ग़ाज़ा में मानवीय सहायता पर इसराइली पाबन्दी, 'सामूहिक दंड', लज़ारिनी
फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए यूएन सहायता एजेंसी – UNRWA के मुखिया फ़िलिपे लज़ारिनी ने कहा है कि इसराइल द्वारा ग़ाज़ा में मानवीय सहायता दाख़िल नहीं होने देना एक अत्यन्त गम्भीर भूख संकट के समान है और “सामूहिक दंड” के बराबर है. उन्होंने कहा है कि ग़ाज़ा की आबादी में अधिकतर बच्चे, महिलाएँ और साधारण लोग हैं.
फ़िलिपे लज़ारिनी ने अपने एक सोशल मीडिया सन्देश में कहा है कि इसराइली अधिकारियों द्वारा ग़ाज़ा में मानवीय सहायता के प्रवेश पर रोक लगाए हुए तीन सप्ताह हो चुके हैं. “ग़ाज़ा में कोई भोजन नहीं है, दवाइयाँ नहीं हैं, पानी नहीं है और ईंधन भी नहीं है.”
उन्होंने कहा कि ग़ाज़ा के लोग जीवित रहने के लिए, इसराइल के रास्ते से आने वाली मानवीय सहायता पर निर्भर हैं.
एजेंसी के प्रमुख ने कहा, “यह नाकाबन्दी, युद्ध के प्रथम चरण के दौरान लागू की गई नाकाबन्दी से भी लम्बी हो चुकी है.”
“मानवीय सहायता की आपूर्ति के बिना, हर दिन गुज़रने के साथ, अधिक से अधिक बच्चों को, भूखे पेट सोना पड़ता है. बीमारियाँ फैल रही हैं, और खाद्य अभाव दिन ब दिन भीषण होता जा रहा है.”
फ़िलिपे लज़ारिनी ने आगाह किया कि हर दिन खाद्य अभाव, ग़ाज़ा को भीषण भूख संकट के और नज़दीक धकेल रहा है.
उन्होंने ग़ाज़ा में नाकाबन्दी को तत्काल हटाए जाने, तमाम बन्धकों को रिहा किए जाने, और मानवीय सहायता व व्यावसायिक सामान की व्यापक और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित किए जाने की पुकार लगाई है.
हताहतों की बढ़ती संख्या
मध्य पूर्व शान्ति प्रक्रिया के लिए संयुक्त राष्ट्र की विशेष समन्वयक सिगरिड काग ने हाल ही में सुरक्षा परिषद में आगाह किया कि इसराइल-फ़लस्तीन संकट, पश्चिमी तट में हताहत हो रहे आम लोगों की बढ़ती संख्या और ग़ाज़ा में मानवीय संकट गहराने के साथ ही, और भी हिंसा की चपेट में धँसता जा रहा है.
संयुक्त राष्ट्र की विशेष समन्वयक सिगरिड काग ने शुक्रवार को सुरक्षा परिषद को प्रस्ताव 2334 (2016) से सम्बन्धित नवीनतम रिपोर्ट के बारे में जानकारी दी, जिसमें इसराइल के क़ब्ज़े वाले फ़लस्तीनी क्षेत्र में, इसराइल द्वारा बसाई जा रही यहूदी बस्तियों से सम्बन्धित गतिविधि को तत्काल रोकने का आहवान किया गया है.
सिगरिड काग ने मानवाधिकारों के निरन्तर उल्लंघन, इसराइल के बढ़ते सैन्य अभियानों और आम लोगों के ख़िलाफ़ बढ़ते हमलों का विवरण दिया, जिनमें फ़लस्तीनी आतंकवादियों और इसराइली बलों दोनों तरफ़ से घातक हमले शामिल हैं.
ग़ाज़ा पट्टी के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 7 दिसंबर 2024 और इस वर्ष 13 मार्च के बीच, ग़ाज़ा में कम से कम 3 हज़ार 897 फ़लस्तीनी लोग मारे गए और इसराइली स्रोतों के अनुसार, 59 इसराइली बन्धक अब भी हमास और अन्य समूहों की हिरासत में हैं.
इसराइल द्वारा क़ाबिज़ पश्चिमी तट में, इसी अवधि के दौरान इसराइली सैन्य हमलों के कारण 123 फ़लस्तीनी मारे गए हैं, जबकि 10 इसराइली लोग, फ़लस्तीनी हमलों में मारे गए.