वैश्विक परिप्रेक्ष्य मानव कहानियां

ग़ाज़ा: अत्याचार अपराधों के जोखिम पर चेतावनी, चिकित्साकर्मियों के मारे जाने की जाँच की मांग

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने सुरक्षा परिषद की बैठक में मध्य पूर्व की स्थिति पर जानकारी दी.
UN Photo/Loey Felipe संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने सुरक्षा परिषद की बैठक में मध्य पूर्व की स्थिति पर जानकारी दी.

ग़ाज़ा: अत्याचार अपराधों के जोखिम पर चेतावनी, चिकित्साकर्मियों के मारे जाने की जाँच की मांग

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने सुरक्षा परिषद की एक बैठक के दौरान कहा कि ग़ाज़ा में कुछ दिन पहले, 15 चिकित्साकर्मियों और मानवीय सहायताकर्मियों के मारे जाने की घटना से, इसराइली बलों द्वारा युद्ध अपराध किए जाने पर चिन्ता और बढ़ गई है.

क़ाबिज़ फ़लस्तीन इलाक़े में बढ़ते तनाव पर चर्चा के लिए गुरूवार को सुरक्षा परिषद के आपात सत्र में सदस्य देशों के राजनयिक एकत्र हुए. 

Tweet URL

मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने प्रतिनिधियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि उन्हें "ग़ाज़ा में लोगों की भयावह पीड़ा" के बारे में परिषद को फिर से सूचित करते हुए दुख महसूस हो रहा है." 

"युद्ध विराम के दौरान मिली अस्थाई राहत, जिसने फ़लस्तीनियों को कुछ समय शान्ति से साँस लेने दिया था, एक बार फिर ख़त्म हो गई है.”

उन्होंने बताया कि ग़ाज़ा में स्वास्थ्य प्रशासन के अनुसार, 1 मार्च से इसराइली सैन्य बलों की कार्रवाई में 1,200 से अधिक फ़लस्तीनी मारे गए हैं, जिनमें क़रीब 320 बच्चे भी हैं.

जाँच की मांग

उच्चायुक्त टर्क ने कहा कि वे स्वास्थ्य और मानवीय सहायताकर्मियों की हत्या से स्तब्ध हैं. इन "हत्याओं की स्वतंत्र, त्वरित और विस्तृत जाँच होनी चाहिए, और अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के किसी भी उल्लंघन के लिए ज़िम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए.”

उन्होंने कहा कि ग़ाज़ा में बमबारी के बीच कोई भी जगह सुरक्षित नहीं है. इसके आधे हिस्से में या तो लोगों को जगह खाली करके जाने का आदेश दिया गया है या फिर वहाँ प्रवेश करने पर सख़्त मनाही है.

इस बीच, हमास और अन्य फ़लस्तीनी सशस्त्र गुटों ने ग़ाज़ा से इसराइल पर रॉकेट हमले जारी रखे हैं, जोकि अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून का उल्लंघन है.

"मैं ग़ाज़ा में अभी भी बन्धक के तौर पर रखे गए इसराइल बन्धकों के भविष्य और सलामती को लेकर चिन्तित हूँ.”

मानवीय सहायता में बाधा  

इस बीच, ग़ाज़ा में इसराइल द्वारा मानवीय सहायता आपूर्ति पर पूर्ण रूप से लगाई गई पाबन्दी को एक महीना बीत गया है, जिसमें भोजन, पानी, बिजली, ईंधन और दवाएँ शामिल हैं.

उन्होंने क्षोभ जताया कि ग़ाज़ा की नाकेबन्दी और घेराबन्दी स्थानीय लोगों को सामूहिक दंड देने और भुखमरी को युद्ध के एक तौर-तरीक़े के रूप में इस्तेमाल में लाने के समान है.

मानवाधिकार प्रमुख ने वरिष्ठ इसराइली अधिकारियों द्वारा इलाक़े पर क़ब्ज़ा करने, उसे जबरन अपने क्षेत्र में मिलाने, विभाजित करने, और फ़लस्तीनियों को ग़ाज़ा से बाहर हस्तांतरित करने के बारे में भड़काऊ बयानबाज़ी पर भी चिन्ता जताई. 

उन्होंने कहा, "इससे अन्तरराष्ट्रीय अपराधों को अंजाम दिए जाने के बारे में गम्भीर चिन्ताएँ उत्पन्न होती हैं और यह किसी क्षेत्र पर बलपूर्वक क़ब्ज़ा करने के विरुद्ध अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के मूल सिद्धान्त के भी विपरीत है.”

पश्चिमी तट पर हिंसा

उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने पूर्वी येरूशेलम समेत पश्चिमी तट में मौजूदा हालात पर भी गहरी चिन्ता जताई, जहाँ इसराइली कार्रवाई में सैकड़ों लोगों की जान गई है, पूरे शरणार्थी शिविरों को ध्वस्त कर दिया गया है और 40 हज़ार से अधिक फ़लस्तीनी विस्थापित होने पर मज़बूर हैं.

उन्होंने कहा, “अवैध बस्तियों का विस्तार बेरोकटोक जारी है, जबकि कुछ इसराइली मंत्री क़ब्ज़े वाले क्षेत्र में इसराइली सम्प्रभुता की वकालत कर रहे हैं.” 

मानवाधिकार प्रमुख ने ग़ाज़ा में युद्ध विराम की तत्काल बहाली और वहाँ बेरोकटोक मानवीय सहायता पहुँचाए जाने का आग्रह किया. 

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि "7 अक्टूबर 2023 को इसराइली समुदायों के विरुद्ध किए गए भयानक हमलों को किसी भी प्रकार से न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता है.. और न ही फ़लस्तीनी लोगों को सामूहिक तौर पर दंडित किया जाना न्यायोचित है.”

कोई सैन्य समाधान नहीं

फ़लस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, ग़ाज़ा युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 54 हज़ार फ़लस्तीनी मारे जा चुके हैं और 1.14 लाख फ़लस्तीनी घायल हुए हैं.

वोल्कर टर्क ने सचेत किया कि क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े में अत्याचार अपराधों को अंजाम दिए जाने का जोखिम बढ़ रहा है. उन्होंने प्रभुत्व रखने वाले वाले देशों से आग्रह किया कि आम नागरिकों के संरक्षण को प्राथमिकता के तौर पर लिया जाना होगा.

मानवाधिकार उल्लंघन के सभी मामलों के लिए जवाबदेही तय की जानी अहम है, साथ ही, बन्धक बना कर रखे गए लोगों और बन्दियों की तत्काल बिना शर्त रिहाई की जानी होगी.

OHCHR प्रमुख ने कहा कि फ़लस्तीनी आबादी को जबरन हस्तांतरित करने वाली किसी भी कार्रवाई से इसराइल को परहेज बरतना होगा. उनके अनुसार, पिछले 18 महीनों से जारी हिंसा से यह स्पष्ट हो चुका है कि इस संकट का कोई सैन्य समाधान नहीं है.