क्या जलवायु विज्ञान, नवीकरणीय ऊर्जा के लिए अगला ऊर्जा स्रोत है?
ऐसे में जबकि सौर, वायु और जल आधारित बिजली उत्पादन का विस्तार हो रहा है तो, वैज्ञानिकों का कहना है कि नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों को और अधिक मज़बूत बनाने के लिए, पूर्वानुमानों और जलवायु डेटा को एकीकृत करना एक अहम कुंजी है.
नवीकरणीय ऊर्जा की ओर दौड़ तेज़ हो रही है. और जलवायु संकट की बढ़ती चुनौतियों के बावजूद, प्रगति के संकेत हैं: रेगिस्तानों में, सौर पैनलों की क़तारे नज़र आने लगी हैं, तटों पर पवन टरबाइन दिखाई देते हैं, और शक्तिशाली नदियों से स्वच्छ ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए जलविद्युत बाँधों का उपयोग किया जा रहा है. और यह सब जीवाश्म ईंधन से होने वाले कार्बन उत्सर्जन के बिना ही हो रहा है, जोकि वैश्विक तापमान का सबसे बड़ा एकल कारक है.
दरअसल, अन्तरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (IRENA) के नए आँकड़े दिखाते हैं कि वैश्विक स्तर पर नवीकरणीय क्षमता में वर्ष 2024 में रिकॉर्ड 585 गीगावाट की वृद्धि हुई, जोकि दो दशकों में सबसे तीव्र वार्षिक वृद्धि थी.
हालाँकि, किफ़ायती प्रौद्योगिकी और कार्बन उत्सर्जन घटाने की तत्काल आवश्यकता से प्रेरित नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बदलाव के प्रयासों में गति आई है, लेकिन विशेषज्ञों ने कुछ चेतावनियाँ दी हैं: चूँकि नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत, मौसम की स्थितियों पर निर्भर करते हैं, जलवायु परिवर्तन के कारण नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को प्रभावित करते हैं और कई बार ख़तरे में भी डाल देते हैं.
यह रुझान 2023 में अधिक स्पष्ट होकर उभरा. उस वर्ष वैश्विक स्तर पर नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के समक्ष अनगिनत बाधाएँ आईं. तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से ऊपर, 1.45°C पर पहुँच गया, और ला नीना से एल नीनो में बदलाव ने वर्षा, हवा के रुझान व सौर विकिरण को बदल दिया.
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के जलवायु और ऊर्जा विशेषज्ञ हामिद बस्तानी ने इस प्रभाव को स्पष्ट करने के लिए एक उदाहरण देते हुए यूएन न्यूज़ के साथ एक साक्षात्कार में बताया, "सूडान और नामीबिया में असामान्य रूप से कम वर्षा के कारण, जलविद्युत उत्पादन में 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है."
सूडान में, 2023 में केवल 100 मिलीमीटर (चार इंच से कम) वर्षा हुई – जोकि राष्ट्रीय दीर्घकालिक औसत के मुक़ाबले आधे से भी कम थी.
हामिद बस्तानी ने समझाया, "यह एक ऐसा देश है जहाँ ऊर्जा आपूर्ति में जलविद्युत बिजली का हिस्सा लगभग 60 प्रतिशत है. ये कमी महत्वपूर्ण परिणामों की संकेत मानी जा सकती है." उन्होंने बताया कि इस बिजली प्रणाली से, लगभग 4.8 करोड़ की आबादी को विद्युत आपूर्ति की जाती है और यह संख्या तेज़ी से बढ़ रही है.
बदलावों का दायरा व्यापक
ये बदलाव केवल जलविद्युत तक ही सीमित नहीं हैं. बदलती जलवायु परिस्थितियों में पवन ऊर्जा में भी तनाव के संकेत मिले.
चीन में वैश्विक ऑनशोर पवन क्षमता का हिस्सा 40 प्रतिशत है. लेकिन पवन विचलन से उत्पादन में बाधा पहुँचने के कारण 2023 में इसमें केवल 4 से 8 प्रतिशत की मामूली वृद्धि हुई.
भारत में भी, कमज़ोर मानसून हवाओं के कारण उत्पादन घटा, जबकि अफ़्रीका के कुछ क्षेत्रों में तेज़ नुक़सान से, पवन ऊर्जा उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत तक की गिरावट आई.
दूसरी ओर, दक्षिण अमेरिका में पैमाना दूसरी दिशा में झुकता नज़र आया. साफ़ आसमान और सौर विकिरण में वृद्धि से, ख़ासतौर पर ब्राज़ील, कोलम्बिया और बोलीविया जैसे देशों में सौर पैनलों का प्रदर्शन बेहतर रहा.
इस क्षेत्र में सौर उत्पादन में चार से छह प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जोकि एक जलवायु-जनित उछाल थी. इससे लगभग तीन टेरावॉट प्रति घंटे की अतिरिक्त बिजली का उत्पादन हुआ. अगर वहाँ की औसत उपभोग दरों की बात करें, तो यह बिजली एक वर्ष के लिए 20 लाख से अधिक घरों को ऊर्जा प्रदान करने के लिए पर्याप्त होगी.
अतीत में WMO के जलवायु एवं ऊर्जा कार्यों का नेतृत्व करने वाली, WMO के न्यूयॉर्क कार्यालय की वर्तमान प्रमुख रॉबर्टा बोस्कोलो ने समझाया, “यह इसका एक अच्छा उदाहरण है कि जलवायु परिवर्तनशीलता कभी-कभार किस प्रकार नए अवसर पैदा कर सकती है. योरोप में भी उच्च सौर विकिरण के दिन बढ़े हैं, जिसका अर्थ है कि समय के साथ सौर ऊर्जा की कुशलता बढ़ती जा रही है."
रॉबर्टा बोस्कोलो और हामिद बस्तानी ने हाल ही में WMO–IRENA द्वारा किए गए अध्ययन में योगदान किया है. इस अध्ययन में 2023 में जलवायु की स्थिति पर एल नीनो, वैश्विक तापमान वृद्धि और क्षेत्रीय चरम मौसम घटनाओं के प्रभाव तथा उससे दुनिया भर में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन एवं ऊर्जा माँग के असर को मापा गया है.
एक अस्थिर विश्व में, स्थिरता प्रणाली
रॉबर्टा बोस्कोलो ने जलवायु विज्ञान और ऊर्जा नीति के विषयों पर वर्षों तक काम किया है. वह अपने अनुभव से, नवीकरणीय ऊर्जा बुनियादी ढाँचे की कमज़ोरी की नब्ज़ तुरन्त पकड़ लेती हैं. बाँध, सौर ऊर्जा मैदान और पवन टरबाइन, सभी पिछले जलवायु रुझानों के आधार पर बनाए जाते हैं, जिससे वो बदलते जलवायु के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं.
जलविद्युत ऊर्जा की बात करें तो, बाँध, अनुमानित मौसमी जल प्रवाह पर निर्भर करते हैं, जो अक्सर बर्फ़ के पिघलने या ग्लेशियर के पानी से आता है. उन्होंने कहा, “हिमनद के पिघलने से जलविद्युत में अल्पकालिक वृद्धि होगी. लेकिन जब वो हिमनद ख़त्म हो जाएँगे, तो यह पानी भी उपलब्ध नहीं होगा और कम से कम मानव जाति के जीवन काल में तो इस स्थिति को उलटना मुश्किल होगा."
यह रुझान पहले से ही एंडीज़ और हिमालय जैसे क्षेत्रों में विकसित हो रहा है. यदि पिघलने वाला जल ग़ायब हो जाता है, तो देशों को ऊर्जा उत्पादन के तरीक़े बदलने होंगे या लम्बी अवधि में ऊर्जा घाटे का सामना करना होगा.
उदाहरण के लिए, हाल ही में प्रकाशित, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की एक रिपोर्ट में कहा गया कि बढ़ते समुद्री स्तर और मज़बूत तूफ़ानों से, ऊर्जा उत्पादन सुविधाओं के लिए जोखिम बढ़ रहा है, जिसमें तटों के पास स्थित सौर ऊर्जा उत्पादन स्थल भी शामिल हैं.
इसी तरह, जंगलों में बारम्बार लगती तीव्र आग से भी बिजली की लाइनें नष्ट हो सकती हैं और पूरे क्षेत्रों में अन्धेरा छा सकता है. वहीं चरम गर्मी से, सौर पैनलों की दक्षता घट सकती है, जिससे ठंडक की माँग बढ़ने पर ग्रिड के बुनियादी ढाँचे पर दबाव पड़ सकता है.
परिवर्तनशील जलवायु से परमाणु ऊर्जा संयंत्र भी जोखिम में हैं.
रॉबर्टा बोस्कोलो का कहना है, "हमने देखा है कि ठंडक या पानी के अभाव में, परमाणु ऊर्जा संयंत्र ठीक से काम नहीं कर पाते हैं. फिर जैसे ही ताप लहरें बढ़ती हैं और नदी का स्तर गिरता है, कुछ पुरानी परमाणु सुविधाएँ अपनी वर्तमान जगहों से ठीक से तालमेल नहीं बना पातीं.”
"यह एक और मुद्दा है जिसे भविष्य में अलग तरीक़े से देखा जाना चाहिए. जब हम ऊर्जा उत्पादन बुनियादी ढाँचे का निर्माण करते हैं, तो अतीत की जलवायु के बारे में नहीं, बल्कि भावी जलवायु के बारे में सोचना बहुत ज़रूरी होता है."
2023 में वैश्विक नवीकरणीय बिजली क्षमता में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई. यह दो दशकों की सबसे बड़ी वार्षिक वृद्धि थी, जिसमें अधिकाँश बढ़ोत्तरी सौर व पवन ऊर्जा से हुई.
डेटा, एआई और प्रौद्योगिकी के ज़रिए अनुकूलन
रॉबर्टा बोस्कोलो ने बल देकर कहा कि एक बात निश्चित है: हमारा ग्रह एक ऐसे भविष्य की ओर बढ़ रहा है जिसमें ख़ासतौर पर नवीकरणीय स्रोतों से उत्पन्न ऊर्जा की प्रधानता रहेगी.
"हमारा परिवहन इलैक्ट्रिक होगा; हमारा भोजन पकाना इलैक्ट्रिक तरीक़े से होगा; हमारे घरों और इमारतों में तापन बिजली से होगा. इसलिए, अगर हमारे पास एक विश्वसनीय बिजली प्रणाली नहीं है, तो सब कुछ ध्वस्त हो जाएगा. हमें अपनी ऊर्जा प्रणालियों को बदलने और भविष्य में हमारी ऊर्जा प्रणाली की विश्वसनीयता एवं सहनसक्षमता के बारे में सोचने के लिए जलवायु से जुड़ी जानकारी की आवश्यकता होगी."
दोनों विशेषज्ञों ने ही, अनुकूलन के लिए जलवायु बुद्धिमत्ता को अपनाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया – यानि नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बदलाव की योजनाओं के हर स्तर पर जलवायु पूर्वानुमान, डेटा और विज्ञान का एकीकरण.
हामिद बस्तानी समझाते हुए कहते हैं, "अतीत में, ऊर्जा योजनाकार पूर्व वर्षों के औसत अनुमानों पर काम करते थे. लेकिन अतीत अब एक विश्वसनीय मार्गदर्शक नहीं है. हमें यह जानने की ज़रूरत है कि अगले मौसम में हवा किस ओर रुख़ करेगी, अगले साल कितनी वर्षा होगी - न कि केवल यह कि यह एक दशक पहले कैसी होती थी."
हामिद बस्तानी ने कहा, "अब हमारे पास कुछ सेकंड से लेकर कई महीनों तक का पूर्वानुमान उपलब्ध है. इनमें से प्रत्येक का, तात्कालिक ग्रिड सन्तुलन से लेकर दीर्घकालिक निवेश निर्णयों तक में, एक विशिष्ट उपयोग सम्भव है."
वास्तव में, जलवायु-कुशल नवीकरणीय योजना का वादा और चुनौती, वैश्विक दक्षिण में सबसे अधिक स्पष्ट है. उदाहरण के लिए, अफ़्रीका में सर्वश्रेष्ठ सौर सम्भावनाएँ नज़र आती हैं, लेकिन इसके बावजूद इस महाद्वीप पर दुनिया की नवीकरणीय क्षमता का केवल दो प्रतिशत हिस्सा ही स्थापित है.
इस अन्तर की क्या वजह है? रॉबर्टों बोस्कोलो ने आँकड़ों और निवेश की कमी की ओर इशारा किया.
उन्होंने कहा, "वैश्विक दक्षिण के कई हिस्सों में, ऊर्जा परियोजनाएँ स्थापित करने के लिए सटीक पूर्वानुमान या पर्याप्त अवलोकन आँकड़े उपलब्ध नहीं हैं. निवेशकों को विश्वसनीय दीर्घकालिक अनुमान दिखाने होते हैं. इसके बिना, जोखिम अधिक होता है."
WMO अविकसित क्षेत्रों में मौसम और ऊर्जा निगरानी में सुधार की दिशा में काम कर रहा है, लेकिन प्रगति असमान है. एजेंसी स्थानीय डेटा नैटवर्क, सीमापार स्थित ऊर्जा योजनाओं और क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुसार तैयार की गई जलवायु सेवाओं के लिए अधिक वित्तपोषण का आहवान कर रही है.
रॉबर्टो बोस्कोलो कहती हैं, "यह केवल जलवायु शमन के बारे में नहीं है. यह विकास का एक अवसर है. अगर प्रणालियों को सही तरीक़े से तैयार किया जाए, तो नवीकरणीय ऊर्जा समुदायों को बिजली प्रदान कर सकती है, औद्योगिक विकास को बढ़ावा दे सकती है, और रोज़गार उत्पन्न कर सकती है."
हामिद बस्तानी, ऊर्जा कम्पनियों व जलवायु वैज्ञानिकों के बीच वैश्विक डेटा साझा करने पर बल देते हैं.
"निजी क्षेत्र द्वारा इकट्ठा किए गए डेटा में एक बड़ी सम्भावना है, जिस पर अभी ध्यान नहीं दिया गया है. सौर, पवन, जल विद्युत, यहाँ तक कि परमाणु बिजली संयंत्रों में ऐतिहासिक और वास्तविक समय के अवलोकनों को एकीकृत करके, मौसम एवं जलवायु मॉडल में काफ़ी सुधार किया जा सकता है. यह सभी के लिए लाभप्रद होगा."
अनुकूलन के लिए ऊर्जा विविधीकरण
एक अन्य महत्वपूर्ण कार्रवाई, जो निकट भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा की गारंटी देती है, वो है विविधीकरण. हामिद बस्तानी के अनुसार, केवल एक नवीकरणीय स्रोत पर बहुत अधिक निर्भरता से, देशों पर मौसमी या दीर्घकालिक जलवायु परिवर्तनों का बड़ा प्रभाव पड़ेगा.
हामिद बस्तानी ने बताया, "एक ऐसा विविध ऊर्जा मिश्रण आवश्यक है, जिसमें सौर, पवन, जल, बैटरी भंडारण और यहाँ तक कि कम-कार्बन स्रोत (जैसे भू-तापीय) शामिल हों, ख़ासतौर पर तब, जब चरम मौसम की घटनाएँ बारम्बार हो रही हों."
भविष्य की दिशा
जैसे-जैसे दुनिया नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित भविष्य की ओर दौड़ रही है, जलवायु परिवर्तन द्वारा प्रस्तुत चुनौतियों का समाधान करना अनिवार्य हो गया है. 2023 में अनुभव किए गए अस्थिर मौसम रुझान, अप्रत्याशित मौसमी बदलावों का सामना करने में सक्षम जलवायु-कुशल योजना तथा पुख़्ता बुनियादी ढाँचे की आवश्यकता पर ज़ोर देते हैं.
वास्तव में नवीकरणीय ऊर्जा द्वारा बेहतरी का वादा पूरा करने के लिए, दुनिया को न केवल क्षमता का विस्तार करने में, बल्कि एक ऐसी प्रणाली बनाने में भी निवेश करना होगा जो सहनसक्षम, अनुकूलनीय एवं वर्तमान में उपलब्ध सर्वोत्तम जलवायु विज्ञान पर आधारित हो.
WMO के विशेषज्ञ, हामिद बस्तानी और रॉबर्टा बोस्कोलो, विश्वसनीयता और सहनसक्षमता सुनिश्चित करने के लिए, ऊर्जा प्रणालियों में जलवायु बुद्धिमत्ता को एकीकृत करने के महत्व पर ज़ोर देते हैं. उन्नत पूर्वानुमान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का लाभ उठाकर, बेहतर ढंग से इन बदलावों की भविष्यवाणी व अनुकूलन किया जा सकता है और अपना भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है.
ऊर्जा का भविष्य न केवल अधिक पवन टरबाइन और सौर पैनल बनाने पर टिका है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि क्या वो उन चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हैं, जिनके शमन के लिए उसका निर्माण हुआ है.