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CSW69: महिला सशक्तिकरण के लिए डिजिटल और वित्तीय बाधाओं को दूर करने की ज़रूरत

यूएन वीमैन की कार्यकारी निदेशक सीमा बहाउस, यूएन मुख्यालय में महिला मज़बूती पर आयोजित एक संगोष्ठि को सम्बोधित करते हुए.
UN News/Mehboob Khan
यूएन वीमैन की कार्यकारी निदेशक सीमा बहाउस, यूएन मुख्यालय में महिला मज़बूती पर आयोजित एक संगोष्ठि को सम्बोधित करते हुए.

CSW69: महिला सशक्तिकरण के लिए डिजिटल और वित्तीय बाधाओं को दूर करने की ज़रूरत

महिलाएँ

महिला सशक्तिकरण के लिए संयुक्त राष्ट्र की संस्था – UN Women की कार्यकारी निदेशक और यूएन अवर महासचिव सीमा बहाउस ने कहा है कि महिलाओं को डिजिटल और वित्तीय प्रणालियों से दूर रखने वाली बाधाओं का समाधान किया जाना होगा और महत्वाकांक्षी सरकारों को ऐसे सार्वजनिक डिजिटल ढाँचे में संसाधन निवेश करना होगा, जो महिलाओं को प्राथमिकता पर रखे.

सीमा बहाउस ने यह बात बुधवार को यूएन मुख्यालय में, महिला सशक्तिकरण के लिए डिजिटल और वित्तीय समावेश विषय पर आयोजित, एक मंत्रिस्तरीय समागोष्ठि में कही जिसका आयोजन UN Women और भारत सरकार ने किया.

सीमा बहाउस ने कहा कि Unified Payments Interface (UPI) विकसित करने में भारत का नेतृत्व साबित करता है कि नवाचार का समावेश जब जड़ों में होता है, तो क्या-कुछ सम्भव नहीं है.

उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र को, महिलाओं की वित्तीय स्वतंत्रता को बढ़ावा देना होगा और ऐसा बुद्धिमत्तापूर्ण निवेश, डिजिटल वित्त और उत्प्रेरक वित्तपोषण जैसे समाधानों के ज़रिए किया जा सकता है.

सीमा बहाउस ने कहा, “हमने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MNREGA) के माध्यम से डिजिटल वित्तीय समावेशन की शक्ति देखी है. डिजिटल भुगतान व्यवस्था ने महिलाओं के रोज़गार और स्वायत्तता को बढ़ाया है. 

इस संगोष्ठि में क़तर, मोरक्को, इंडोनेशिया, पनामा और ऑस्ट्रेलिया की मंत्रियों और प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे.

बदलाव का ख़ाका

उन्होंने कुछ उदाहरण देते हुए बताया कि जॉर्डन में, नोकिया के साथ UN Women का सहयोग, सीरियाई शरणार्थी महिलाओं को डिजिटल और वित्तीय साक्षरता में मदद कर रहा है, ताकि वे नई आर्थिक वास्तविकताओं को समझने में सक्षम हो सकें.

“ग़ाज़ा में महिलाएँ अकल्पनीय कठिनाई का सामना कर रही हैं, वहाँ हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि नक़दी सहायता उन तक पहुँचे, जिन्हें उसकी सबसे अधिक आवश्यकता है, जिससे महिलाओं को अपने परिवारों का भरण-पोषण करने, सम्मान बनाए रखने और संकट की स्थिति में पुनर्निर्माण करने में मदद मिले.

उन्होंने कहा, “ये केवल परियोजनाएँ भर नहीं हैं. ये जीवन सुरक्षित करने वाली हैं. ये बदलाव का ख़ाका हैं. ये हमें बहिष्कार के बजाय समावेश चुनने की सम्भावनाओं को दिखाती हैं. निष्क्रियता के बजाय कार्रवाई करना और हिचकिचाहट के बजाय महत्वाकांक्षा. हम आधे-अधूरे उपाय नहीं कर सकते.”

इसलिए विकास सम्मेलन के लिए इस वर्ष का वित्तपोषण एक निर्णायक क्षण होगा, वैश्विक वित्तीय प्रणालियों की पुनर्कल्पना करने का क्षण. ताकि वे महिलाओं के लिए काम करें, उनके ख़िलाफ नहीं. "हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का मुद्दा, अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय ढाँचे में सुधार पर चर्चा के केन्द्र में हो."

कोई बाधा आड़े नहीं आ सकती

भारत की महिला और बाल विकास मंत्री, यूएन मुख्यालय में, महिला मज़बूती पर आयोजित एक कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए.
UN News/Mehboob Khan

भारत की महिला और बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णादेवी ने, इस संगोष्ठि को सम्बोधित करते हुए कहा कि इतिहास गवाह है, जब भी महिलाओं को अवसर और संसाधन मिले हैं, उन्होंने हर बाधा पार करके सफलता प्राप्त की है.

यह भारत सरकार और समाज के वर्षों के प्रयासों के कारण सम्भव हुआ है. इससे यह भी मालूम होता है कि उन्हें कोई बाधा नहीं रोक सकती. बस ज़रूरत है उन्हें अवसर मिलने की, बेहतर जगह बनाने और मानसिकता में बदलाव लाने की. महिलाएँ, आज की तकनीकी रूप से उन्नत दुनिया में, STEM क्षेत्रों, खेलों, नवाचार और अनुसन्धान क्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं.

भारतीय मंत्री ने कहा कि देश के मिशन मंगल यान से जुड़ी भारतीय महिला वैज्ञानिकों ने, बेहतरीन प्रदर्शन किया है, जिसमें अन्तरिक्ष केन्द्र में वैज्ञानिक उपकरण का निर्माण और परीक्षण शामिल है. केवल टीम के सदस्यों के रूप में नहीं, बल्कि नेतृत्व करके... भारत सरकार ने नारी शक्ति की असीम शक्ति को पहचाना है. भारत, महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास के साथ आगे बढ़ रहा है.

अन्नपूर्णादेवी ने कहा कि आइए, एक ऐसे विश्व का निर्माण करें जहाँ महिलाएँ अवधारणा से लेकर डिज़ाइन, कार्यान्वयन और निगरानी तक में सक्रिय रूप से भाग लेकर नेतृत्व करें. महिलाओं के डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देना अहम है. साथ ही डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता की रक्षा भी सुनिश्चित की जानी होगी.

परिवर्तन के लिए रोडमैप

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि राजदूत पी हरीश ने, महिला मज़बूती के लिए, डिजिटिल और वित्तीय समावेशन पर हुई संगोष्ठि को सम्बोधित किया. (12 मार्च 2025).
UN News/Mehboob Khan

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि राजदूत पी हरीश ने इस संगोष्ठि के उदघाटन सत्र को सम्बोधित करते हुए कहा कि डिजिटल और वित्तीय समावेशन, केवल आर्थिक प्रगते के लिए उपकरण भर नहीं हैं, बल्कि वो महिलाओं के लिए समानता और मज़बूती लाने के लिए एक परिवर्तनकारी शक्ति है.

दुनिया भर में, महिलाओं को, वित्तीय सेवाएँ हासिल करने, डिजिटल उपकरणों का प्रयोग करने और आर्थिक अवसरों का लाभ उठाने के लिए, बाधाओं का सामना पड़ा है.

भारतीय राजदूत पी हरीश ने कहा कि भारत, इन सबके बावजूद परिवर्तन के लिए एक रोडमैप प्रस्तुत करता है. भारत ने इतना विकास केवल 9 वर्षों में हासिल कर लिया, जिसे हासिल करने में सामान्य रूप में 50 वर्षों का समय लगता था.

उन्होंने बताया कि भारत में बायोमैट्रिक आधारित राष्ट्रीय पहचान-पत्र प्रणाली – आधार कार्ड मौजूद है जिसमें 1 अरब 40 करोड़ पंजीकरण हैं.

इस पहचान-पत्र प्रणाली के आधार पर देश में लगभग 45 अरब अमेरिकी डॉलर की रक़म, सरकारी कल्याणकारी योजनाओं में वितरित की गई है.

राजदूत पी हरीश ने बताया कि देश में नागरिकों के 50 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोलने के ज़रिए वित्तीय समावेशन किया गया है, और इनमें आधे से अधिक संख्या महिलाओं की है.

Unified Payments Interface (UPI), प्रणाली में 600 बैंक शामिल हैं और इस प्रणाली के माध्यम से, इस समय हर महीने 11 अरब से अधिक लेन-देन होते हैं. इसने डिजिटल भुगतान की दुनिया को बदलकर रख दिया है.

भारतीय राजदूत ने कहा कि महिलाओं में संसाधन निवेश करने और उन्हें वित्तीय रूप से मज़बूत बनाने से, एक बहुकोणीय प्रभाव उत्पन्न होता है जिससे राष्ट्रीय और वैश्विक प्रगति तेज़ी होती है. 

भारत सामाजिक संरक्षण कार्यक्रमों, व्यवसाय अवसरों और कौशल निर्माण में धन निवेश करने को प्राथमिकता देता है ताकि महिलाओं की सार्थक आर्थिक मज़बूती सुनिश्चित की जा सके.

उन्होंने कहा कि इसके बावजूद महिलाओं के लिए समानता लाने की ख़ातिर, वैश्विक स्तर पर धन की कमी का स्तर $1.7 ट्रिलियन है, जिसमें प्रगति के रास्ते में आने वाली बाधाओं और क्षमताओं का सदुपयोग नहीं किए जाने की स्थिति नज़र आती है. 

“हमें इस खाई को, सामूहिक रूप से पाटना होगा.”