म्याँमार भूकम्प: राहत कार्रवाई के लिए 24 करोड़ डॉलर अतिरिक्त सहायता राशि की अपील
म्याँमार में आए विनाशकारी भूकम्प के बाद, संयुक्त राष्ट्र ने देश में मानवीय सहायता कार्रवाई तेज़ कर दी है. यूएन ने, अधिक से अधिक ज़रूरतमन्दों तक सहायता पहुँचाने के लिए, वित्तीय समर्थन बढ़ाने और तत्काल युद्धविराम लागू किए जाने की अपील की है.
28 मार्च को आए, 7.7 की तीव्रता वाले भूकम्प से 3,600 से अधिक लोगों की जान गई, 4,800 से अधिक घायल हुए और 184 अब भी लापता हैं.
इस आपदा से 58 टाउनशिप के 90 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं. साथ ही, अस्पतालों व स्कूलों समेत हज़ारों इमारतें मलबे में तब्दील हो गई हैं. सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में अब भी भूकम्प पश्चात झटके जारी हैं, जिससे वर्तमान मानवीय संकट और गहरा रहा है.
संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में सहायता के लिए अतिरिक्त 24.16 करोड़ डॉलर सहायता धनराशि की मांग की है. इस बीच, म्याँमार के लिए 2025 की मानवीय आवश्यकता योजना से जारी 13.4 करोड़ डॉलर की राशि का भी राहत कार्यों के लिए उपयोग किया जा रहा है, जिसे दिसम्बर 2024 में जारी किया गया था.
संशोधित योजना में, लगभग 20 लाख ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जो इस भूकम्प के कारण, ज़रूरतमन्दों की श्रेणी में आ गए हैं और जिन्हें तत्काल सहायता की आवश्यकता है. यह संख्या उन 43 लाख लोगों के अलावा है, जो भूकम्प से पहले ही सहायता पर निर्भर थे.
फ़रवरी 2021 में सैन्य तख़्तापलट के बाद से म्याँमार की सेना और विपक्षी हथियारबन्द गुटों के बीच गृह युद्ध के कारण, देश इस आपदा से पहले ही संकट से गुज़र रहा था. यहाँ लगभग 2 करोड़ लोगों, यानि लगभग एक तिहाई आबादी को मानवीय सहायता एवं सुरक्षा की आवश्यकता थी.
‘हृदयविदारक’ हालात
संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत, जूली बिशप ने अपनी म्याँमार की यात्रा के दौरान भूकम्प से तबाह हुए समुदायों से मुलाक़ात की और अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से उन्हें तत्काल राहत एवं पुनर्निर्माण के लिए समर्थन देने का आग्रह किया.
उन्होंने सहायता अभियान व पुनर्बहाली सुनिश्चित करने के लिए, तत्काल संघर्षविराम लागू करने की आवश्यकता पर भी बल दिया.
उन्होंने कहा, "हमें हत्याओं व टकराव के सिलसिले को रोकने के लिए संघर्षविराम लागू करने के प्रयास निरन्तर जारी रखने होंगे, ताकि मानवीय कार्यकर्ता, खोज एवं बचाव दल व पुनर्निर्माण में शामिल लोग सुरक्षित रूप से काम कर सकें."
जूली बिशप ने भूकम्प से हुए विनाश को "हृदयविदारक" बताते हुए, जीवित बचे लोगों की सहनसक्षमता की सराहना की.
उन्होंने अन्तरराष्ट्रीय समर्थन की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए कहा, “मैं उन लोगों से विशेष रूप से प्रभावित हुई जो अपने घरों को खोने के बावजूद, इस मलबे, इस बर्बादी के बीच पुनर्निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं.”
उन्होंने कहा, “ज़रूरत की इस घड़ी में अन्तरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका बेहद अहम है, न केवल अतिरिक्त वित्त पोषण जुटाने के लिए, बल्कि अपने प्रभाव के ज़रिए यह सुनिश्चित करने में भी कि सभी संघर्षरत पक्ष, अपने हथियार रख दें, ताकि म्याँमार के लोगों की बिखरी ज़िन्दगियों को वापिस पटरी पर लाने के प्रयासों पर ध्यान केन्द्रित किया जा सके.”
सहायता अभियान पर दबाव
संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पहले से ही संघर्ष और अस्थिरता के कारण तनावग्रस्त म्याँमार में, ज़रूरी सार्वजनिक सेवाओं पर दवाब और बढ़ गया है. UNICEF के मुताबिक़, म्याँमार की स्वास्थ्य सुविधाएँ, चिकित्सा सामग्री की गम्भीर कमी से जूझ रही हैं.
193 से अधिक स्वास्थ्य केन्द्र और 2,311 स्कूल क्षतिग्रस्त हो गए हैं. वहीं बुनियादी ढाँचों के ढहने से खाद्य सामग्री की कमी हो गई है, जिससे क़ीमतें आसमान छू रही हैं और संक्रामक रोगों का ख़तरा बढ़ गया है. सगाइंग और मैंडाले में स्वच्छता प्रणालियों के नष्ट होने से वहाँ स्थिति अधिक गम्भीर होती जा रही है.
इसके अलावा, 44 डिग्री सेल्सियस (111°F) तापमान तक पहुँचने वाली अत्यधिक गर्मी और भारी, बेमौसम बरसात से जीवित बचे लोगों के लिए हालात बदतर हो गए हैं. इनमें से कई लोगों के पास अभी रहने की जगह तक नहीं है.
भूकम्प ने म्याँमार के कमज़ोर बुनियादी ढाँचे को लेकर चिन्ताएँ दोबारा उजागर कर दी हैं.
एशिया-प्रशान्त के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग (ESCAP) ने चेतावनी दी है कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि भावी आपदाओं से इस स्तर का विनाश न हो, सड़कों, पुलों और प्रमुख सार्वजनिक भवनों के पुनर्निर्माण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.
आयोग ने कहा, "यह कोई विकल्प नहीं है - यह एक सामाजिक और आर्थिक आवश्यकता है."