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सशस्त्र टकरावों की बढ़ती जटिलताएँ, यूएन शान्तिरक्षा अभियानों के लिए नई चुनौतियाँ

छलावरण वाली वर्दी और नीले हेलमेट पहने एक सैनिक ऊंची घास में राइफल लिए खड़ा है, पृष्ठभूमि में एक हेलीकॉप्टर दिखाई दे रहा है। यह दृश्य कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के मुतवांगा में एक शांतिरक्षा अभियान को दर्शाता है।
UN Photo/Michael Ali काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य के पूर्वी हिस्से में एक यूएन शान्तिरक्षक गश्त लगा रहा है.

सशस्त्र टकरावों की बढ़ती जटिलताएँ, यूएन शान्तिरक्षा अभियानों के लिए नई चुनौतियाँ

शान्ति और सुरक्षा

मौजूदा दौर में, सशस्त्र संघर्ष के बाद युद्धविराम अक्सर नाज़ुक हालात में लागू किए जा रहे हैं और हिंसक टकरावों का पहले से अनुमान लगा पाना कठिन साबित हो रहा है. इस पृष्ठभूमि में, संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षा को बढ़ते राजनैतिक तनावों, जानबूझकर फैलाई जाने वाली ग़लत सूचनाओं समेत अन्य चुनौतियों के बीच अपने तौर-तरीक़ों में आवश्यकता के अनुसार तेज़ी से बदलाव लाना पड़ रहा है.

संयुक्त राष्ट्र शान्ति अभियानों के प्रमुख ज्याँ पिएर लाक्रोआ ने सोमवार को सुरक्षा परिषद में सदस्य देशों के राजनयिकों को सम्बोधित करते हुए मौजूदा तौर-तरीक़ों में बदलाव लाने पर बल दिया. 

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उन्होंने कहा, "युद्धविराम की निगरानी अब केवल उपस्थिति तक सीमित नहीं हो सकती है, यह ज़मीनी हालात को तेज़ी से समझने और उसके अनुरूप क़दम उठाने के बारे में है." 

यूएन अवर महासचिव ने बताया कि टैक्नॉलॉजी में प्रगति से, शान्तिरक्षकों को वास्तविक समय (real time) में जटिल परिस्थितियों में निगरानी रखने में मदद मिल रही है, जिसकी वजह से उनकी उन स्थानों पर शारीरिक मौजूदगी ज़रूरी नहीं है.

इसके समानान्तर, सदस्य देशों, विशेष रूप से सरक्षा परिषद द्वारा समर्थित एक राजनैतिक प्रक्रिया, शान्ति व सुरक्षा बनाए रखने के लिए अहम है.

शान्ति अभियान मामलों के प्रमुख लाक्रोआ ने कहा कि शान्तिरक्षा, युद्धविराम निगरानी व्यवस्था का एक अभिन्न अंग हो सकती है, मगर किसी भी युद्धविराम की सफलता का दायित्व केवल युद्धरत पक्षों पर ही निर्भर है.

दायित्व निभाने की चुनौतियाँ

लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अन्तरिम बल (UNIFIL) के प्रमुख लेफ़्टिनेंट जनरल अरोल्डो लज़ारो साएन्ज़ ने अपने सम्बोधन में राजनैतिक प्रक्रिया के महत्व पर बल दिया. 

यूएन मिशन, UNIFIL को वर्ष 1978 में स्थापित किया गया था, जिसके शासनादेश (mandate) को 2006 में प्रस्ताव 1701 के तहत फिर से परिभाषित किया गया. 

इस प्रस्ताव में लेबनान में हिज़बुल्लाह गुट और इसराइल के बीच 34 दिनों तक चले युद्ध के बाद इस टकराव पर विराम लगाने का आग्रह किया गया था. 

इसके अन्तर्गत, UNIFIL का दायित्व युद्धविराम की निगरानी करना, दक्षिणी लेबनान में लेबनानी सशस्त्र बलों की तैनाती का समर्थन करना और मानवीय सहायता के लिए मार्ग मुहैया कराना है. 

7 अक्टूबर 2023 को दक्षिणी इसराइल में हमास और अन्य फ़लस्तीनी सशस्त्र गुटों के हमलों के बाद, इसराइली सुरक्षा बलों और हिज़्बुल्लाह के बीच युद्ध भड़कने से, UNIFIL के लिए शान्तिरक्षा प्रयासों में चुनौतियाँ उत्पन्न हुईं. 

नवम्बर 2024 में दोनों पक्षों के बीच टकराव समाप्त करने पर सहमति होने तक, इस दायित्व को निभा पाना मुश्किल साबित हो रहा था.

लेफ्टिनेंट जनरल लज़ारो ने कहा कि टकराव पर विराम के बाद और स्थाई युद्धविराम की अनुपस्थिति में, एक बड़ी बाधा यह है कि सभी पक्ष, प्रस्ताव 1701 के तहत अपने तयशुदा दायित्वों की अलग-अलग व्याख्या करते हैं और अब हिंसक टकराव पर विराम के सम्बन्ध में भी. 

दुस्सूचना, एक बड़ी चुनौती 

जानबूझकर ग़लत और भ्रामक सूचनाओं को फैलाए जाने के मामलों से, संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षकों की विश्वसनीयता पर असर होता है और स्थानीय लोगों में अविश्वास बढ़ता है. इससे UNIFIL को अपनी विश्वसनीयता का बचाव करने, निष्पक्षता दर्शाने और भरोसे को मज़बूती देने के लिए अपने तौर-तरीक़ों में बदलाव लाना पड़ा है.

लेफ्टिनेंट जनरल लज़ारो ने कहा कि मिशन की निष्पक्षता की रक्षा के लिए प्रभावी ढंग से स्थानीय समुदायों के साथ सम्पर्क, तथ्यों की परख और समय पर प्रतिक्रिया देना महत्वपूर्ण हैं. UNIFIL ने दुष्प्रचार या ग़लत सूचनाओं का मुक़ाबला करने के लिए एक संचार रणनीति लागू की है, ताकि कोई भी सन्देश सभी शान्तिरक्षा यूनिट में तथ्य-आधारित व स्पष्ट हो.

उन्होंने कहा, "यह आवश्यक है कि सरकारी अधिकारी भी लोगों को UNIFIL की भूमिका और शासनादेश के प्रति सम्वेदनशील बनाने के लिए सार्वजनिक बयान दें, ताकि गलत धारणाओं से बचा जा सके." 

UNIFIL की तरह, काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य में संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षा मिशन (MONUSCO) को भी जानबूझकर फैलाई जाने वाली ग़लत जानकारी की चुनौती से जूझना पड़ रहा है. सशस्त्र समूह, स्थानीय समुदायों को अस्थिर करने और शान्तिरक्षा प्रयासों को कमज़ोर करने के लिए इसका फ़ायदा उठाते हैं.

गोमा के एक हवाई अड्डे के रनवे पर, पृष्ठभूमि में एक विशाल हैंगर के साथ, उच्च दृश्यता वाली जैकेट पहने दो तकनीशियन संयुक्त राष्ट्र के ब्रांड वाले एक सफेद ड्रोन को तैयार कर रहे हैं।
UN Photo/Sylvain Liechti गोमा में एक मानव रहित हवाई वाहन या ड्रोन को उड़ान के लिए तैयार किया जा रहा है.

टैक्नोलॉजी का दुरुपयोग

MONUSCO फ़ोर्स कमान्डर, लेफ्टिनेंट जनरल यूलिसेस डी मेस्किटा गोम्स ने शान्तिरक्षकों के समक्ष उभरते ख़तरों के प्रति सचेत किया, विशेष रूप से उन सशस्त्र समूहों के बारे में जो अपने ठिकानों को छिपाने और दुष्प्रचार फ़ैलाने के लिए आधुनिक टैक्नॉलॉजी का सहारा लेते हैं. 

लेफ्टिनेंट जनरल गोम्स ने कहा, निगरानी टैक्नॉलॉजी, शान्तिरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन सशस्त्र समूह, मिलिशिया और आपराधिक नैटवर्क भी इनका इस्तेमाल कर रहे हैं. 

उन्होंने कहा, "हाल के महीनों में, हमने देखा है कि सशस्त्र गुट, जासूसी के लिए आसानी से उपलब्ध ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं और समन्वय व प्रचार-प्रसार के लिए एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप का प्रयोग किया जा रहा है," जिसका पारम्परिक निगरानी तरीक़ों से पता लगा पाना सम्भव नहीं है.

इन उभरते ख़तरों से निपटने के लिए, MONUSCO ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है और निजी सैक्टर और योगदान देने वाले देशों की मदद से तेज़ी से नई क्षमताएँ विकसित की हैं.