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ग़ाज़ा संकट पर सुरक्षा परिषद की बैठक, इसराइली हमलों को रोकने की पुकारें भी

गाजा पट्टी के जबालिया में एक फिलिस्तीनी परिवार एक ध्वस्त इमारत के सामने खड़ा है, जबकि एक स्वास्थ्यकर्मी एक छोटे बच्चे को पोलियो का टीका लगा रहा है।
© UNICEF/Mohammed Nateel ग़ाज़ा पट्टी के उत्तरी हिस्से में स्थित जबालिया में एक बच्चे को पोलियो से बचाव के लिए टीका दिया जा रहा है.

ग़ाज़ा संकट पर सुरक्षा परिषद की बैठक, इसराइली हमलों को रोकने की पुकारें भी

शान्ति और सुरक्षा

फ़लस्तीनी क्षेत्र ग़ाज़ा में इसराइल के हालिया हमलों के बीच, मध्य पूर्व में की स्थिति पर विचार करने के लिए, सुरक्षा परिषद की एक अहम बैठक हो रही है. ग़ाज़ा में पिछले क़रीब दो महीनों से नाज़ुक हालात में युद्धविराम लागू है. मगर, मंगलवार को हुए इसराइली हमलों में 400 से अधिक लोगों के मारे जाने की ख़बरे हैं. इसराइल ने पिछले लगभग दो सप्ताहों से, ग़ाज़ा में मानवीय सहायता के प्रवेश पर भी रोक लगा रखी थी जिससे ग़ाज़ा में स्थिति बहुत गम्भीर हो गई है.

संयुक्त राष्ट्र में आपात राहत समन्वयक टॉम फ़्लैचर ने सुरक्षा परिषद को सम्बोधित करते हुए कहा कि पिछले 16 दिनों से इसराइली नाकेबन्दी अक्षम्य है और यह अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून का उल्लंघन है. 

उन्होंने कहा कि भोजन, दवाओं और जल की आपूर्ति होने से रोकना पूर्ण रूप से अनुचित है. उन्होंने ग़ाज़ा में एक अस्पताल में एक बोर्ड पर एक डॉक्टर द्वारा लिखे सन्देश का उल्लेख किया, “जो कोई भी यहाँ अन्त तक रहेगा, वो स्थिति को बयाँ करेगा. हम जो कुछ कर सकते थे, हमने किया. हमें याद रखना.” इस डॉक्टर की हिंसा में मौत हो गई थी.

टॉम फ्लेचर ने UN सुरक्षा परिषद के सदस्यों को मध्य पूर्व की स्थिति के बारे में जानकारी दी।
UN Photo अवर महासचिव टॉम फ़्लैचर, सुरक्षा परिषद में सदस्य देशों को क़ाबिज़ पश्चिमी इलाक़े में हालात से अवगत करा रहे हैं.

मानवीय सहायता मामलों में समन्वय के लिए वरिष्ठ यूएन अधिकारी टॉम फ़्लैचर ने 15 सदस्य देशों वाली परिषद में तीन अहम मांगों को सामने रखा है:

पहला, ग़ाज़ा पट्टी में मानवीय सहायता और स्थानीय व्यवसायों के लिए अहम सामान की आपूर्ति की अनुमति दी जानी होगी.

दूसरा, युद्धविराम की अवधि में नए सिरे से विस्तार किया जाना होगा...बीती रात भड़के हिंसक टकराव को रोका जाना होगा.

तीसरा, मानवतावादी उद्देश्यों के लिए वित्तीय संसाधन सुनिश्चित किए जाने होंगे. फ़िलहाल, ग़ाज़ा में कुल आवश्यकताओं के लिए ज़रूरी धनराशि में से केवल चार प्रतिशत का ही प्रबन्ध हो पाया है.

अवर महासचिव टॉम फ़्लैचर ने पश्चिमी तट में भी बिगड़ते हालात पर चिन्ता जताई, जहाँ इस वर्ष अब तक 95 फ़लस्तीनियों की जान जा चुकी है. इनमें 17 बच्चे हैं. 179 बच्चों समेत 869 लोग घायल हुए हैं.

उन्होंने बताया कि इसराइली सैन्य बलों ने पश्चिमी तट के उत्तरी हिस्से में बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू की है, पिछले दो दशकों में पहली बार टैंकों की तैनाती की गई है. इन हालात में 40 हज़ार फ़लस्तीनी विस्थापित हुए हैं और नागरिक प्रतिष्ठानों को भारी नुक़सान पहुँचा है.

फ़लस्तीनी समुदायों को इसराइली बस्तियों के विस्तार, स्थानीय निवासियों द्वारा की जाने वाली हिंसा और घरों के ध्वस्तीकरण समेत अन्य समस्याओं से जूझना पड़ रहा है.

यूएन अधिकारी के अनुसार, इसराइली बस्तियों के बाशिन्दों ने फ़लस्तीनी गाँवों पर हमले किए हैं, घरों को जलाया है और सम्पत्तियों को बर्बाद किया गया है. सड़कें और चौकियाँ अवरुद्ध होने से अति-आवश्यक सेवाओं की सुलभता प्रभावित हुई है.

UN के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस प्रेस ब्रीफिंग में बोल रहे हैं, पृष्ठभूमि में UN का झंडा दिखाई दे रहा है।
UN Photo/Violaine Martin यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश जिनीवा में पत्रकारों को जानकारी दे रहे हैं.

'असहनीय' पीड़ा

उधर, संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष अधिकारियों ने ग़ाज़ा में हुए हमलों पर गहरा दुख प्रकट किया है और दोहराया है कि मध्य पूर्व में मौजूदा संकट का कोई सैन्य समाधान नहीं है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने जिनीवा में यूएन कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में क्षोभ जताया कि घातक इसराइली हमलों के फिर से शुरू होने के बाद, ग़ाज़ावासियों के लिए असहनीय पीड़ा उपजी है.

उन्होंने कहा कि ग़ाज़ा में तीन बातें सुनिश्चित किया जाना बेहद आवश्यक है: युद्धविराम का पूर्ण रूप से सम्मान हो, ग़ाज़ा में बेरोकटोक मानवीय सहायता पहुँचाई जाए, और बन्धकों की बिना किसी शर्त के रिहाई हो.

यूएन प्रमुख ने स्पष्ट किया कि वह इन उद्देश्यों से पीछे नहीं हटेंगे. 

पिछले कई दशकों से जारी साइप्रस के विभाजन का अन्त करने के लिए नए सिरे से प्रयासों के तहत, यूएन महासचिव जिनीवा पहुँचे हैं, जहाँ उन्होंने तुर्की साइप्रस और ग्रीक साइप्रस समुदाय के नेताओं के साथ बातचीत की है.

भीषण अत्याचार तुरन्त रुकें, टर्क

यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने, ग़ाज़ा में इसराइल के हालिया हमलों और बमबारी पर भय व्यक्त किया है.वोल्कर टर्क ने  इस त्रासदी को तुरन्त रोके जाने की पुकार लगाई है. "यह त्रासदी पहले से जारी त्रासदी को और बढ़ाएगी."

उन्होंने कहा कि पिछले 18 महीनों की हिंसा ने दिखाया है कि इस संकट का कोई सैन्य समाधान नहीं है.

वोल्कर टर्क ने इसराइल से अपने सैन्य अभियान तुरन्त रोके जाने का आग्रह करते हुए कहा है कि सैन्य अभियान जारी रखने से, उन फ़लस्तीनियों की तकलीफ़ों में दीगर इज़ाफ़ा होगा जो पहले से ही अत्यन्त विनाशकारी हालात का सामना कर रहे हैं.

यूएन मानवाधिकार प्रमुख ने तमाम बन्धकों और मनमाने तरीक़े से बनाए गए सभी व्यक्तियों की रिहाई की भी मांग करते हुए, ज़ोर दिया है कि युद्ध को स्थाई रूप से रोका जाना होगा.

उन्होंने तमाम सम्बद्ध पक्षों से, शान्ति स्थापना और आम लोगों के लिए दीगर तकलीफ़ें रोकने के लिए अपने प्रभावों का इस्तेमाल करने का भी आग्रह किया है. वोल्कर टर्क ने कहा, "यह दुस्वप्न तुरन्त रोका जाना होगा."

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ग़ाज़ा में भयावह हालात: लज़ारिनी

फ़लस्तीनी लोगों के लिए यूएन सहायता एजेंसी – UNRWA के मुखिया फ़िलिपे लज़ारिनी ने ग़ाज़ा में इसराइल की भीषण बमबारी में आम लोगों व बच्चों के मारे जाने के भयावह हालात बयान किए हैं.

उन्होंने एक सोशल मीडिया सन्देश में कहा है कि युद्ध फिर से शुरू किए जाने से, आम लोगों की पहले से जारी तकलीफ़ों में और भी बढ़ोत्तरी होगी. युद्धविराम की तरफ़ वापसी बहुत ज़रूर है.

इसराइली हमलों पर हतप्रभ

यूएन प्रमुख एंतोनियो गूटेरेश ने, ग़ाज़ा में इसराइली हमलों पर भय व्यक्त किया है, जिनमें सैकड़ों लोगों की मौतें हुई हैं.

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश के उप प्रवक्ता फ़रहान हक़ ने मंगलवार को जारी एक वक्तव्य में, सभी पक्षों से युद्धविराम का सम्मान किए जाने, मानवीय सहायता निर्बाध रूप से जारी रखने और, तमाम बन्धकों को बिना शर्त रिहा किए जाने का आग्रह किया है.

इसबीच, क़ाबिज़ फ़लस्तीनी क्षेत्र में संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायता समन्वयक मुहन्नाद हादी ने भी ग़ाज़ा में इसराइल की हालिया भीषण बमबारी की निन्दा की है, जिनमें सैकड़ों लोग मारे गए हैं.

मुहन्नाद हादी ने तत्काल युद्धविराम लागू किए जाने की पुकार लगाते हुए कहा, “यह कल्पना से भी बाहर की बात है.”

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि युद्ध पर विराम, मानवीय सहायता की टिकाऊ आपूर्ति, बन्धकों की रिहाई, और बुनियादी सेवाओं की बहाली, ग़ाज़ा भविष्य के लिए अत्यावश्यक है.