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कॉप30 सम्मेलन से पहले, जलवायु कार्रवाई को गति देने के लिए जुटे विश्व नेता

ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज़ इनेसियो लूला दा सिल्वा, जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर आयोजित बैठक में जुटे विश्व नेताओं को सम्बोधित कर रहे हैं.
UN Photo/Eskinder Debebe
ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज़ इनेसियो लूला दा सिल्वा, जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर आयोजित बैठक में जुटे विश्व नेताओं को सम्बोधित कर रहे हैं.

कॉप30 सम्मेलन से पहले, जलवायु कार्रवाई को गति देने के लिए जुटे विश्व नेता

जलवायु और पर्यावरण

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश और ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज़ इनेसियो लूला दा सिल्वा ने महत्वाकाँक्षी जलवायु कार्रवाई को गति देने के इरादे से बुधवार को एक वर्चुअल शिखर बैठक का आयोजन किया, जिसमें विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं और जलवायु चुनौतियाँ झेल रहे 17 देशों के नेताओं ने शिरकत की है.

संयुक्त राष्ट्र का वार्षिक जलवायु सम्मेलन (कॉप30) इस वर्ष ब्राज़ील में आयोजित होना है और इसी सिलसिले में इस बैठक को आयोजित किया गया.

यूएन जलवायु सम्मेलन से पहले पेरिस जलवायु समझौते के तहत वैश्विक कार्रवाई के लिए एक साझा लामबन्दी रणनीति तैयार की जा रही है, ताकि 2025 में ठोस, महत्वाकाँक्षी राष्ट्रीय जलवायु योजनाओं को रूप दिया जा सके.

बुधवार को बन्द दरवाज़ों के भीतर दो घंटे तक चले इस सत्र में चीन, योरोपीय संघ, अफ़्रीकी संघ, दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों के समूह (आसियान) और लघु द्वीपीय विकासशील देशों ने हिस्सा लिया.

यूएन महासचिव ने इस बैठक के बाद पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए इसे राष्ट्रीय नेताओं की सबसे विविधतापूर्ण बैठक क़रार दिया, जिसमें प्रमुखता से केवल जलवायु मुद्दे पर ही ध्यान केन्द्रित किया गया.

“जैसाकि हमने आज सुना, दुनिया आगे बढ़ रही है. पूरी गति से आगे. कोई समूह या सरकार स्वच्छ ऊर्जा क्रांति को नहीं रोक सकता है.”

नए राष्ट्रीय संकल्प

यूएन प्रमुख ने बताया कि अनेक नेताओं ने महत्वाकाँक्षी, नई जलवायु योजनाओं का संकल्प लिया है, जिन्हें औपचारिक रूप से ‘राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान’ (National Determined Contributions/NDCs) कहा जाता है, जोकि आपसी एकता का एक ठोस संदेश है.

महासचिव ने कहा कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बैठक के दौरान पुष्टि की है कि NDC योजनाओं में अर्थव्यवस्था के हर सैक्टर व ग्रीनहाउस गैस का ध्यान रखा जाएगा.

उनके अनुसार, ये संकल्प अगले दशक में एक निडर मार्ग पर आगे बढ़ने का अहम अवसर प्रदान करते हैं, और इनके ज़रिये जीवाश्म ईंधन से नवीकरणीय ऊर्जा की दिशा में तेज़ी से क़दम बढ़ाने में मदद मिलेगी.

सदी का अहम आर्थिक अवसर

यूएन प्रमुख ने नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को इस शताब्दी में आर्थिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण अवसर क़रार दिया, जोकि दुनिया को ‘जलवायु नर्क के मार्ग से बाहर’ निकाल सकता है.

“स्वच्छ ऊर्जा सैक्टर में उछाल है, रोज़गार सृजित हो रहे हैं, प्रतिस्पर्धा व प्रगति बढ़ रही है...विज्ञान हमारे साथ है और अर्थशास्त्र में बदलाव आया है.”

उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा की क़ीमतों में नाटकीय गिरावट आई है, और यह ऊर्जा सम्प्रभुता व सुरक्षा की ओर जाने वाला एक निश्चित मार्ग है, जिसके ज़रिये जीवाश्म ईंधन में उतार-चढ़ाव और महंगे आयात पर निर्भरता ख़त्म की जा सकती है.

वर्ष 2015 के पेरिस जलवायु समझौते से अब तक, वैश्विक तापमान में बढ़ोत्तरी के अनुमान में बदलाव आया है. पहले इस सदी के अन्त तक पूर्व-औद्योगिक काल की तुलना में 4°C की बढ़ोत्तरी का अनुमान था, मगर मौजूदा योजनाओं को लागू किए जाने से इस 2.6°C तक सीमित किया जा सकता है.

मगर, तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लक्ष्य से यह अब भी कम है, जिस पर पेरिस जलवायु सम्मेलन के दौरान देशों में सहमति बनी थी और जलवायु वैज्ञानिकों ने भी जिसका समर्थन किया है.

महासचिव गुटेरेश ने विश्व नेताओं से इसी लक्ष्य को हासिल करने के इरादे से, अपनी राष्ट्रीय योजनाओं को पेश करने का अनुरोध किया है, जिसमें अर्थव्यवस्था के सभी सैक्टर को शामिल किया जाए और 2050 तक नैट शून्य कार्बन उत्सर्जन का संकल्प हो.

रणनैतिक लामबन्दी

इससे पहले, संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को आयोजित की जा रही बैठक को, जलवायु परिवर्तन से मुक़ाबले के लिए एक अहम वर्ष के दौरान, एक महत्वपूर्ण क़दम बताया था, जिससे राजनैतिक गति को बनाए रखने में मदद मिलेगी.

उनके अनुसार, इस बैठक में आमंत्रित प्रतिनिधियों का समूह छोटा मगर प्रतिनिधिक है, जिनमें बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ, क्षेत्रीय ताक़तें, कॉप सम्मेलन के पूर्व मेज़बान और जलवायु परिवर्तन के नज़रिये से सम्वेदनशील राष्ट्र हैं.

यूएन के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वर्ष 2025 में पेरिस जलवायु समझौते के 10 वर्ष पूरे हो रहे हैं और नई जलवायु नीतियों को पेश करने की समयसीमा भी नज़दीक आ रही है.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि बहुपक्षवाद में भरोसा बहाल करने के लिए ठोस नतीजों को हासिल किया जाना ज़रूरी है. “हम यह साबित करना चाहते हैं कि बहुपक्षवाद केवल दस्तावेज़ों पर वार्ताओं के बारे में नहीं है, बल्कि उन्हें वास्तविकता में बदलने के लिए भी है.”

दुबई में कॉप28 जलवायु सम्मेलन के दौरान जीवाश्म ईंधन के विरोध में एक कार्यकर्ता.
© UNFCCC/Kiara Worth
दुबई में कॉप28 जलवायु सम्मेलन के दौरान जीवाश्म ईंधन के विरोध में एक कार्यकर्ता.

न्याय व वित्त पोषण की पुकार

महासचिव गुटेरेश ने ध्यान दिलाया कि उन विकासशील देशों को और अधिक समर्थन प्रदान किए जाने की आवश्यकता है, जो जलवायु परिवर्तन के गम्भीर प्रभावों का सामना कर रहे हैं, जबकि वैश्विक उत्सर्जन में उनका योगदान सबसे कम है.

“अफ़्रीका और विकासशील जगत के अन्य हिस्से, तेज़ी से तापमान वृद्धि का अनुभव कर रहे हैं, और प्रशान्त द्वीपीय [देशों] में समुद्री जलस्तर तेज़ी से बढ़ रहा है. इसी दौरान वैश्विक औसत की गति भी बढ़ रही है.”

यूएन प्रमुख ने देशों से आग्रह किया कि वर्ष 2035 तक विकासशील देशों के लिए प्रति वर्ष 1,300 अरब डॉलर जुटाने का एक विश्वसनीय रोडमैप प्रस्तुत किया जाना होगा. साथ ही, इस वर्ष जलवायु अनुकूलन वित्त पोषण को बढ़ाकर 40 अरब डॉलर किया जाना होगा और जलवायु हानि व क्षति (loss and damage) कोष में योगदान बढ़ाने होंगे.

महासचिव गुटेरेश ने इस वर्ष कॉप30 सम्मेलन से पहले, सितम्बर में एक उच्चस्तरीय यूएन कार्यक्रम की भी घोषणा की है, जिसमें जलवायु योजनाओं व वित्त पोषण के मुद्दे पर प्रगति की समीक्षा की जाएगी.