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नस्लीय भेदभाव के सभी रूपों के उन्मूलन के लिए, 'साझा दायित्व' को निभाने की पुकार

UN के महासचिव फिलमोन यांग ने न्यूयॉर्क में UN मुख्यालय में नस्लीय भेदभाव उन्मूलन के अंतर्राष्ट्रीय दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित महासभा की बैठक के दौरान एक मंच पर भाषण दिया।
UN Photo/Eskinder Debebe नस्लीय भेदभाव के उन्मूलन पर अन्तरराष्ट्रीय दिवस के अवसर पर यूएन महासभा में कार्यक्रम आयोजित किया गया.

नस्लीय भेदभाव के सभी रूपों के उन्मूलन के लिए, 'साझा दायित्व' को निभाने की पुकार

मानवाधिकार

संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष अधिकारियों ने शुक्रवार, 21 मार्च, को ‘नस्लीय भेदभाव के उन्मूलन के लिए अन्तरराष्ट्रीय दिवस’ पर विश्व समुदाय से आग्रह किया है कि नस्लभेद के सभी रूपों से निपटने के साझा दायित्व को निभाया जाना होगा.

21 मार्च को नस्लीय भेदभाव के सभी रूपों के उन्मूलन पर लक्षित एक अन्तरराष्ट्रीय कन्वेंशन को पारित किया गया था. साथ ही, इस दिवस पर 1960 में दक्षिण अफ़्रीका के शार्पविल में रंगभेद के विरुद्ध शान्तिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पुलिस गोलीबारी में मारे गए 69 लोगों के प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है.

यूएन के शीर्षतम अधिकारी एंतोनियो गुटेरेश ने इस दिवस पर जारी अपने एक सन्देश में कहा कि दशकों की प्रगति के बावजूद, नस्लवाद अब भी एक ख़तरा है.

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“नस्लवाद का विष अब भी हमारी दुनिया को संक्रमित कर रहा है – ऐतिहासिक दासकरण (enslavement), औपनिवेशवाद और भेदभाव की एक विषाक्त विरासत.” इससे समुदाय भ्रष्ट, अवसर अवरुदद्ध और ज़िन्दगियाँ बर्बाद होती हैं, और गरिमा, समानता व न्याय की हर बुनियाद का क्षरण होता है.

महासचिव गुटेरेश ने नस्लीय भेदभाव के उन्मूलन पर केन्द्रित अन्तरराष्ट्रीय कन्वेंशन को एक शक्तिशाली, वैश्विक संकल्प क़रार दिया.

उन्होंने इस कन्वेंशन पर सार्वभौमिक मुहर लगाए जाने और इसके लक्ष्यों को वास्तविकता में तब्दील किए जाने का आग्रह किया. यूएन प्रमुख ने व्यवसाय जगत के नेताओं, नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और आम नागरिकों से नस्लभेद के विरुद्ध एक कड़ा रुख़ अपनाने की अपील की.

“यह हमारा साझा दायित्व है.”

कथनी को करनी में बदलना

यूएन महासभा के अध्यक्ष फ़िलेमॉन यैंग ने न्यूयॉर्क मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि यह कन्वेंशन एक क़ानूनी उपाय है और अब उसके उद्देश्यों के अनुरूप क़दम उठाए जाने होंगे.

“महत्वाकाँक्षा को अमल में लाया जाना होगा... आइए हम यह सुनिश्चित करें कि गरिमा, समानता और न्याय केवल अस्पष्ट आकाँक्षाएँ ना रहें बल्कि ठोस वास्तविकता बन जाएं.”

“हम सभी को नस्लवाद के विरुद्ध खड़े होना होगा और एक ऐसी दुनिया का निर्माण करना होगा, जहाँ समानता का केवल वादा ही ना हो, बल्कि हर जगह, हर एक के लिए इसका पालन भी किया जाए.”

महासभा प्रमुख ने युवाओं के सशक्तिकरण पर बल देते हुए कहा कि उन्हें न केवल भेदभाव से बचाए जाने की ज़रूरत है, बल्कि युवजन को बदलाव का वाहक भी बनाना होगा.

मानवाधिकारों के लिए सहायक महासचिव इल्ज़े ब्रैंड्स केहरिस ने विदेशियों के प्रति नापसंदगी व भय, नफ़रत भरी बोली व सन्देश और विभाजनकारी बयानबाज़ी के प्रति आगाह किया.

उन्होंने ध्यान दिलाया कि नस्लवाद हमारी सभी संस्थाओं, सामाजिक ढाँचों और सभी समाजों के दैनिक जीवन में उपस्थित है, जिसे जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए शिक्षा की शक्ति का सहारा लिया जाना होगा.