सीरिया ‘आशा और अवसर से ओतप्रोत’, लोगों को समर्थन की भी ज़रूरत
सीरिया में इस समय निवेश करने और देश में वापस लौटने वाले लोगों व उनके समुदायों का समर्थन करने का सटीक समय है. सीरिया संकट के लिए संयुक्त राष्ट्र के निवर्तमान उप क्षेत्रीय मानवीय समन्वयक डेविड कार्डन ने सोमवार को कहा, “आज, हमारे पास एक नया सीरिया है, जो आशा और अवसर से भरा हुआ है.”
डेविड कार्डन ने हालाँकि, न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में आगाह भी किया कि “सीरिया के कई हिस्सों में अलबत्ता टकराव का स्तर कम हो गया है, मगर देश में मानवीय संकट अभी ख़त्म नहीं हुआ है,” क्योंकि अब भी एक करोड़ 60 लाख लोगों को सहायता की आवश्यकता है.
सीमा पार की व्यवस्था
दिसम्बर 2024 में, पूर्व राष्ट्रपति बशर अल असद को, सत्ता से बेदख़ल किए जाने और लगभग 14 साल के गृहयुद्ध की समाप्ति के बाद, देश राजनैतिक परिवर्तन के मार्ग पर अग्रसर है. फ़रवरी 2023 में सीरिया और पड़ोसी देश तुर्कीये में भी घातक भूकम्प आए थे.
संयुक्त राष्ट्र, सहायता वितरण के लिए अधिक कुशल प्रक्रियाएँ विकसित करने, सार्वजनिक धन की कमी जैसे मुद्दों से निपटने, व प्रक्रियाओं को और अधिक सुव्यवस्थित करने के लिए, राजधानी दमिश्क में संक्रमणकालीन अधिकारियों के साथ काम कर रहा है.
डेविड कार्डेन ने सोमवार को तुर्कीये की सीमा के पार ग़ज़न्टीप से बात करते हुए, न्यूयॉर्क में पत्रकारों को सम्बोधित किया. संयुक्त राष्ट्र तंत्र ने उस स्थान पर, एक दशक से अधिक समय से, सीरिया के पश्चिमोत्तर इलाक़े और उससे आगे के इलाक़ोंमें सहायता पहुँचाई है.
डेविड कार्डेन ने घोषणा की कि मंगलवार से उनकी यह पद आधिकारिक रूप से समाप्त हो जाएगा जोकि, सीरिया में रेज़िडेंट और मानवीय समन्वयक कार्यालय के तहत, देश में समन्वित प्रतिक्रिया को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र के संक्रमण प्रयासों का हिस्सा था.
वर्तमान संरचना में सीरिया के बाहर अलग-अलग समन्वयकों से, देश में सहायता पहुँचाने के लिए समर्थन हासिल करना शामिल था. उन्होंने इस व्यवस्था को, "वैश्विक सन्दर्भ में अद्वितीय" बताया.
सहायता वितरण से कहीं आगे की बात
डेविड कार्डेन ने सीमा-पार तंत्र की उपलब्धियों के बारे में भी जानकारी मुहैया कराई, जिसे जुलाई 2014 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने, सीरिया के पश्चिमोत्तर में उन क्षेत्रों में सहायता की अनुमति देने के लिए अधिकृत किया था, जो सरकारी नियंत्रण में नहीं थे और जहाँ 40 लाख से अधिक लोग रहते हैं.
इस अभियान ने हर महीने लाखों सीरियाई लोगों तक भोजन, चिकित्सा आपूर्ति, आपातकालीन आश्रय और अन्य सहायता सामग्री से भरे 62 हज़ार से अधिक ट्रक पहुँचाने में मदद की है.
उन्होंने कहा, "संयुक्त राष्ट्र ने इस साल अब तक, इस सीमा-पार पद्धति के माध्यम से, पूरे सीरिया के लिए सहायता सामग्री से भरे, 936 ट्रक भेजे हैं, जो पिछले पूरे साल की तुलना में अधिक है."
उन्होंने कहा कि मानवीय सहायता का दायरा, केवल राहत सामग्री पहुँचाने से कहीं आगे तक फैला हुआ है.
पिछले कुछ वर्षों में, संयुक्त राष्ट्र और भागीदारों ने सीरियाई लोगों को अपनी आजीविकाओं को फिर से बनाने में मदद की है. साथ ही लगातार गोलाबारी और हवाई हमलों के माहौल में, आम लोगों की सुरक्षा की हमायत भी की है.
उन्होंने घरों, स्कूलों और अस्पतालों के पुनर्वास व महत्वपूर्ण स्वास्थ्य शिक्षा और सुरक्षा सेवाएँ प्रदान करने सहित, अन्य गतिविधियाँ भी पूरी की हैं.
इसके अतिरिक्त, ‘सीरिया सीमा-पार मानवीय कोष’ ने जीवन-रक्षक और शीघ्र पुनर्बहाली परियोजनाओं के लिए लगभग 1.1 अरब डॉलर की धनराशि आवंटित की है.
'समय बदल गया है'
डेविड कार्डेन ने कहा कि यह सफलता, दान दाताओं और अन्तरराष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से तुर्किये सरकार के निरन्तर समर्थन के माध्यम से सम्भव हुई है, जिसने सीमा-पार तंत्र का बहुत समर्थन किया है.
उन्होंने सीरिया में 1.6 करोड़ जरूरतमंद लोगों की तरफ़ इशारा करते हुए कहा, "अब समय बदल गया है." इनमें से अधिकांश महिलाएँ और बच्चे हैं, और 40 प्रतिशत से अधिक आबादी, पश्चिमोत्तर इलाक़े के शहरों इदलिब और अलेप्पो में हैं.
इसके अलावा, इस वर्ष सीरियाई लोगों की वापसी में क्रमिक वृद्धि के बावजूद, लगभग 70 लाख लोग विस्थापित हुए हैं, जिससे यह दुनिया के सबसे बड़े विस्थापन संकटों में से एक बन गया है.
विस्थापन और तबाही
उन्होंने कहा, "देश के भीतर ही विस्थापित लगभग 10 लाख लोग, दिसम्बर (2025) से, अपने स्थानों को वापिस लौट चुके हैं, लेकिन उनमें से अधिकांश लोग 2024 के अन्तिम दो महीनों में विस्थापित हुए थे."
"लगभग सवा दो लाख लोग शिविरों से निकल गए हैं, लेकिन यह संख्या अब भी पश्चिमोत्तर और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में शिविरों में रहने वाले 20 लाख लोगों का केवल एक छोटा सा अंश है."
मानवतावादियों ने, जून के अन्त तक सीरियाई लोगों का समर्थन करने के लिए, $2 अरब की रक़म की मांग की है और अब तक केवल $17.9 करोड़ राशि ही प्राप्त हुई, जोकि आवश्यक धन का नौ प्रतिशत से भी कम हिस्सा है.