ग़ाज़ा पट्टी: सीमा चौकियों के बन्द होने से, खाद्य सहायता प्रयासों में रुकावट
सीमा चौकियों के ज़रिये सहायता क़ाफ़िलों की आवाजाही ठप होने की वजह से, यूएन मानवतावादी एजेंसी के लिए ग़ाज़ा पट्टी में खाद्य सहायता पहुँचा पाना सम्भव नहीं हो पा रहा है. संयुक्त राष्ट्र प्रवक्ता ने शुक्रवार को जानकारी देते हुए कहा कि इस पाबन्दी को 12 दिन बीत चुके हैं.
19 जनवरी को युद्धविराम का पहला चरण शुरू होने के बाद से ग़ाज़ा पट्टी में बड़े पैमाने पर मानवीय सहायता सामग्री को पहुँचाया गया था. मिस्र, क़तर और अमेरिका की मध्यस्थता से हुए युद्धविराम का प्रथम चरण दो सप्ताह पहले समाप्त हो गया था.
मानवीय सहायता क़ाफ़िलों के प्रवेश पर एकतरफ़ा ढंग से लगाई गई रोक से स्थानीय आबादी के लिए खाद्य सामग्री, दवाओं व अन्य अति-आवश्यक वस्तुओं की क़िल्लत होने की आशंका है.
यूएन महासचिव के प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने न्यूयॉर्क मुख्यालय में नियमित पत्रकार वार्ता के दौरान कहा कि ग़ाज़ा में ईंधन की क़िल्लत है, जिससे वाहनों की आवाजाही पर असर हुआ है. अग्रिम पंक्ति के राहतकर्मियों के कामकाज की रफ़्तार भी सुस्त हुई है.
“मानवतावादी मामलों में समन्वय के लिए यूएन कार्यालय (OCHA) के अनुसार, ऑक्सीजन की आपूर्ति और बिजली जनरेटर की भी तत्काल आवश्यकता है, ताकि ग़ाज़ा के अस्पतालों में जीवनरक्षक कामकाज को जारी रखा जा सके.”
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य केन्द्रों के लिए कम से कम दो दर्जन अतिरिक्त जनरेटर की आवश्यकता होगी, चूँकि पहले से वहाँ उपलब्ध जनरेटर की मरम्मत होनी है.
खाद्य क़ीमतों में उछाल
विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने बताया है कि अगले महीने तक रसोई व बेकरी में भोजन व्यवस्था को अगले 30 दिनों तक समर्थन देने के लिए भंडार है. साथ ही, दो हफ़्तों के लिए साढ़े पाँच लाखों को पहले से तैयार भोजन के पैकेट वितरित किए जा सकते हैं.
यूएन प्रवक्ता के अनुसार, खाद्य आपूर्ति को लम्बे समय तक चलाने के लिए, परिवारों को दिए जाने वाले भोजन पैकेट में सामान को थोड़ा कम किया जा रहा है. युद्धविराम से पहले भी इसका सहारा लिया गया था.
WFP द्वारा ग़ाज़ा पट्टी में 25 बेकरी को समर्थन मुहैया कराया जाता है. लेकिन 8 मार्च को खाना पकाने की गैस की क़िल्लत होने की वजह से छह बेकरी को बन्द करने के लिए मजबूर होना पड़ा था.
सीमा चौकियों के बन्द होने और रसद आपूर्ति ना होने से खाद्य क़ीमतों में उछाल दर्ज किया जा रहा है. आटा, चीनी समेत अन्य अति-आवश्यक वस्तुओं की क़ीमत बढ़ रही है.
विस्थापन की समस्या
इस बीच, क़ाबिज़ पश्चिमी तट में भी हालात बिगड़ रहे हैं. यूएन मानवतावादी कार्यालय ने कहा है कि पश्चिमी तट के कुछ हिस्सों में इसराइली बस्तियों के बाशिन्दों द्वारा हिंसा को अंजाम दिए जाने के मामले बढ़े हैं.
इन घटनाओं में आम लोग हताहत हुए हैं, सम्पत्ति को नुक़सान पहुँचा है और फ़लस्तीनी समुदायों पर विस्थापन का शिकार होने का जोखिम है.
पिछले ढाई सप्ताह के दौरान, फ़लस्तीनियों के स्वामित्व वाले ढाँचों को ढहाया गया है. सोमवार के बाद से, जेनिन शहर में इसराइली सुरक्षा अभियान में तेज़ी आई है, जिसकी वजह से 500 लोग विस्थापित हुए हैं.
यूएन एजेंसी द्वारा 1.9 लाख लोगों को महीने के लिए नक़दी वाउचर प्रदान किए जा रहे हैं. मगर अगले छह महीनों के लिए 26.5 करोड़ डॉलर की आवश्यकता है, ताकि ग़ाज़ा और पश्चिमी तट में 14 लाख लोगों के लिए यह सहायता प्रयास जारी रखे जा सकें.