म्याँमार भूकम्प: पीड़ित महिलाओं व लड़कियों के लिए संरक्षण सेवाओं का आग्रह
संयुक्त राष्ट्र मानवीय सहायता एजेंसियों ने आगाह किया है कि म्याँमार में पिछले शुक्रवार को आए विनाशकारी भूकम्प से न केवल बड़े पैमाने पर जान-माल की हानि हुई है, बल्कि देश में लम्बे समय से व्याप्त लैंगिक असमानताएँ और गहरी हो रही हैं. इससे लाखों महिलाओं व लड़कियों के लिए जोखिम है.
फ़रवरी 2021 में सैन्य तख़्तापलट के बाद से म्याँमार हिंसक टकराव, विस्थापन और आर्थिक बदहाली से गुज़र रहा है. और पिछले सप्ताह आए भूकम्प से हुई बर्बादी के बाद अब लिंग-आधारित हिंसा और शोषण का जोखिम भी बढ़ रहा है.
मानवीय सहायता एजेंसियों एक समूह ने चेतावनी दी है कि उन लड़कियों पर विशेष रूप से जोखिम हैं, जो अपने परिवारों से अलग हो गई हैं या फिर जिन्हें भीड़भाड़ भरे आश्रय स्थलों पर रहना पड़ रहा है.
“अनेक देखभालकर्मियों के मारे जाने या ज़ख़्मी होने के बाद, अकेले और अलग हो गए बच्चों की तत्काल शिनाख़्त करने, उनके संरक्षण और उन्हें फिर से मिलाने के लिए तुरन्त प्रयासों की आवश्यकता है.”
महिला सशक्तिकरण के लिए यूएन संस्था (UN Women) और प्रजनन स्वास्थ्य के लिए यूएन एजेंसी (UNFPA), मानवतावादी एजेंसियों के इस समूह की साझा तौर पर अगुवाई कर रही हैं.
समाचार माध्यमों के अनुसार, सैन्य नेतृत्व में 2 से 22 अप्रैल के दौरान, अस्थाई रूप से युद्धविराम की घोषणा की है, ताकि भूकम्प प्रभावित इलाक़ों में आपात राहत व बचाव अभियान को आगे बढ़ाया जा सके.
इससे पहले, सैन्य नेतृत्व के विरोध में लड़ाई लड़ रहे हथियारबन्द विरोधी गुटों ने अपनी ओर से युद्धविराम की घोषणा की थी.
एक अनुमान के अनुसार, भूकम्प से क़रीब दो करोड़ लोगों के प्रभावित होने का अनुमान है. इस आपदा से पहले देश में मानवीय संकट से एक करोड़ लोगों को सहायता की आवश्यकता थी, जिनमें क़रीब आधी आबादी महिलाओं व लड़कियों की है.
एक लाख से अधिक गर्भवती महिलाएँ, मध्य म्याँमार में उथलपुथल में फँसी हुई हैं, जिनमें 12 हज़ार से अधिक इस महीने बच्चों को जन्म देंगी. भूकम्प की वजह से स्वास्थ्य केन्द्रों, सड़कों व पुलों को नुक़सान पहुँचा है, प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं और लिंग-आधारित हिंसा के पीड़ितों के लिए समर्थन पर असर हुआ है.
तत्काल कार्रवाई को प्राथमिकता
यूएन मानवीय सहायताकर्मियों ने ज़ोर देकर कहा है कि मौजूदा आवश्यकताओं के आकलन में संकट-प्रभावित समुदायों की महिलाओं को साथ लेकर चलना होगा, ताकि उनकी प्राथमिकताओं पर ध्यान दिया जा सके.
महिलाओं व लड़कियों को सुरक्षित आश्रय स्थल, स्वच्छ जल व पर्याप्त भोजन की ज़रूरत है. आश्रय स्थलों में ताले, प्रकाश व निजी स्थान की व्यवस्था अहम है. साथ ही, उन्हें शौचालय, स्नानघर, गरिमा किट और माहवारी स्वच्छता उत्पाद भी मुहैया कराए जाने होंगे.
जल केन्द्रों और शौचालयों के पास पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था के ज़रिये लिंग-आधारित हिंसा के जोखिम को कम किया जा सकता है.
इन प्रयासों में महिलाओं के नेतृत्व वाले संगठनों को शामिल करने पर बल दिया गया है, जिनमें से अनेक पहले से ही ज़मीनी स्तर पर समर्थन प्रदान करने के लिए तैयार हैं.
सहायता धनराशि की क़िल्लत
आपात राहत मामलों के लिए यूएन अवर महासचिव टॉम फ़्लैचर ने म्याँमार में मानवीय सहायता अभियान को मदद देने के इरादे से ज़्यादा धनराशि मुहैया कराए जाने की अपील की है.
संयुक्त राष्ट्र के केन्द्रीय आपात प्रतिक्रिया कोष (CERF) से 50 लाख डॉलर की रक़म पहले ही आवंटित की जा चुकी है, मगर पर्याप्त धनराशि के अभाव की वजह से सहायता प्रयासों में अवरोध पेश आ रहे हैं.
अवर महासचिव फ़्लैचर ने बताया कि वह स्थानीय प्रशासन के साथ सम्पर्क में हैं, ताकि अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से ज़्यादा स्तर पर मदद हासिल की जा सके. “हमारे पास बेरोकटोक, सुरक्षित सहायता मार्ग होना चाहिए. सभी पक्षों को आम नागरिकों की रक्षा के अपने दायित्व को निभाना होगा.”
इस बीच, परियोजना सेवाओं के लिए यूएन कार्यालय (UNOPS) ने आपात सहायता के लिए 1.2 करोड़ डॉलर की धनराशि का प्रबन्ध किया है, जिसे नक़दी, खाद्य सहायता, आश्रय, जल, साफ़-सफ़ाई व्यवस्था, मलबा हटाने और स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं के लिए साझेदार संगठनों को आवंटित किया जाएगा.