सूडान: अल फ़शर, विस्थापन शिविरों पर हमलों की निन्दा, जवाबदेही की मांग
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सूडान के अल फ़शर शहर, और उसके नज़दीकी इलाक़ों पर हुए हमलों की कठोर निन्दा की है, जिनमें बड़ी संख्या आम नागरिकों के मारे जाने की ख़बर है. देश के नॉर्थ दारफ़ूर प्रान्त की राजधानी अल फ़शर समेत ज़मज़म, अबू शौक और अन्य नज़दीकी इलाक़ों में भी हमले किए गए जहाँ हिंसक टकराव के कारण विस्थापित हुए लोगों ने शरण ली हुई है.
पूर्व राष्ट्रपति उमर अल-बशीर की सत्ता से बेदख़ली के बाद देश में नागरिक शासन को बहाल किए जाने पर उभरे मतभेदों के बाद, 15 अप्रैल 2023 को सूडान की सशस्त्र सेना और अर्द्धसैनिक बल (RSF) के बीच हिंसक टकराव भड़क उठा था.
भीषण लड़ाई में देश के अनेक हिस्सों में शहरों को भारी नुक़सान हुआ है और हज़ारों आम नागरिक हताहत हुए हैं. कम से कम 1.24 करोड़ लोग बेघर हो गए हैं, जिनमें 33 लाख ने अन्य देशों में शरण ली है.
समाचार माध्यमों के अनुसार, अल फ़शर पर और उसके नज़दीकी शिविरों पर किए गए हमलों के आरोप अर्द्धसैनिक बलों पर लगाए गए हैं. इन शिविरों में युद्ध के कारण विस्थापन का शिकार हुए लाखों लोगों ने शरण ली हुई है.
मृतकों में अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी संगठन, रिलीफ़ इंटरनेशनल के 9 कर्मचारी भी हैं. ये सहायताकर्मी ज़मज़म शिविर में एक स्वास्थ्य केन्द्र पर तैनात थे और ज़रूरतमन्दों को आपात स्वास्थ्य देखभाल सेवाएँ प्रदान कर रहे थे.
पिछले क़रीब दो वर्षों में 90 से अधिक मानवीय सहायताकर्मी, सूडान में हिंसक टकराव में अपनी जान गँवा चुके हैं.
यूएन प्रमुख के प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने रविवार को जारी एक वक्तव्य में कहा कि पिछले एक वर्ष से अल फ़शर की घेराबन्दी की गई है और लाखों लोग जीवनरक्षक मानवीय सहायता से कट चुके हैं.
ज़मज़म शिविर समेत विस्थापितों के लिए बनाए गए दो अन्य आश्रय स्थलों पर अकाल के हालात होने की बात कही गई है.
मानवतावादी क़ानून का उल्लंघन
यूएन महासचिव ने ज़ोर देकर कहा कि आम नागरिकों को निशाना बना कर किए गए, ताबड़तोड़ हमलों पर अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून के तहत सख़्त पाबन्दी है.
“मानवीय राहतकर्मियों और चिकित्साकर्मियों का सम्मान व संरक्षण सुनिश्चित किया जाना होगा.”
उन्होंने कहा कि इन हमलों को अंजाम देने वाले लोगों को न्याय के कटघरे में लाना होगा, और इलाक़े में सुरक्षित ढंग से निरन्तर मदद पहुँचाने की अनुमति देनी होगी. इनमें ज़मज़म शिविर भी है, जहाँ जल्द से जल्द मानवीय सहायता की आवश्यकता है.
यूएन प्रमुख ने कहा कि जो आम नागरिक ये स्थान छोड़ कर जाना चाहते हैं, उन्हें सुरक्षापूर्वक यहाँ से जाने की अनुमति दी जानी चाहिए.
उन्होंने ध्यान दिलाया कि 15 अप्रैल 2023 को इस हिंसक टकराव के दो वर्ष पूरे हो रहे हैं, और यह ज़रूरी है कि युद्धरत पक्ष लड़ाई पर तत्काल विराम लगें और एक समावेशी राजनैतिक प्रक्रिया की ओर क़दम बढ़ाएं ताकि सूडान को शान्ति व स्थिरता के मार्ग पर ले जाया जा सके.
महासचिव ने अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपनी अपील दोहराई है कि इस क्षोभजनक हिंसक टकराव का अन्त करने के लिए उन्हें अपने प्रयासों में एकजुट होना होगा.