सुरक्षा परिषद: ग़ाज़ा पट्टी से सभी बन्धकों को घर वापिस लाए जाने का आग्रह
राजनैतिक मामलों के लिए संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ख़ालेद ख़िएरी ने गुरूवार को सुरक्षा परिषद में सदस्य देशों को ग़ाज़ा पट्टी में हालात से अवगत कराते हुए, इसराइल व हमास से युद्धविराम फिर बहाल करने और सभी शेष बन्धकों को रिहा किए जाने की अपील की है. ग़ाज़ा में हमास की क़ैद में बन्धक के रूप में क़रीब 500 दिन गुज़ारने के बाद रिहा हुए एक इसराइली नागरिक ने भी परिषद की बैठक के दौरान अपनी व्यथा को साझा किया है.
मध्य पूर्व, एशिया व प्रशान्त क्षेत्र के लिए यूएन सहायक महासचिव ख़ालेद ख़िएरी ने 7 अक्टूबर 2023 को हमास व अन्य फ़लस्तीनी हथियारबन्द गुटों द्वारा इसराइली समुदायों पर किए गए भयावह हमलों की कठोर निन्दा की.
इन हमलों में 1,200 इसराइलियों की जान गई थी और 250 से अधिक को बन्धक बना लिया गया था. कम से कम 59 व्यक्ति अब भी ग़ाज़ा में हमास व अन्य हथियारबन्द गुटों की हिरासत में है.
ख़ालेद ख़िएरी ने कहा कि इरादतन की गई इन हत्याओं, यातना, यौन हिंसा व विध्वंस को किसी भी तरह से न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता है. पूरे परिवारों की हत्या कर दी गई, उनके घरों को जलाया गया और बन्धक बना लिया गया.
“उस भयावह दिन की घटनाओं को भुलाया नहीं जाएगा.”
फिर भड़का हिंसक टकराव
सहायक महासचिव ने ग़ाज़ा में दो महीनों से जारी युद्धविराम और बन्धको के दरकने और उसके बाद से वहाँ भड़के हिंसक टकराव और निरन्तर बिगड़ती स्थिति पर सदस्य देशों के प्रतिनिधियों को जानकारी दी.
इसराइली हवाई हमलों में महिलाओं व बच्चों समेत सैकड़ों फ़लस्तीनियों की जान गई है और पिछले तीन दिनों में संयुक्त राष्ट्र के छह कर्मचारी भी मारे गए हैं.
उन्होंने युद्धविराम की ओर तुरन्त लौटने की अपील करते हुए कहा कि हर दिन बीतने के साथ, हम बन्धकों को सुरक्षापूर्वक उनके घर वापिस पहुँचाने के उद्देश्य से दूर होते जा रहे हैं.
कुछ ही दिन पहले आपात राहत समन्वयक टॉम फ़्लैचर ने सुरक्षा परिषद को सम्बोधित करते हुए कहा कि युद्धविराम को नए सिरे से लागू किया जाना, ग़ाज़ा, क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े और इसराइल में आम नागरिकों की रक्षा का सर्वोत्तम उपाय है. साथ ही, बन्धकों व बन्दियों की रिहाई और मानवीय सहायता व व्यवसायों के लिए सामान की आपूर्ति अहम है.
पूर्व बन्धक की व्यथा: ‘मैं नर्क से वापिस लौटा हूँ’
हमास की क़ैद में 491 दिन गुज़ारने वाले इसराइली नागरिक ऐली शाराबी ने भी सुरक्षा परिषद के समक्ष अपनी व्यथा को साझा किया.
उन्हें 7 अक्टूबर 2023 को उनके घर से बन्धक के तौर पर ग़ाज़ा ले जाया गया था, जिसके बाद उन्हें भूमिगत स्थल पर बेड़ियों से बांधकर रखा गया. उन्हें भूखा रहना पड़ा और मनोसामाजिक व शारीरिक दुर्व्यवहार का शिकार बनाया गया.
ऐली शाराबी ने प्रतिनिधियों को बताया कि वह नर्क से वापिस लौट कर आए हैं.
“मैंने, 491 दिनों के लिए, उम्मीद का दामन थामे रखा. मैंने उस जीवन की फिर कल्पना की है, जिसका हम फिर निर्माण करेंगे. मैंने अपने परिवार को फिर से देखने का सपना देखा.”
मगर, पिछले महीने ग़ाज़ा से रिहा होने के बाद उन्हें पता चला कि हमास ने 7 अक्टूबर 2023 को ही उनकी पत्नी व दो बेटियों की हत्या कर दी थी.
भोजन के लिए याचना
ऐली शाराबी ने सुरक्षा परिषद में अपने भाई योस्सी का भी ज़िक्र किया, जिन्हें बन्धक बनाने के बाद जान से मार दिया गया था.
उन्होंने बताया कि बन्धकों को क़ैद में भोजन, मेडिकल देखभाल और बुनियादी साफ़-सफ़ाई से वंचित रखा जाता था. “हमें खाने के लिए मिन्नतें करनी पड़ी, बाथरूम जाने के लिए भीख मांगनी पड़ती थी. ये भीख ही हमारा अस्तित्व था.”
ऐली शाराबी को 8 फ़रवरी को रिहा किया गया था, और उसके बाद से उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीयर स्टार्मर से मुलाक़ात की है और बन्धकों की व्यथा बयाँ करते हुए उनकी रिहाई की अपील की.
“अब, मैं यहाँ संयुक्त राष्ट्र में आपके समक्ष यह कहने के लिए हूँ कि आप उन सभी को वापिस ले आइए. कोई और बहाना नहीं, कोई और देरी नहीं. यदि आप मानवता के लिए खड़े हैं, तो साबित कीजिए. उन सभी को घर ले आइए.”