म्याँमार: भूकम्प की भीषण त्रासदी से, मौजूदा संकट और विकराल होने की आशंका
म्याँमार मे भूकम्प प्रभावित इलाक़ों में पूरे समुदाय तबाह हो गए हैं और इस आपदा से हुई बर्बादी के बारे में अभी तक भी पूरी तरह से अन्दाज़ा नहीं लग पाया है. म्याँमार में संयुक्त राष्ट्र के रेज़िडेंट कोऑर्डिनेटर और शीर्ष मानवतावादी समन्वयक मार्कोलुइजी कॉर्सी ने सोमवार को अपने एक वक्तव्य में देश को इस संकट से उबारने के लिए ज़रूरी मदद मुहैया कराए जाने की अपील की है.
म्याँमार में शुक्रवार को रिक्टर पैमाने पर 7.7 व 6.4 की तीव्रता वाले भूकम्प के दो शक्तिशाली झटके महसूस किए गए, जिससे जान-माल की भीषण हानि हुई है. देश के सैन्य नेतृत्व के अनुसार, अभी तक क़रीब दो हज़ार लोगों के मारे जाने की ख़बर है.
यूएन के वरिष्ठ अधिकारी मार्कोलुइजी कॉर्सी ने बड़ी संख्या में आम लोगों के हताहत होने पर गहरा दुख व्यक्त किया है. कई लोग अब भी लापता बताए गए है और उनकी तलाश में अब भी अभियान चलाया जा रहा है.
यूएन रैज़ीडेंट कोऑर्डिनेटर ने बताया कि आपात सहायता अभियान के लिए संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ और साझेदार संगठन लामबन्द प्रयास कर रहे हैं और सभी समुदायों तक राहत पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
भूकम्प से मैंडाले, सगाइंग, बागो, मैगवे, नेपीडॉ और शन प्रान्त पर ख़ासा असर हुआ है. अस्पतालों पर भीषण बाव है और संचार व परिवहन मार्ग में व्यवधान आया है.
हज़ारों लोग अब भी खुले में रात गुज़ार रहे हैं. उन्हें भूकम्प के झटके फिर आने की आशंका है और वे क्षति ग्रस्त घरों में लौटने से डर रहे हैं.
यूएन के समन्वय में क़रीब 20 देशों से बचाव टीमों को यहाँ भेजा गया है, जिनमें मेडिकल आपूर्ति, तलाश अभियान में मदद देने वाले कुत्तों के अलावा अन्य प्रकार की सहायता है.
म्याँमार में यह आपदा ऐसे समय में आई है जब फ़रवरी 2021 में सैन्य तख़्तापलट के बाद से ही देश पिछले कई वर्षों से गृहयुद्ध, मानवीय संकट से जूझ रहा है, जिससे बड़े पैमाने पर आम नागरिक विस्थापित हुए हैं.
सहनसक्षमता पर असर
रैज़िडेंट कोऑर्डिनेटर कॉर्सी ने कहा कि भूकम्प से पहले भी देश में क़रीब दो करोड़ लोगों को मानवीय सहायता की आवश्यकता थी. अब इस त्रासदी के कारण पहले से ही गम्भीर और बदतरीन रूप धारण करेगा और स्थानीय समुदायों की सहनसक्षमता कमज़ोर होगी, जोकि पहले से ही हिंसक टकराव, विस्थापन और आपदाओं से गुज़र रहे थे.
म्याँमार में यूएन मानवतावादी टीम ने अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर भूकम्प के बाद उपजी आवश्यकताओं का त्वरित आकलन किया है, जिसमें महिलाओं, बच्चों, बुज़ुर्गों और विकलांगजन की ज़रूरतों पर विशेष रूप से ध्यान केन्द्रित किया गया.
मार्कोलुइजी कॉर्सी ने कहा कि यूएन की मैंडाले व उसके आस-पास के इलाक़ों में उपस्थिति है और सहायता अभियान संचालन सम्बन्धी चुनौतियों के बावजूद, ज़रूरतमन्दों तक पहुँचने के लिए हरसम्भव प्रयास किए जा रहे हैं.
“आने वाले दिनों व हफ़्तों में और अधिक प्रयास किए जाने की आवश्यकता होगी.” रैज़िडेंट कोऑर्डिनेटर ने सचेत किया कि इस संकट को बिगड़ने से रोकने के लिए यह ज़रूरी है कि समय पर मदद प्रदान की जाए.
युद्धविराम की अपील
इस बीच, म्याँमार के लिए यूएन की विशेष दूत जूली बिशप ने सोमवार को जारी अपने वक्तव्य में इस कठिन घड़ी में म्याँमार की जनता के साथ एकजुटता व्यक्त की है.
उन्होंने कहा कि भूकम्प ने म्याँमार के लोगों के लिए नाज़ुक हालात को उजागर कर दिया है और यह दर्शाया है कि वृहद संकट से निपटने के लिए अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को सतत रूप से ध्यान केन्द्रित करना होगा.
म्याँमार में विपक्षी हथियारबन्द गुटों के साथ हिंसक टकराव में सैन्य नेतृत्व का देश के एक बड़े हिस्से पर नियंत्रण ख़त्म हो गया है.
विशेष दूत बिशप ने कहा कि सभी युद्धरत पक्षों को मानवतावादी राहत के लिए जगह मुहैया करानी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि राहतकर्मी पर्याप्त सुरक्षा के साथ अपने दायित्व निभा सकें.
इसके मद्देनज़र, उन्हें भूकम्प के बाद उपजी स्थिति से निपटने, प्रभावितों तक राहत पहुँचाने के इरादे से युद्धविराम की पुकार लगाई ताकि सहायता अभियान को आगे बढ़ाना व आम नागरिकों को इस चुनौती से उबारना सम्भव हो सके.