएँ

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आगाह किया है कि वैसे तो दुनियाभर में महिला जननांग विकृति (FGM) के मामले घट रहे हैं, मगर अब इसे पेशेवर स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा किए जाने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है.

वैश्विक स्तर पर FGM जैसी अमानवीय प्रथा को रोकने और पीड़ितों के साथ सहयोग करने में, स्वास्थ्य क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन कई क्षेत्रों में इसके विपरीत साक्ष्य सामने आए हैं.

साल 2020 तक के अनुमान के अनुसार, लगभग 5 करोड़ 20 लाख लड़कियों और महिलाओं के साथ इस प्रथा को, स्वास्थ्यकर्मियों ने अंजाम दिया, यानि FGM के हर चार में से एक मामला.

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WHO में यौन और प्रजनन स्वास्थ्य अनुसन्धान विभाग की निदेशक डॉक्टर पास्केल एलोटे ने कहा, "स्वास्थ्यकर्मियों को इस हानिकारक प्रथा के अपराधी नहीं, बल्कि बदलाव के वाहक बनना चाहिए."

उन्होंने ज़ोर दिया कि यह स्थिति "लड़कियों के अधिकारों का गम्भीर उल्लंघन" है, जो उनके स्वास्थ्य के लिए गम्भीर ख़तरा पैदा करती है.

साक्ष्य बताते हैं कि FGM को चाहे कोई भी अंजाम दे, इससे शरीर को नुक़सान पहुँचता है, लेकिन जब इसे स्वास्थ्यकर्मी "चिकित्सकीय तरीक़े" से करते हैं, तो WHO ने चेतावनी दी कि इससे ज़ख्म और भी गम्भीर हो सकते हैं.

संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी ने इस अमानवीय प्रथा को पूरी तरह समाप्त करने के जारी प्रयासों के तहत, नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनमें डॉक्टरों, सरकारों और स्थानीय समुदायों से इस मुद्दे पर सख़्त कार्रवाई की अपील की गई है.

FGM में गिरावट

WHO का कहना है कि काटने (Cutting) की लड़कियों व महिलाओं के जननांगों को काटने की प्रक्रिया की शिकार पीड़ितों को उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सकीय देखभाल की ज़रूरत होती है. इसमें गै़र-चिकित्सकीय कारणों से महिला जननांग के किसी हिस्से को हटाना या क्षति पहुँचाना शामिल है.

साल 1990 के बाद से किसी लड़की के जननांग विकृति का शिकार होने की सम्भावना तीन गुना घट गई है, मगर अब भी 30 देशों में यह प्रथा जारी है, जो हर साल लगभग 40 लाख लड़कियाँ को जोखिम में डालती है.

FGM से मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से लेकर प्रसव सम्बन्धी जटिलताओं तक कई तरह की अल्पकालिक और दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं, और कई बार सर्जिकल उपचार की भी आवश्यकता पड़ती है.

WHO द्वारा हाल ही में जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों में यह भी सुझाव दिया गया है कि विभिन्न जीवन चरणों में FGM से पीड़ितों की देखभाल किस तरह बेहतर की जा सकती है.

इस कुप्रथा को समाप्त करना सम्भव

WHO ने कहा है कि महिला जननांग विकृति (FGM) को समाप्त करना सम्भव है और कुछ देश इस दिशा में बेहतर भी रहे हैं.

FGM को रोकने के लिए लगातार किए गए प्रयासों की बदौलत बुर्कीना फ़ासो जैसे देशों ने पिछले तीन दशकों में 15 से 19 वर्ष की उम्र की लड़कियों में, इसके मामलों में 50 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की है.

इसी तरह, FGM के मामलों में सिएरा लियोन में 35 प्रतिशत और इथियोपिया में 30 प्रतिशत की गिरावट आई है. यह सफलता, प्रतिबन्धों को लागू करने और रोकथाम के प्रयासों में राजनैतिक इच्छाशक्ति दिखाने के कारण सम्भव हुई है.

WHO ने साल 2022 में प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों के लिए एक रोकथाम प्रशिक्षण पैकेज प्रकाशित किया था, ताकि FGM से जुड़े जोखिमों को उजागर किया जा सके. 

साथ ही स्वास्थ्यकर्मियों को स्थानीय संस्कृति और दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए समुदायों से संवेदनशील तरीके से संवाद करने के लिए प्रशिक्षित किया जा सके.

इस अवसर पर एक स्वास्थ्यकर्मी ने कहा, "इस प्रशिक्षण की बदौलत, अब मैं महिलाओं को FGM के बारे में जागरूक कर पाती हूँ और उन्हें इसके नुक़सान के बारे में समझाने में सक्षम हूँ."