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लैंगिक समानता के ख़िलाफ़ बढ़ता उग्र विरोध ख़त्म हो: यूएन प्रमुख

महिला स्थिति आयोग के उनसठवें सत्र के दौरान महासभा भवन में आयोजित एक टाउन हॉल बैठक में एक प्रतिभागी ने अपने विचार व्यक्त किए।
UN Photo/Evan Schneider संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने, महिलाओं की स्थिति पर आयोग (CSW69) के वार्षिक सत्र के अवसर पर, मंगलवार (11 मार्च) को, नागरिक समाज समूहों की एक विशाल बैठक का आयोजन किया जिसे टाउनहॉल कहा जाता है.

लैंगिक समानता के ख़िलाफ़ बढ़ता उग्र विरोध ख़त्म हो: यूएन प्रमुख

महिलाएँ

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने महिला अधिकारों के ख़िलाफ़ बढ़ते विरोध के सन्दर्भ में, इस मुद्दे पर कार्रवाई किए जाने की पुरज़ोर पुकार लगाई है. उन्होंने महिलाओं की स्थिति पर आयोग (CSW69) वार्षिक सत्र के लिए जुटे नागरिक समाज के प्रतिनिधियों से, इसके प्रति कड़ा रुख़ अपनाने का आग्रह भी किया है.

महासचिव ने कहा, “महिलाओं के प्रति घृणा में वृद्धि और समानता के ख़िलाफ़ उग्र प्रतिक्रिया, उनके विकास को रोकने और पीछे धकेलने का काम करती है."

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"मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूँ: यह अस्वीकार्य, अनैतिक और आत्म-पराजय है. हमें इसे रोकना होगा. और एक साथ मिलकर रोकना होगा.”

यह कार्यक्रम बीजिंग घोषणा के 30 साल पूरे होने और महिलाओं, शान्ति व सुरक्षा पर सुरक्षा परिषद के ऐतिहासिक प्रस्ताव 1325 के 25 साल पूरे होने के मौक़े पर आयोजित हो रहा है.

इस दौरान, नागरिक समाज के नेताओं ने नारीवादी आन्दोलनों के लिए कम धन एकत्र होने और लिंग आधारित हिंसा में बढ़ोत्तरी पर चिन्ता व्यक्त की है.

जारी है महिला अधिकारों का हनन

महासचिव ने मातृ स्वास्थ्य और शिक्षा में प्रगति को स्वीकार करते हुए आगाह किया कि कड़ी मेहनत से हासिल की गई उपलब्धियाँ ख़तरे में हैं.

उन्होंने कहा, “महिला संगठनों और नागरिक समाज ने इन उपलब्धियों को हासिल करने में प्रमुख भूमिका निभाई."

"मैं आपके प्रयासों की सराहना करता हूँ. मगर, महिलाओं और लड़कियों को अब भी कई तरह की बुराइयों का सामना करना पड़ रहा है.”

महिला अधिकार रक्षकों पर ख़तरा मंडराना एक चिन्तनीय विषय रहा है. “

दुनिया भर में, महिला अधिकार पैरोकारों को उत्पीड़न, धमकियों और हिंसा - यहाँ तक कि हत्या का भी सामना करना पड़ता है.”

उन्हें नागरिक स्थान में कम उपस्थिति और कम होती धन उपलब्धता की समस्या से जूझना पड़ रहा है. जिसके कारण अधिकारों का क्षरण और जवाबदेही में कमी आ रही है.

अब भी पुरुष-प्रधान है दुनिया

महासचिव ने संरचनात्मक असमानताओं पर ज़ोर देते हुए कहा, "हम अब भी पुरुष-प्रधान दुनिया में रहते हैं, जिसमें पुरुष-प्रधान संस्कृति है."

उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) जैसे क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से पुरुष प्रभुत्व बना हुआ है. 

यहाँ तक कि तकनीकी उद्योग द्वारा बनाए गए कई एल्गोरिदम में, महिलाओं के प्रति होने वाला पक्षपात देखा जा सकता है.

महासचिव ने, इसके आलावा कम धन उपलब्धता और सीमित संसाधनों के बारे में बताया कि महिला शान्ति और मानवीय कोष ने, इसके लिए 2023 से 10 करोड़ डॉलर की धनराशि जुटाई है, जो नागरिक समाज को पूरी तरह से समर्थन देने के लिए अपर्याप्त है.

राजनैतिक घोषणा-पत्र स्वीकृत 

मंगलवार को ही, सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से, एक शक्तिशाली राजनैतिक घोषणा-पत्र अपनाया जिसमें तमाम महिलाओं व लड़कियों के अधिकारों, समानता और उनकी मज़बूती के लिए, सदस्य देशों के संकल्प की एक बार फिर पुष्टि की गई है. 

यूएन महिला संस्था – UN Women की कार्यकारी निदेशक सीमा बहाउस ने इस घोषणा-पत्र का स्वागत करते हुए कहा, “ऐसे समय में जबकि लैंगिक समानता के लिए कड़ी मेहनत से हासिल की गई प्रगति पर हमले हो रहे हैं, वैश्विक समुदाय, हर जगह तमाम महिलाओं व लड़कियों के लिए एकता का प्रदर्शन करने के लिए एकजुट हुआ है.”