ग़ाज़ा: गोलीबारी में राहतकर्मियों की मौत पर गहरा क्षोभ, न्याय व जवाबदेही की मांग
आपात राहत मामलों के लिए संयुक्त राष्ट्र समन्वयक (OCHA) टॉम फ़्लैचर ने 23 मार्च को दक्षिणी ग़ाज़ा में इसराइली सैन्य बलों की गोलीबारी में आठ फ़लस्तीनी चिकित्साकर्मियों, छह नागरिक सुरक्षा कार्यकर्ताओं और एक यूएन कर्मचारी के मारे जाने की घटना पर क्षोभ व्यक्त किया है और पीड़ितों के लिए न्याय सुनिश्चित करने की मांग की है.
अब तक मिली जानकारी के अनुसार, फ़लस्तीनी रैड क्रेसेन्ट सोसाइटी, फ़लस्तीनी नागरिक प्रतिरक्षा दल और संयुक्त राष्ट्र के इन मानवीय सहायताकर्मियों की स्पष्ट पहचान की जा सकती थी.
क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े के लिए यूएन मानवतावादी कार्यालय के शीर्ष अधिकारी जोनाथन व्हिटॉल ने सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म, X, पर अपने सन्देश में बताया कि दक्षिणी ग़ाज़ा के राफ़ाह इलाक़े में 23 मार्च को घायल व्यक्तियों को उपचार देने के इरादे से उन्हें वहाँ के लिए रवाना किया गया था, जहाँ वे इसराइली सैनिकों की गोलीबारी की चपेट में आ गए.
उन्होंने कहा कि हमले के बाद प्रभावित इलाक़े में पाँच ऐम्बुलेंस, एक अग्निशमन ट्रक और स्पष्टता से चिन्हित एक यूएन वाहन पहुँचा, मगर उन सभी पर इसराइली बलों की गोलीबारी हुई है, जिसके बाद उनसे सम्पर्क टूट गया था.
जोनाथन व्हिटॉल के अनुसार, जीवित बचे एक व्यक्ति ने बताया कि इसराइली सेना ने उनकी ऐम्बुलेंस में दोनों चालकों को मार दिया. कई दिनों तक OCHA ने घटनास्थल पर पहुँचने की कोशिश की, मगर पाँच दिन बाद ही इसकी अनुमति दी गई.
संयुक्त राष्ट्र कर्मचारियों ने वहाँ पहुँचने के बाद देखा कि सैकड़ों फ़लस्तीनी नागरिक इसराइली गोलीबारी से बचने के लिए भाग रहे थे.
‘भयावह दृश्य’
जोनाथन व्हिटॉल ने कहा कि सहायताकर्मी किसी तरह रविवार को वहाँ पहुँचने में कामयाब हुए, मगर उन्हें वहाँ भयावह दृश्य दिखाई दिए: ऐम्बुलेंस, यूएन वाहन, अग्निशमन ट्रक चकनाचूर हो चुके थे और उन्हें आंशिक रूप से मिट्टी में दबाया गया था.
कई घंटों की खुदाई के बाद, उन्होंने एक शव को निकाला, जोकि ट्रक के नीचे दबाया हुआ था. फ़लस्तीनी रैड क्रेसेन्ट सोसाइटी ने इन मौतों पर रविवार को गहरा क्षोभ व्यक्ति किया है और बताया कि उनका नौवां कर्मचारी अब भी लापता है.
अन्तरराष्ट्रीय रैड क्रॉस व रैड क्रेसेन्ट सोसाइटी के महासचिव जगन चपागेन ने इस घटना पर गहरा क्षोभ जताते हुए कहा कि ये समर्पित ऐम्बुलेंस कर्मचारी घायल लोगों तक मदद पहुँचा रहे थे. उनकी पोशाक पर स्पष्ट चिन्ह थे, जिससे उनकी रक्षा की जानी चाहिए थी. उन्हें अपने परिवारों के पास लौटना चाहिए था, मगर वे वापिस नहीं आ पाए.
“हिंसक टकराव से ग्रस्त बेहद जटिल ज़ोन में भी नियम होते हैं. अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून के ये नियम और स्पष्ट नहीं हो सकते हैं: आम नागरिकों की रक्षा की जानी होगी, मानवतावादियों की रक्षा की जानी होगी. स्वास्थ्य सेवाओं की रक्षा की जानी होगी.”
समाचार माध्यमों में इसराइली सेना के हवाले से कहा गया है कि ये वाहन संदेहास्पद ढंग से आगे बढ़ रहे थे, जिसके बाद उन पर गोलीबारी की गई थी. इसराइली सेना ने दावा किया है कि आठ अन्य आतंकवादियों के साथ एक हमास का लड़ाका भी मारा गया है.
ग़ाज़ा में नाज़ुक हालात में इसराइली सेना और हमास चरमपंथियों के बीच दो महीने तक जारी रहने वाला युद्धविराम 18 मार्च को टूट गया था. इसके बाद, सोमवार को इसराइली सेना पूरे राफ़ाह क्षेत्र से लोगों को सामूहिक तौर पर जगह खाली करने का आदेश दिया था.
‘यह नहीं होना चाहिए था’
क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े में OCHA अधिकारी जोनाथन व्हिटॉल ने रविवार को दोहराया था कि अग्रिम पंक्ति के राहतकर्मियों को कभी भी निशाना नहीं बनाया जाना होगा.
“आज, ईद के पहले दिन, हम वापिस आए और इन दफ़नाए गए शवों को बाहर निकाला...उन्हें वर्दी पहने ही मार दिया गया था. स्पष्ट तौर पर चिन्हित अपने वाहन चलाते हुए. अपने दस्ताने पहने हुए. जीवन रक्षा के लिए जाते हुए. यह कभी नहीं होना चाहिए था.”
संयुक्त राष्ट्र मानवतावादी कार्यालय के अवर महासचिव टॉम फ़्लैचर ने सोमवार को पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी गहरी सम्वेदना व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि जब ये राहतकर्मी लोगों के जीवन की रक्षा के लिए जा रहे थे, उन्हें मार दिया गया. “हम जवाब व न्याय की मांग करते हैं.”