तंग बजट के बावजूद, यूएन शान्तिरक्षा की भविष्य पर नज़र
संयुक्त राष्ट्र और जर्मनी ने, कुछ ही सप्ताह के भीतर बर्लिन में होने वाली एक महत्वपूर्ण मंत्रिस्तरीय बैठक से पहले, शान्तिरक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है. शान्तिरक्षा को वैश्विक स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण उपाय माना जाता है, मगर अब उसे स्वयं को, घटते संसाधनों के अनुकूल ढालना होगा.
संयुक्त राष्ट्र के अवर महासचिव और यूएन शान्तिरक्षा के प्रमुख जियाँ पियर लैक्रोआ ने न्यूयॉर्क में गुरूवार को एक प्रैस वारता में शान्ति अभियानों के बारे में कहा, "यह विशेष रूप से समय पर आयोजित बैठक है.”
उन्होंने कहा, "यह बैठक शान्ति स्थापना के अतिरिक्त मूल्य को रेखांकित करने और यह सुनिश्चित करने का एक अनूठा अवसर है कि हम एक शान्ति स्थापना परिवार के रूप में, किसी भी सदस्य गेश के साथ मिलकर, किसी भी नए मिशन के लिए, सहायता करने के लिए मुस्तैद रहें."
मई में जर्मनी की राजधानी बर्लिन में होने वाली संयुक्त राष्ट्र शान्ति स्थापना मंत्रिस्तरीय 2025 बैठक में, लगभग 1 हज़ार प्रतिनिधियों के शिरकत करने की सम्भावना है. इनमें दुनिया भर के विदेश और रक्षा मंत्री शामिल होंगे.
उनका लक्ष्य: एक ऐसा शान्ति स्थापना ढाँचा तैयार करना जो अधिक चुस्त, बुद्धिमान और सहनशील हो.
13 और 14 मई को होने वाली इस बैठक में, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश भी भाग लेने वाले हैं.
बढ़ती चुनौतियों का मुक़ाबला
दक्षिण सूडान से लेकर मध्य पूर्व और कश्मीर तक टकरावों के बढ़ने और भू-राजनैतिक विभाजन के कारण अन्तरराष्ट्रीय सहमति कमज़ोर होने के कारण, इस द्विवार्षिक सम्मेलन को, 2014 में पहली बार होने के बाद से, सबसे महत्वपूर्ण सम्मेलनों में से एक कहा जा रहा है.
जियाँ पियर लैक्रोआ ने, आधुनिक युद्ध की बढ़ती जटिलता की ओर इशारा करते हुए कहा, "हम द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से, किसी भी समय की तुलना में अधिक आन्तरिक और देशों के बीच टकरावों व युद्धों का सामना कर रहे हैं."
अन्तरराष्ट्रीय अपराध, ऑनलाइन दुष्प्रचार और जलवायु परिवर्तन जैसी अतिरिक्त चुनौतियाँ भी, मिशनों को प्रभावित कर रही हैं, वो भी ऐसे समय में जब शान्ति स्थापना के बजट लगातार कम होते जा रहे हैं.
'जीवन और मृत्यु के बीच का अन्तर'
यूएन शान्तिरक्षा के प्रमुख ने कहा कि इन दबावों के बावजूद, 'ब्लू हेलमेट' यानि शान्तिरक्षक, अत्यन्त कठिन परिस्थितियों में अपना काम जारी रखते हैं. "वे लाखों लोगों की रक्षा करते हैं. अक्सर, उनकी उपस्थिति, जीवन और मृत्यु के बीच का अन्तर की स्थिति होती है."
इस बैठक का मेज़बान देश – जर्मनी का, संयुक्त राष्ट्र शान्ति स्थापना में, प्रमुख योगदान है. जर्मनी के रक्षा राज्य मंत्री निल्स हिलमर का कहना है, "शान्ति स्थापना बहुपक्षवाद का व्यावहारिक रूप है. हम सदस्य देशों को भविष्य के लिए शान्ति स्थापना को मज़बूत करने के लिए एक मंच प्रदान करना चाहते हैं."
बर्लिन बैठक में होने वाले सत्रों में संकल्प कार्यक्रम, उच्च स्तरीय चर्चाएँ, प्रदर्शनियाँ और लेबनान में UNIFIL व दक्षिण सूडान में UNMISS जैसे शान्तिरक्षा मिशनों में, जर्मनी की भागेदारी पर प्रकाश डाला जाएगा.
जियाँ पियर लैक्रोआ ने कहा, "मिशन वही है. मेज़बान देशों को उनके सबसे अशान्त समय में मदद करना – तंग बजट के बावजूद.”