म्याँमार, थाईलैंड में भीषण भूकम्प से जान-माल की हानि, सहायता प्रयासों में जुटी यूएन एजेंसियाँ
म्याँमार में शुक्रवार को आए शक्तिशाली भूकम्प में बड़े पैमाने पर जान-माल की हानि होने की ख़बरें हैं, जिसके बाद संयुक्त राष्ट्र सहायताकर्मी प्रभावित इलाक़ों में बचाव एवं राहत कार्यों में जुट गए हैं. म्याँमार इस आपदा से सबसे अधिक प्रभावित हुआ है, मगर पड़ोसी देश थाईलैंड में भी इमारतों को नुक़सान पहुँचा है और लोगों के मारे जाने की ख़बर है.
आपात राहत मामलों में समन्वय के लिए यूएन अवर महासचिव टॉम फ़्लैचर ने सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म पर अपने सन्देश में बताया कि यूएन सहायताकर्मियों को वैश्विक नैटवर्क से ज़रूरी समर्थन प्रदान किया जा रहा है. साथ ही, केन्द्रीय आपात राहत कोष से जीवनरक्षक राहत कार्यों के लिए 50 लाख डॉलर की धनराशि आवंटित की गई है.
अभी तक मिली जानकारी के अनुसार, म्याँमार का मैंडाले शहर, रिक्टर पैमाने पर 7.7 की तीव्रता वाले इस भूकम्प का केन्द्र था, जहाँ बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने की आशंका है.
वहीं, पड़ोसी देश थाईलैंड में भी निर्माण कार्य में जुटे 80 कर्मचारी लापता बताए गए हैं, जिनकी तलाश में अभियान चलाया जा रहा है.
म्याँमार में यूएन रेज़िडेंट कोऑर्डनिटेर कार्यालय ने यूएन न्यूज़ को बताया कि मैंडाले प्रान्त में बड़ी क्षति होने की ख़बरें मिल रही हैं. ने पी टॉ, बागो, मैग्वे, सगाइंग समेत अन्य इलाक़ों में नुक़सान होने की आशंका जताई गई है.
बड़े पैमाने पर क्षति
यूएन कार्यालय ने इस आपदा से प्रभावित होने वाले लोगों के प्रति अपनी सम्वेदना व्यक्त की है. भूकम्प से बुनियादी ढाँचे को हुए नुक़सान, प्रभावित लोगों की संख्या और तात्कालिक मानवीय सहायता आवश्यकताओं के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है.
म्याँमार में अन्तरराष्ट्रीय रैड क्रॉस व रैड क्रेसेन्ट फ़ेडरेशन की टीम में कार्यक्रम समन्वयक मैरी मैनरिक़ ने जिनीवा में पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि इस भूकम्प के झटके चीन, थाईलैंड और भारत में भी महसूस किए गए हैं.
उन्होंने कहा कि इमारतों व बुनियादी ढाँचों को हुए नुक़सान के अलावा बाँध के टूटने का भी जोखिम है. देश के कुछ हिस्सों में बिजली और संचार व्यवस्था ठप हो गई है. इन हालात में, म्याँमार में रैड क्रॉस सोसाइटी ने हालात का जायज़ा लेने और ज़रूरतमन्दों तक मदद पहुँचाने के इरादे से एक आपात अभियान शुरू किया है.
फ़रवरी 2021 में सैन्य तख़्तापलट के बाद म्याँमार गृहयुद्ध और एक विशाल मानवीय संकट से जूझ रहा है. देश में क़रीब एक-तिहाई आबादी, दो करोड़ लोगों को इस वर्ष मानवीय सहायता की आवश्यकता होगी.
2025 में, इनमें से 1.5 करोड़ लोग के खाद्य असुरक्षा की चपेट में आने का अनुमान जताया गया है. सरकारी सैन्य बलों और विपक्षी हथियारबन्द गुटों के बीच हिंसक टकराव में 35 लाख से अधिक लोग देश की सीमाओं के भीतर विस्थापित हुए हैं.
सहायता अभियान शुरू
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की प्रवक्ता डॉक्टर मार्गरेट हैरिस ने बताया कि राहत प्रयासों के लिए म्याँमार और थाईलैंड में देशीय टीम के साथ समन्वय स्थापित किया गया है.
यूएन एजेंसी ने सहायता अभियान संचालन के लिए दुबई में अपने ‘लॉजिस्टिक हब’ को सक्रिय कर दिया है, जिसके ज़रिये स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुरूप चिकित्सा मदद प्रदान की जाएगी.
शरणार्थी मामलों के लिए यूएन एजेंसी (UNHCR) प्रवक्ता बाबर बलोच के अनुसार, म्याँमार के केन्द्रीय व पश्चिमोत्तर इलाक़ों में सबसे अधिक संख्या में हिंसक टकराव की वजह से विस्थापन का शिकार हुए लोग रहते हैं.
क़रीब 35 लाख आन्तरिक विस्थापितों में से 16 लाख इन इलाक़ों में रहते हैं और इस आपदा के कारण उनके लिए मुश्किलें और बढ़ने की आशंका है.