म्याँमार में भूकम्प: अस्पतालों पर बोझ, समय बीतने के साथ बढ़ती सहायता ज़रूरतें
म्याँमार में पिछले शुक्रवार को आए भूकम्प से बड़े पैमाने पर तबाही हुई है और मृतकों का आँकड़ा निरन्तर बढ़ रहा है. यूएन मानवीय सहायताकर्मी इस त्रासदी से प्रभावित लोगों तक तेज़ी से मदद पहुँचाने में जुटे हैं और उन्होंने आगाह किया है कि मलबे से लोगों को जीवित निकालने के लिए समय बीता जा रहा है. सहायता अभियान के लिए धनराशि की क़िल्लत के बीच अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से समर्थन की पुकार लगाई गई है.
देश में संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की उप प्रतिनिधि जूलिया रीस ने मंगलवार को यंगून से पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि रिक्टर पैमाने पर 7.7 की तीव्रता वाले भूकम्प से विशाल आवश्यकताएँ उपजी हैं.
“समुदाय पूरी तरह से ध्वस्त हो चुके हैं.” बच्चों और उनके परिवारों के पास वापिस लौटने के लिए कोई घर नहीं बचा है, वे सदमे में हैं और उन्हें बाहर खुले में रात गुज़ारनी पड़ रही है. कुछ बच्चे अपने परिवारों से अलग हो गए हैं जबकि अन्य लापता हैं.
म्याँमार में सैन्य नेतृत्व के अनुसार, मैंडाले, सगाइंग, नेपीडॉ और शन प्रान्तों में बर्बादी लाने वाली इस आपदा में अब तक क़रीब दो हज़ार लोगों की मौत होने की ख़बर है. हज़ारों लोग घायल हुए हैं और सैकड़ों अन्य लापता हैं.
यूनीसेफ़ उप प्रतिनिधि ने कहा कि जीवनरक्षक बचाव अभियान के लिए समय ख़त्म होता जा रहा है, जबकि प्रभावित परिवारों को स्वच्छ जल, भोजन व मेडिकल आपूर्ति की तुरन्त ज़रूरत है.
अन्तरराष्ट्रीय सहायता अभियान
इस बीच, मानवीय सहायता मामलों में समन्वय के लिए यूएन कार्यालय (OCHA) ने बताया कि स्थानीय स्तर पर तलाश एवं बचाव दलों को चीन, भारत, रूस, बांग्लादेश समेत अन्य देशों से सहायताकर्मियों का समर्थन मिल रहा है.
मध्य म्याँमार में बचाव अभियान में तेज़ी आई है जहाँ अब भी हल्के झटके महसूस किए जा रहे हैं.
यूएन मानवतावादी कार्यालय के अवर महासचिव टॉम फ़्लैचर ने सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म, X, पर अपने सन्देश में कहा कि बुनियादी ढाँचे को पहुँची भारी क्षति से इतर, सहायता धनराशि में कमी की वजह से सहायता कार्य में अवरोधों का सामना करना पड़ रहा है.
संयुक्त राज्य अमेरिका और योरोपीय देशों द्वारा विदेशी सहायता में कटौती किए जाने की घोषणाओं के बाद विश्व भर में मानवतावादी प्रयासों के लिए चुनौतियाँ उपजी हैं.
उन्होंने बताया कि वह म्याँमार प्रशासन के साथ सम्पर्क में हैं कि अन्तरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा किस प्रकार से और सहायता मुहैया कराई जा सकती है.
अस्पतालों पर बोझ
म्याँमार में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रतिनिधि डॉक्टर फ़र्नान्डो तुषारा के अनुसार, नेपीडॉ में अस्पतालों पर भीषण दबाव है और मरीज़ों का तांता लगा हुआ है.
“मेडिकल आपूर्ति ख़त्म होती जा रही है. कुछ अस्पतालों में बिजली व्यवस्था में भी व्यवधान आया है...और नल से पानी की क़िल्लत है.” अस्पतालों में ईंधन कम है और इसकी वजह से जनरेटर को इस्तेमाल में ला पाना भी कठिन है.
डॉक्टर तुषारा ने चेतावनी दी है कि ताज़ा जल और साफ़-सफ़ाई के अभाव में संक्रामक बीमारियाँ फैल सकती हैं और हालात पर जल्द से जल्द क़ाबू पाने की ज़रूरत है.
उधर, यूएन शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) के प्रवक्ता बाबर बलोच ने ज़ोर देकर कहा कि फ़रवरी 2021 में हुए सैन्य तख़्तापलट के बाद से देश पहले ही एक नाज़ुक दौर से गुज़र रहा था.
‘दोहरी त्रासदी’
उन्होंने कहा कि म्याँमार के लोगों के लिए यह एक दोहरी त्रासदी है, और विनाशकारी भूकम्प के झटकों से पहले, सभी प्रभावित इलाक़ों में 16 लाख विस्थापितों ने शरण ली हुई थी.
म्याँमार में यूएन रेज़िडेंट कोऑर्डिनेटर मार्कोलुइजी कॉर्सी ने कहा कि आपदा-प्रभावित समुदायों की सहनसक्षमता कमज़ोर हुई है. देश भर में क़रीब दो करोड़ लोगों को इस आपदा से पहले ही मानवीय सहायता की आवश्यकता थी. 1.5 करोड़ लोगों के पास भरपेट भोजन नहीं था.
उन्होंने ध्यान दिलाया कि 2025 के तीन महीने बीत चुके हैं और म्याँमार में सहायता अभियान के लिए 1.1 अरब डॉलर की अपील जारी की गई थी, मगर फ़िलहाल पाँच प्रतिशत धनराशि ही जुट पाई है.
मानवतावादी समन्वयक कॉर्सी ने अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के नाम एक अपील जारी करते हुए कहा कि म्याँमार के लोगों को समर्थन देने के लिए जल्द आगे आना होगा.
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