डीआर काँगो: हिंसा व विस्थापन के साए में, खाद्य असुरक्षा पहुँची रिकॉर्ड स्तर पर
वैश्विक खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों ने चिन्ता जताई है कि काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) में हिंसक टकराव, विस्थापन और ऊँची खाद्य क़ीमतों की वजह से 2.77 करोड़ लोगों को भरपेट भोजन नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनके पोषण, स्वास्थ्य व जीवन के लिए जोखिम उत्पन्न हो रहा है.
यूएन की साझेदारी में विश्व भर में खाद्य सुरक्षा पर नज़र रखने वाले प्लैटफ़ॉर्म (Integrated Food Security Phase Classification (IPC) के अनुसार, डीआरसी में मौजूदा हालात दुनिया के सबसे गम्भीर खाद्य संकटों में से एक के रूप में आकार ले रहे हैं.
दक्षिणी अफ़्रीका क्षेत्र के लिए विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के निदेशक ऐरिक पर्डीसन ने कहा कि मानवीय हालात चिन्ताजनक रफ़्तार से बिगड़ रहे हैं. जिन परिवारों के लिए अपना भरण-पोषण करना पहले ही संघर्षपूर्ण था, उन्हें अब और कटु वास्तविकता का सामना करना पड़ कर रहा है.
IPC के ज़रिए किसी देश या क्षेत्र में भूख सम्बन्धी स्थिति की निगरानी की जाती है और उसे पाँच वर्गों में विभाजित किया जाता है:
- पहला चरण, जहाँ खाद्य सुरक्षा पर कोई दबाव ना हो
- दूसरा चरण, जब लोगों को भोजन की तलाश में कठिनाई झेलनी पड़ रही हो
- तीसरा चरण, यह खाद्य संकट की एक स्थिति है
- चौथा चरण, आपात स्थिति
- पाँचवा चरण, विनाशकारी हालात या अकाल
डीआरसी में नवीनतम आकलन के अनुसार, 39 लाख लोग आपात स्तर की खाद्य असुरक्षा (चरण 4) का सामना कर रहे हैं, जबकि 2.38 करोड़ लोग तीसरे चरण के खाद्य संकट की चपेट में हैं.
पूर्वी हिस्से में उथलपुथल
खनिज सम्पदा से परिपूर्ण डीआरसी, पिछले कई दशकों से संकट में सुलग रहा है, जहाँ मानवीय सहायता अभियान के लिए धनराशि की उपलब्धता चुनौतीपूर्ण रही है.
डीआरसी के पूर्वी हिस्से, नॉर्थ कीवू व साउथ कीवू हिंसक टकराव से प्रभावित हैं, और स्थानीय परिवार अपने आजीविका के साधनों व मवेशियों से दूर हो गए हैं.
रवांडा-समर्थित एम23 नामक हथियारबन्द गुट ने इन प्रान्तों में स्थित बड़े शहरों, गोमा व बुकावु को इस साल की शुरुआत में अपने क़ब्ज़े में ले लिया था. वहाँ सरकारी सैन्य बलों के साथ लड़ाई जारी है, आर्थिक बदहाली है, जबकि क्षेत्रीय स्तर पर मध्यस्थता प्रयासों के तहत युद्धविराम की शर्तों पर सहमति बनाने की कोशिशें भी हो रही हैं.
खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों का अनुमान है कि पिछले वर्ष दिसम्बर में डीआरसी के पूर्वी हिस्से में हिंसा भड़कने के बाद से अतिरिक्त 25 लाख लोग खाद्य असुरक्षा का शिकार हुए हैं.
विस्थापितों के लिए चुनौतीपूर्ण हालात
विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) और खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के साझा वक्तव्य के अनुसार, हिंसा से बचने के भाग रहे, आन्तरिक तौर पर विस्थापित लोग इस खाद्य संकट से सर्वाधिक प्रभावित हैं.
बताया गया है कि नॉर्थ कीवू प्रान्त, विशेष रूप से गोमा में आन्तरिक विस्थापितों के लिए बनाए गए शिविर अब पूरी तरह से खाली हो गए हैं.
डीआरसी में 78 लाख से अधिक विस्थापित हैं, जिनमें से अधिकाँश पूर्वी क्षेत्र में अपने मेज़बान परिवारों के साथ रह रहे हैं.
यूएन खाद्य कार्यक्रम ने नॉर्थ व साउथ कीवू के कुछ हिस्सों में अपने सहायता प्रयासों को शुरू किया है, मगर उन्हें तत्काल अधिक संसाधनों की आवश्यकता है. वहीं, झड़पों की वजह से खाद्य उत्पादन में व्यवधान आ रहा है, ज़रूरतमन्दों तक पहुँचने के लिए सीमित मार्ग हैं और सुरक्षा जोखिमों की वजह से मानवीय राहत प्रयासों पर असर हुआ है.
WFP ने डीआरसी में 64 लाख ज़रूरतमन्दों तक खाद्य व पोषण सहायता पहुँचाने और दीर्घकालिक समाधान ढूंढने के इरादे से अगले छह महीनों के लिए 39.9 करोड़ डॉलर की अपील की है.