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मानवाधिकार परिषद: ईरान, सीरिया में मानवाधिकारों की स्थिति पर रिपोर्ट पेश

6 जून 2017 को जिनेवा में मानवाधिकार परिषद के 35वें सत्र में भाग लेने वाले प्रतिभागियों का सामान्य दृश्य।
UN Photo/Jean-Marc Ferré मानवाधिकार परिषद का एक दृश्य. (फ़ाइल)

मानवाधिकार परिषद: ईरान, सीरिया में मानवाधिकारों की स्थिति पर रिपोर्ट पेश

मानवाधिकार

संयुक्त राष्ट्र स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने जिनीवा स्थित मानवाधिकार परिषद के सत्र के दौरान ईरान और सीरिया में मानवाधिकारों की स्थिति पर अपनी रिपोर्ट साझा की है.

मानवाधिकार परिषद द्वारा नियुक्त विशेषज्ञों ने ईरान में बुनियादी अधिकारों के हनन के गम्भीर मामलों का उल्लेख किया, जिन्हें सितम्बर 2022 में एक महिला महसा अमीनी की मौत के बाद भड़के विरोध प्रदर्शनों के बाद अंजाम दिया गया था.

महसा अमीनी की, तथाकथित नैतिक पुलिस की हिरासत में  मौत हो जाने के बाद हुए प्रदर्शनों के दौरान, पुलिस ने सैकड़ों लोगों को गोलियों का निशाना बनाया.

ईरान पर तथ्य-खोजी मिशन की प्रमुख सारा होसैन ने मंगलवार को कहा कि शान्तिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के दौरान, धातु के छर्रो वाली गोलियाँ चलाई गईं जिसमें अनेक बच्चों की जान गई और कई घायल हुए.

स्वतंत्र जाँचकर्ताओं की रिपोर्ट के अनुसार, जिन युवाओं को हिरासत में लिया गया, उन्हें यातनाएं दी गईं और कथित रूप से बलात्कार किए जाने की भी घटनाएँ हुई हैं.

मानवाधिकार विशेषज्ञ सारा होसैन ने कहा कि दो वर्षों तक, ईरान ने समानता व न्याय की मांगों को उपयुक्त ढंग से स्वीकार तक नहीं किया है, जिनकी वजह से 2022 में प्रदर्शन भड़के थे.

“प्रदर्शनकारियों, पीड़ितों के परिजन और जीवित बच गए व्यक्तियों, विशेष रूप से महिलाओं व लड़कियों का आपराधिकरण, निगरानी और दमन अब भी जारी हैं, जोकि बेहद चिन्ताजनक है.”

सारा होसैन ने कहा कि ईरान में आज राजसत्ता के नेतृत्व में बुनियादी स्वतंत्रताओं का दमन किया जा रहा है और पीड़ितों व उनके परिजन का उत्पीड़न हो रहा है, उन्हें डराया-धमकाया जा रहा है और उन्हें धमकियाँ दी गई हैं.

तथ्य-खोजी मिशन का हिस्सा शाहीन अली ने बताया कि पीड़ितों के कष्टों का निवारण करना ईरान सरकार का दायित्व है, मगर अनगिनत जीवित बच गए व्यक्तियों ने बताया कि उनका ईरान की न्यायिक प्रणाली से भरोसा उठ गया है कि उन्हें वहाँ सत्य, न्याय या मुआवज़ा मिल पाएगा.

इसके मद्देनज़र, मानवाधिकार विशेषज्ञों ने कहा कि देश के बाहर व्यापक स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रयास जारी रखने होंगे.

ईरान के प्रतिनिधिमंडल ने इस जाँच के निष्कर्षों को पूर्ण रूप से नकार दिया है.

सीरिया: सच्चाई को उभारना होगा

मानवाधिकार परिषद में सीरिया में व्याप्त संकट का मुद्दा भी उठा, जहाँ सीरिया पर जाँच आयोग के प्रमुख पाउलो पिनहेरो ने कहा कि पूर्व असद शासन के दौरान गुमशुदा हुआ हज़ारों लोगों के बारे में जानने के लिए बड़े स्तर पर प्रयास किए जाने होंगे.

पाउलो पिनहेरो ने कहा कि सीरिया में नए कार्यवाहक प्रशासन ने मानवाधिकारों से जुड़े अनेक मुद्दों पर उनके जाँचकर्ताओं के साथ मिलकर काम करने की इच्छा ज़ाहिर की है और वह इसका स्वागत करते हैं.

हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी है कि सीरिया में आर्थिक व मानवीय हालात बेहद ख़राब हैं जबकि मानवीय सहायता उद्देश्यों के लिए धनराशि में गिरावट आ रही है.

जाँच आयोग प्रमुख के अनुसार, देश की जनता में आर्थिक हताशा बढ़ने से हिंसा को ईंधन मिल सकता है और इसलिए सीरिया पर थोपे गए सभी प्रतिबन्धों को वापिस लिया जाना होगा और पुनर्बहाली व पुनर्निर्माण के रास्ते में आने वाले अवरोध हटाए जाने होंगे.

पाउलो पिनहेरो की जाँच टीम ने ऐसे अनेक परिवारों से मुलाक़ात की है, जिनके परिजन पिछले वर्ष दिसम्बर में असद शासन का अचानक पतन होने के बाद रिहा नहीं हो पाए थे. “वे अब ये जानना चाहते हैं कि उनके साथ क्या हुआ, और वे न्याय पाना चाहते हैं.”

उन्होंने कहा कि ऐसे हज़ारों व्यक्तियों के बारे में सही जानकारी जुटाने के लिए विशाल स्तर पर प्रयासों की आवश्यकता है, जिसकी अगुवाई कार्यवाहक प्रशासन द्वारा की जानी होगी.

साथ ही, इन प्रयासों में सीरियाई नागरिक समाज समेत मानवाधिकारों और मानवतावादी संस्थाओं से तकनीकी समर्थन की ज़रूरत होगी. इस प्रक्रिया में जाँच आयोग, वर्ष 2011 के बाद जुटाए गए ज़रूरी डेटा को उपलब्ध कराने, सभी साक्ष्यों को सहेज कर रखने के लिए तत्पर है.