भारत: सतत विकास लक्ष्यों के लिए दक्षिण-दक्षिण सहयोग का नेतृत्व
भारत स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय ने, दक्षिण-दक्षिण सहयोग के ज़रिए क्षेत्र में परस्पर सहयोग बढ़ाने के लिए एसडीजी कोष की शुरूआत की है. यह पहल, परिवर्तनकारी एसडीजी कार्रवाई के लिए संसाधन एकत्रित करने हेतु रणनैतिक दृष्टिकोण का हिस्सा है. इस कोष का उद्देश्य, भारत सरकार और संयुक्त राष्ट्र के बीच सतत विकास सहयोग के लिए, संयुक्त राष्ट्र देशीय टीम को परियोजनाएँ एवं कार्यक्रम लागू करने के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराना है.
भारत में संयुक्त राष्ट्र ने एसडीजी कार्रवाई हेतु विभिन्न यूएन एजेन्सियों के एक साझा कोष की शुरूआत की है. यह कोष, यूएन कंट्री टीम (UNCT) के लिए संसाधन संग्रहित करने के एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य करेगा, जिससे भारत सरकार एवं यूएन के सतत विकास सहयोग ढाँचे (UN Sustainable Development Cooperation framework) में वित्तीय अन्तराल को दूर करने में मदद मिलेगी.
इस कोष का प्रबंधन बहु-साझेदारी वाले, यूएन मल्टी पार्टनर ट्रस्ट फंड (MPTF) द्वारा किया जाएगा, जो देश में स्थित यूएन की टीमों को विभिन्न क्षेत्रों में सतत विकास हासिल करने के लिए अतिरिक्त संसाधन एकत्रित करने में सक्षम बनाएगा तथा इससे परियोजनाओं एवं कार्यक्रमों को लागू करने में मदद मिलेगी.
भारत में संयुक्त राष्ट्र के रेज़िडेंट कॉर्डिनेटर के कार्यालय के नेतृत्व में आरम्भ हुई यह पहल, एसडीजी की कारर्वाई के लिए संसाधनों को इकट्ठा करने के अहम रणनैतिक दृष्टिकोण का प्रतीक है.
इस कोष के तहत सबसे पहले 'दक्षिण-दक्षिण सहयोग' पर 'विषयगत लक्ष्यों' का संचालन किया गया है. उम्मीद है कि इससे यूएन रैज़िडेन्ट कोऑर्डिनेटर प्रणाली की ताकत का लाभ उठाते हुए, भारत स्थित संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों तथा एशिया-प्रशांत, अफ़्रीका, छोटे द्वीपीय विकासशील देशों (SIDS), व अल्प विकसित देशों (LDCs) में उनके समकक्षों के बीच साझेदारी को सुविधाजनक बनाने में मदद मिलेगी. इससे विकास समाधानों के प्रसार व परस्पर सहयोग से एसडीजी की प्राप्ति को तेज़ करने में भी मदद मिलेगी.
पहल का उद्देश्य
इस कोष में बिल एण्ड मैलिन्डा गेट्स फाउण्डेशन ने 30 लाख का शुरूआती योगदान दिया. जो भारत सरकार-यूएन सतत विकास सहयोग ढाँचे 2023-2027 के लिए दिया गया है.
इसका उद्देश्य, भारत के दक्षिण-दक्षिण सहयोग की पेशकश का विस्तार करने के लिए भारत में यूएन एजेन्सियों की भागेदारी मज़बूत करना है. साथ ही, परिवर्तनकारी एसडीजी कार्रवाई के लिए दाताओं व साझेदारों का सहयोग जुटाना है.
यह पहल, संयुक्त राष्ट्र के दक्षिण-दक्षिण सहयोग कार्यालय और विकासशील देशों के बीच तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने और लागू करने के लिए ब्यूनस आयर्स कार्रवाई योजना, BAPA+40 एवं सतत विकास के लिए 2030 एजेंडे जैसी पहलों से भी जुड़ी है. इन सभी कार्रवाई योजनाओं में, दक्षिण-दक्षिण सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका को अहम माना गया है.
इसमें, भारत के रेज़िडेंट कोऑर्डिनेटर कार्यालय के नेतृत्व वाले प्रस्तावों के लिए, भारत स्थित यूएन एजेन्सियाँ, अपने प्रदाता कार्यालयों के सहयोग से परियोजना प्रस्ताव लागू करेंगी.
इसके अन्तर्गत, प्रत्येक प्रस्ताव के लिए 1,50,000 अमेरिकी डॉलर तक प्राप्त किए जाने का प्रावधान है. इस राशि को अलग-अलग परियोजनाओं की बजाय, एक उत्प्रेरक वित्तपोषण के रूप में रखा जाएगा, जिससे निवेश का अधिकाँश हिस्सा प्राप्तकर्ता देशों में कार्रवाई के लिए ख़र्च हो.
फिलहाल शुरूआती प्रस्तावों के लिए चयन प्रक्रिया अन्तिम चरण में है. इस रणनैतिक अवसर का लाभ उठाने व अगले प्रस्तावों के लिए सम्भावित सहयोग की खोज के लिए, क्षेत्र के विभिन्न देशों में स्थित यूएन रैज़िडेन्ट कोऑर्डिनेटर, अपनी यूएन देशीय टीमों को भारत के यूएन रैज़िडेन्ट कोऑर्डिनेटर कार्यालय के साथ जुड़ने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं.
भारत स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के एसडीजी देश कोष, वित्तपोषण और दक्षिण-दक्षिण सहयोग में एक ऐसा नवाचार है, जो सतत विकास को तेज़ करने के लिए रणनैतिक साझेदारी मज़बूत करने में सहायक होगा.