अफ़्रीकी मूल के लोगों के लिए क्षतिपूर्ति वाले न्याय व एआई से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा
अफ़्रीकी मूल के लोगों पर स्थाई मंच का चौथा सत्र सोमवार को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में शुरू हुआ है जिसमें क्षतिपूर्ति और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की चुनौती पर मन्थन हो रहा है.
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) द्वारा आयोजित यह सत्र सप्ताह भर चलेगा जो “अफ़्रीका और अफ़्रीकी मूल के लोग: कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में क्षतिपूर्ति करने वाले न्याय के लिए एकजुटता” विषय पर केन्द्रित है.
यह सत्र, दासता और उपनिवेशवाद की ऐतिहासिक विरासतों के लिए मुआवज़े की वैश्विक मांगों को मंच मुहैया कराता है.
संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष फ़िलेमॉन यैंग ने सोमवार को उदघाटन भाषण में कहा,"आइए हम, नस्लवाद को हर जगह, हर रूप में समाप्त करने के लिए फिर से संकल्प लें - हर इनसान की गरिमा और समानता की रक्षा की ख़ातिर."
क्षतिपूर्ति करने वाला न्याय
अफ़्रीका और उसके प्रवासी समुदाय, सदियों से उपनिवेशवाद, दासता, रंगभेद और जनसंहार के दुष्परिणामों का सामना करते आ रहे हैं.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने अपने चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ कोर्टेने रैट्रे के माध्यम से भेजे गए सन्देश में कहा, "एक महत्वपूर्ण लक्ष्य यह है कि अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानून पर आधारित, क्षतिपूर्ति करने वाले न्याय का ढाँचा तैयार किया जाए."
चूँकि ये ऐतिहासिक अन्याय अब भी, अफ़्रीकी देशों के विकास में बाधा बन रहे हैं और अफ़्रीकी मूल के लोगों के मानवाधिकारों में रुकावट डालते हैं, इसलिए, इन परिणामों से निपटने की वैश्विक प्राथमिकता और उसकी तात्कालिकता पर ज़ोर देने वाली चर्चाएँ भी आयोजित होंगी.
महिलाओं और लड़कियों के मानवाधिकार
नस्लवाद और लिंगभेद के संयुक्त प्रभावों के कारण अफ़्रीकी मूल की महिलाओं और लड़कियों को कई प्रकार के, परस्पर जुड़े भेदभावों का सामना करना पड़ता है. इसी सत्र में अफ़्रीकी मूल की महिलाओं और लड़कियों पर परस्पर-आधारित नस्लीय राजनीतिक हिंसा के प्रभावों पर केन्द्रित चर्चा भी होगी.
संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) की कार्यकारी निदेशक नतालिया कानेम ने कहा है, "अफ़्रीकी मूल की महिलाएँ और किशोर लड़कियाँ... कहीं अधिक मातृ मृत्यु दर और किशोरावस्था में गर्भधारण के जोखिम में रहती हैं."
उन्होंने बताया कि UNFPA, प्रजनन स्वास्थ्य में असमानताओं को दूर करने के लिए क़दम उठा रही है.
नीति निर्माण और व्यवस्थागत नस्लवाद
बुधवार को आयोजित होने वाली पैनल-चर्चा में, बढ़ती असमानताओं की पृष्ठभूमि में, समानता और भेदभाव उन्मूलन को बढ़ावा देने वाले मानवाधिकार-आधारित, नीति निर्माण के तरीक़ों के क्रियान्वयन पर केन्द्रित होगी.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव की ओर से उनके प्रमुख सचिव कोर्टेने रैट्रे ने कहा, "हमें नस्लवाद के हर रूप से लगातार निपटते रहना होगा — ख़ासतौर पर तब, जब वे क़ानूनों, नीतियों और संस्थानों में निहित हो."
कृत्रिम बुद्धिमत्ता की चिन्ताजनक भूमिका
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जहाँ, आधुनिक जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को आकार दे रही है, वहीं यह नस्लीय असमानताओं को बढ़ावा देती है और अफ़्रीकी मूल के लोगों का सही प्रतिनिधित्व या प्रतिनिधित्व नहीं करने वाले आँकड़ों के माध्यम से, नस्लीय भेदभाव को और गहरा करती है, जो इसकी व्यवस्था को डेटा और जानकारी मुहैया कराते हैं.
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने उद्घाटन सत्र के दौरान दिखाए गए एक वीडियो सन्देश में, "ऐल्गोरिदम पक्षपात" की निन्दा करते हुए कहा, "हमारी सबसे बड़ी चुनौतियों का समाधान अधिक एकता और मानवाधिकारों के प्रति अधिक सम्मान करने में निहित है, कम में नहीं."
अन्य सत्रों में, एआई की दोहरी भूमिका पर बात की जाएगी, जहाँ एक ओर ये डिजिटल न्याय को बढ़ावा देने का उपकरण है, तो दूसरी ओर यह, नस्लीय असमानताओं को बनाए रखती है और यहाँ तक कि गहरी भी कर सकती है.