दक्षिण सूडान: राजनैतिक, सुरक्षा, आर्थिक, मानवीय संकट से घिरे देश के लिए समर्थन की पुकार
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने दक्षिण सूडान में तेज़ी से बिगड़ रहे हालात पर गहरी चिन्ता व्यक्त करते हुए तुरन्त सम्वाद स्थापित करने और 2018 में हुए शान्ति समझौते पर नए सिरे से प्रतिबद्धता जताने की पुकार लगाई है. साथ ही, उन्होंने हिरासत में लिए गए अधिकारियों की तत्काल रिहाई पर बल दिया है.
यूएन के शीर्षतम अधिकारी ने शुक्रवार को न्यूयॉर्क मुख्यालय में पत्रकारों को बताया कि अपने साथ तूफ़ान लाने वाले स्याह बादलों ने दुनिया के सबसे नए देश के लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है. दक्षिण सूडान को विश्व में सबसे निर्धन देशों में भी गिना जाता है.
दक्षिण सूडान ने जुलाई 2011 में सूडान से स्वाधीनता हासिल की थी, मगर उसके बाद से ही यह टकराव और अस्थिरता से जूझता रहा है. दिसम्बर 2013 में राष्ट्रपति सल्वा कीर के वफ़ादार सैन्य बलों और उनके विरोधी रिएक मचार के समर्थकों में गृहयुद्ध भड़क उठा था जिसमें हज़ारों लोगों की जान गई.
कई वर्षों तक जातीय हिंसा, सामूहिक अत्याचार और मानवीय संकट जारी रहने के बाद 2018 में नाज़ुक हालात में एक शान्ति समझौते पर सहमति हुई और एकता सरकार का गठन हुआ था.
मगर, परस्पर विरोधी सैन्य बलों के बीच बढ़ती झड़पों और आम नागरिकों पर हमले के बीच बुधवार को मुख्य विपक्षी नेता और प्रथम उप राष्ट्रपति रिएक मचार को गिरफ़्तार कर लिया गया.
हिंसा की नई लहर 4 मार्च को भड़की जब युवाओं के एक विद्रोही गुट (व्हाईट आर्मी) ने अपर नाईल प्रान्त के नासिर में सेना के बैरकों पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया.
इसके जवाब में, सरकारी सैन्य बलों ने नागरिक इलाक़ों पर हवाई बमबारी की है, और बैरल बमों का इस्तेमाल किया है, जिसमें कथित रूप से अत्यंत ज्वलनशील पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है.
इस घटनाक्रम से शान्ति प्रक्रिया को गहरा धक्का पहुँचने और लाखों लोगों के लिए ख़तरा उपजने की आशंका है.
यूएन प्रमुख ने सचेत किया कि पड़ोसी देश सूडान में हिंसक टकराव का असर पहले ही इस पूरे क्षेत्र को अपने घेरे में ले रहा है और अब दक्षिण सूडान में बदतरीन हालात से पूरा देश एक गम्भीर पड़ाव पर है.
“हम जो कुछ देख रहे हैं वो 2013 और 2016 के उस स्याह दौर के गृहयुद्धों की याद दिलाता है, जिसमें चार लाख लोग मारे गए थे.”
सिलसिलेवार संकट
यूएन प्रमुख ने कहा कि दक्षिण सूडान फ़िलहाल एक सुरक्षा आपात स्थिति, राजनैतिक उठापठक, मानवीय बर्बादी, विस्थापन संकट, आर्थिक बदहाली और सहायता धनराशि की क़िल्लत से एक साथ जूझ रहा है.
देश की क़रीब आधी आबादी गम्भीर स्तर पर खाद्य असुरक्षा से जूझ रहा है और हर चार में से तीन लोगों को मानवीय सहायता की आवश्यकता है.
सूडान में परस्पर विरोधी सैन्य बलों के बीच जारी हिंसक टकराव से बचने के लिए 10 लाख से अधिक लोगों ने सीमा पार करके दक्षिण सूडान में शरण ली है, जिससे यह संकट और जटिल हो गया है.
“दक्षिण सूडान दुनिया की राडार से भले ही हट गया है, लेकिन हम स्थिति को रसातल में समाते हुए नहीं देख सकते.”
तनाव में कमी लाने की अपील
महासचिव गुटेरेश ने दक्षिण सूडान के नेताओं से हथियार छोड़ने का आग्रह करते हुए कहा कि देश के लोगों और उनके हितों को प्राथमिकता दी जानी होगी.
उन्होंने दक्षिण सूडान में राष्ट्रीय एकता वाली सरकार को बहाल किए जाने और शान्ति समझौते को पूर्ण रूप से अमल में लाने का आग्रह किया. उनके अनुसार, दिसम्बर 2026 में निष्पक्ष व स्वतंत्र चुनाव की दिशा में ले जाने वाला यही एकमात्र क़ानूनी रास्ता है.
यूएन प्रमुख ने अफ़्रीकी संघ समेत क्षेत्रीय व अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से भी एक स्वर में शान्ति के पक्ष में आवाज़ उठाने की अपील की है.