यूक्रेन: बमबारी से बचने के लिए सुरक्षित स्थान पर शरण, बच्चों के लिए आम जीवन का हिस्सा
संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि यूक्रेन में हवाई हमलों से बचने की चेतावनी देने वाले सायरन अब अनेक बच्चों के लिए स्कूली जीवन का एक नियमित हिस्सा हो गए हैं.
तीन वर्ष पहले, रूसी सैन्य बलों द्वारा पूर्ण स्तर पर यूक्रेन पर आक्रमण किया गया था, जिसमें अब तक हज़ारों लोग हताहत हो चुके हैं और बड़े पैमाने पर बुनियादी प्रतिष्ठानों को नुक़सान पहुँचा है.
यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष के अन्त तक, 1,614 यूक्रेनी स्कूलों पर हमला होने की घटनाएँ दर्ज की गई हैं.
हिंसक टकराव और हमलों की वजह से बच्चों की शिक्षा को ठेस पहुँची है, उनके भावी शिक्षा अवसरों पर गहरा असर हुआ है, और इससे भविष्य में उनकी रोज़गार क्षमता प्रभावित होने की आशंका है.
रूस ने अन्तरराष्ट्रीय क़ानून की अवहेलना करते हुए यूक्रेन के चार क्षेत्रों का हरण (annexation) किया है और वहाँ रहने वाले बच्चों पर, रूसी स्कूलों का पाठ्यक्रम थोपा गया है.
प्रोपेगेंडा प्रयास
यूएन कार्यालय प्रवक्ता लिज़ थ्रोसेल ने शुक्रवार को जिनीवा में पत्रकारों को बताया कि सैन्य-देशभक्ति प्रशिक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है और बच्चों को युद्ध दुष्प्रचार से प्रभावित किया जा रहा है.
बच्चों को यूक्रेनी भाषा में शिक्षा हासिल करने से पूरी तरह रोका गया है और उन्हें जबरन रूसी नागरिकता दिए जाने की भी जानकारी मिली है.
रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन के बच्चों पर यह असर केवल कक्षाओं तक ही सीमित नहीं है. फ़रवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 669 बच्चों की जान गई है, 1,833 घायल हुए हैं. हताहतों का वास्तविक आँकड़ा इससे कहीं अधिक होने की आशंका है.
लाखों बच्चे अब भी देश की सीमाओं के भीतर विस्थापित हैं, जबकि 20 लाख बच्चे अन्य देशों में शरणार्थी के तौर पर रह रहे हैं. इनमें से अनेक बच्चे अपने अभिभावकों से अलग हो गए हैं.
मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने कहा कि जीवन के हर पहलु में उनके अधिकार कमज़ोर हुए हैं, उन पर गहरे घाव हैं, शारीरिक व मनोसामाजिक.
OHCHR ने पुष्टि की है कि कम से कम 200 बच्चों को रूस या पूर्वी यूक्रेन के क़ाबिज़ इलाक़ों में भेजा गया है. इस कृत्य को युद्ध अपराध की श्रेणी में रखा जा सकता है. मगर, उन बच्चों तक पहुँच ना हो पाने की वजह से ऐसे मामलों की उपयुक्त समीक्षा सम्भव नहीं है.
युद्धकाल के अनुभव
मानवाधिकार मामलों के प्रमुख वोल्कर टर्क ने बताया कि यह स्पष्ट है कि युद्ध की छाया में यूक्रेनी बच्चों को अनेक प्रकार के अनुभवों का सामना करना पड़ रहा है, और इन सभी का गम्भीर असर होता है.
कुछ योरोपीय देशों में शरणार्थी के तौर पर इन्हें महसूस कर रहे हैं, जबकि अन्य प्रत्यक्ष रूप से पीड़ा भोग रहे हैं और निरन्तर बमबारी के ख़तरे को झेल रहे हैं. अनेक बच्चों को क़ाबिज़ इलाक़ों में रूस के कठोर क़ानूनों व नीतियों का सामना करना पड़ रहा है.
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि मानवाधिकारों की अवहेलना के इन मामलों से निपटना, यूक्रेन के लिए एक ऐसे भविष्य को सुनिश्चित करने के इरादे से ज़रूरी है, जहाँ बच्चे अपने अधिकारों, पहचान, सुरक्षा को हासिल कर सकें और युद्ध व क़ब्ज़े के नतीजों से मुक्त हों.