करदाताओं के धन को ज़रूरतमन्दों तक पहुँचाने के लिए, यूएन में सुधारों को प्राथमिकता
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि संगठन के आधुनिकीकरण और अपने कामकाज को कारगर, किफ़ायती व ज़रूरतमन्दों की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने के इरादे से सुधारों को प्राथमिकता दी जा रही है. इन प्रयासों के तहत, संगठन की स्थापना की 80वीं वर्षगाँठ के अवसर पर यूएन80 नामक पहल पेश की गई है.
यूएन के शीर्षतम अधिकारी ने बुधवार को न्यूयॉर्क मुख्यालय में पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए कहा कि ये सुधार केवल आन्तरिक प्रक्रियाओं के बारे में नहीं हैं, बल्कि शान्ति, विकास व मानवीय सहायता के क्षेत्र में ठोस बेहतरी लाने पर भी लक्षित हैं.
इन प्रयासों में यह सुनिश्चित किया जाना होगा कि सार्वजनिक निधि का बुद्धिमतापूर्वक और पारदर्शी ढंग से उपयोग किया जाए.
“ये प्रयास अपने आप में मंज़िल नहीं हैं. ये उन लोगों की बेहतर ढंग से सेवा करने पर केन्द्रित हैं, जिनकी ज़िन्दगियाँ हम पर निर्भर करती हैं."
"वे दुनिया भर में उन परिश्रमी करदाताओं के बारे में हैं, जो हमारे हर कार्य के लिए आर्थिक उत्तरदायित्व लेते हैं.”
संयुक्त राष्ट्र इस वर्ष, अपनी स्थापना की 80वीं वर्षगाँठ मनाएगा. भविष्य के लिए सहमति-पत्र और यूएन 2.0 समेत अन्य प्रयासों के ज़रिए यूएन के तंत्रों, प्राथमिकताओं और अभियानों को 21वीं सदी के अनुरूप तैयार किए जाने का लक्ष्य है. यूएन80 नामक पहल इन्हीं प्रयासों को आगे बढ़ाएगी.
महत्वाकांक्षी सुधार
यूएन महासचिव ने वर्ष 2017 में अपना कार्यभार सम्भालने के बाद से ही प्रक्रियाओं को सरल बनाने, निर्णय-निर्धारण प्रक्रिया का विकेन्द्रीकरण करने, पारदर्शिता को मज़बूत करने और डेटा व डिजिटल क्षमता को प्राथमिकता देने के इरादे से एक व्यापक सुधार एजेंडा की अगुवाई की है.
इसके ज़रिए संयुक्त राष्ट्र के कामकाज को पहले से कहीं अधिक दक्ष व किफ़ायती बनाने की कोशिशें की जा रही हैं.
उन्होंने कहा कि यह अति-आवश्यक है कि संयुक्त राष्ट्र जैसी जटिल व अहम सांगठनिक प्रणाली, स्वयं को सख़्त व नियमित समीक्षा प्रक्रिया से गुज़ारे, ताकि अपने दायित्व को दक्षतापूर्वक निभाने की क्षमता का परीक्षण हो सके.
उनके अनुसार, इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र की 80वीं वर्षगाँठ हमारे सभी प्रयासों का विस्तार करने का एक अहम क्षण है, पहले से कहीं अधिक तेज़ी और महत्वाकांक्षा के साथ काम करने की अहमियत को समझने का.
केवल आँकड़े भर नहीं
यूएन80 पहल के तहत, अवर महासचिव गाय राइडर की अगुवाई में एक कार्य बल का गठन किया गया है, जोकि तीन अहम क्षेत्र में अपने प्रस्ताव पेश करेगा.
इनमें दक्षता व बेहतरी लाने उपायों की पहचान करना, सदस्य देशों से प्राप्त शासनादेश (mandate) को लागू करने की प्रक्रिया की समीक्षा करना, और ढाँचागत बदलाव और कार्यक्रमों को उनके अनुरूप बनाने की रणनैतिक समीक्षा करना है.
महासचिव गुटेरेश ने कहा कि ये प्रयास, केवल तकनीकी मामलों से कहीं बढ़कर हैं.
“संयुक्त राष्ट्र में बजट, लेखा-जोखा में केवल संख्याओं तक सीमित नहीं है. वे दुनिया भर में लाखों-करोड़ों लोगों के लिए जीवन व मृत्यु का प्रश्न है.”
नक़दी संकट
महासचिव गुटेरेश के अनुसार, शान्ति व सुरक्षा को सामूहिक रूप से आगे बढ़ाने, सतत विकास और मानवाधिकारों को साकार करने के लिए संयुक्त राष्ट्र एक अनूठा मंच है. मगर, संगठन को वर्तमान में वित्तीय कठिनाइयों से जूझना पड़ रहा है.
हर मोर्चे पर संसाधन सिकुड़ रह हैं और ऐसा लम्बे समय से हो रहा है. संयुक्त राष्ट्र ने “पिछले सात वर्षों में नक़दी संकट का सामना किया है, चूँकि सभी सदस्य देश, उनकी वित्तीय देनदारी पूरी तरह से नहीं करते हैं और अनेक देश, समय से भुगतान नहीं करते हैं.
11 मार्च 2025 तक, संयुक्त राष्ट्र के 193 में से केवल 75 सदस्य देशों ने संगठन के 3.72 अरब डॉलर के वार्षिक बजट में अपने योगदान का पूर्ण रूप से भुगतान किया है. यूएन महासभा ने इस बजट को पिछले वर्ष दिसम्बर महीने में स्वीकृत किया था.
वहीं, 2024 में 31 दिसम्बर तक 152 देशों ने पूर्ण रूप से अपने हिस्से की राशि का पूर्ण भुगतान किया , जबकि 2023 में यह संख्या 142 थी.
नियमित बजट के ज़रिए राजनैतिक मामलों, अन्तरराष्ट्रीय न्याय व क़ानून, विकास के लिए क्षेत्रीय सहयोग, मानवाधिकार और मानवतावादी मामलों समेत अन्य अहम कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं. हालांकि यूएन शान्तिरक्षा अभियान के लिए अलग व्यवस्था है.
सदस्य देशों का निर्णय
यूएन प्रमुख ने महासभा अध्यक्ष के नेतृत्व में सभी सदस्य देशों के साथ नियमित रूप से विचार-विमर्श करने का संकल्प व्यक्त किया, जिसमें सुधार की दिशा में आगे बढ़ने, प्रगति का आकलन करने और ठोस प्रस्तावों पर चर्चा होगी.
“मेरा उद्देश्य अपने प्रशासनिक अधिकार वाले क्षेत्रों में जल्द से जल्द क़दम आगे बढ़ाने का है, और जो निर्णय सदस्य देशों के पास हैं, उनसे विचार का आग्रह किया जाएगा.”
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि विशाल आवश्यकताएँ हैं और लक्ष्य स्पष्ट है: पहले से कहीं मज़बूत और ज़्यादा कारगर संयुक्त राष्ट्र, जोकि लोगों की उम्मीदों को साकार करे और 21वीं सदी के अनुरूप हो.