यमन: हिंसक टकराव फिर भड़कने के भय को महसूस किया जा सकता है - यूएन दूत
यमन में पिछले कई वर्षों के नाज़ुक युद्धविराम के बाद, फिर से युद्ध भड़कने की आशंका गहरा रही है और आम नागरिकों में इस भय को महसूस किया जा सकता है. यमन के लिए यूएन महासचिव के विशेष दूत हैंस ग्रुंडबर्ग ने गुरूवार को सुरक्षा परिषद में सदस्य देशों को वहाँ मौजूदा हालात से अवगत कराते हुए यह बात कही.
उन्होंने प्रतिनिधियों को बताया कि वर्तमान घटनाक्रम गहरी चिन्ता की वजह है. यमन में हूथी लड़ाकों (अंसार अल्लाह गुट) की पिछले कई वर्षों से सरकारी सुरक्षा बलों से टकराव है, जिन्हें सऊदी अरब के नेतृत्व में गठबंधन का समर्थन प्राप्त है.
विशेष दूत ने यूएन आपात राहत समन्वयक टॉम फ़्लैचर के साथ सुरक्षा परिषद को यमन में मानवीय सहायता प्रयासों में पेश आ रही मुश्किलों पर जानकारी दी. उन्होंने कहा कि देश में महिलाओं के लिए हालात बद से बदतर हो रहे हैं.
अप्रैल 2022 में यूएन की मध्यस्थता से हुए प्रयासों के बाद लड़ाई पर विराम लग गया था, जिसके बाद से बड़े पैमाने पर ज़मीनी अभियान शुरू नहीं हुए हैं. हालांकि सैन्य गतिविधियाँ जारी हैं और हिंसक टकराव फिर से भड़कने का जोखिम है.
हैंस ग्रुंडबर्ग ने कहा कि युद्ध को फिर से नहीं भड़कने दिया जा सकता है. “शब्द मायने रखते हैं. मंशा मायने रखती है. संकेत मायने रखते हैं. मिलेजुले सन्देश और भड़काऊ बातचीत के वास्तविक असर हो सकते हैं.”
सहायता प्रयासों में अवरोध
विशेष दूत ने हाल के दिनों में मारिब, शाब्वा, ताइज़ समेत अन्य इलाक़ों में हुई बमबारी, ड्रोन हमलों, घुसपैठ की कोशिशों का उल्लेख किया. साथ ही, हूथी लड़ाकों द्वारा यूएन व अन्य संगठनों के कर्मचारियों को मनमाने ढंग से हिरासत में लिए जाने की निन्दा करते हुए उन्हें बिना शर्त रिहा करने की अपील की.
आपात सहायता मामलों के लिए यूएन अवर महासचिव टॉम फ़्लैचर ने सदस्य देशों को बताया कि पिछले कुछ हफ़्तों में यूएन एजेंसियों को वित्तीय सहायता में कटौती से जूझना पड़ रहा है, जोकि जीवनरक्षक मानवीय सहायता प्रयासों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है.
उन्होंने चिन्ता जताई कि इस वजह से मानवीय सहायताकर्मियों के लिए विशाल कठिनाइयाँ पैदा होंगी, जहाँ उन्हें ये निर्ण लेने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है कि जान बचाने के लिए किसकी सहायता की जाए.
लैंगिक समानता पर प्रहार
अवर महासचिव टॉम फ़्लैचर ने 8 मार्च को अन्तरराष्ट्रीय दिवस से पहले सचेत किया कि यमन में लैंगिक समानता के प्रयासों पर जानबूझकर कुठाराघात हो रहा है.
मौजूदा संकट का असर विषमतापूर्ण ढंग से महिलाओं व लड़कियों पर हो रहा है. 2021 में, विश्व आर्थिक मंच के एक लैंगिक खाई सूचकांक में यमन अन्तिम पायदान से एक क़दम ऊपर था, और उसके बाद से अब तक हालात में प्रगति का कोई संकेत नहीं है.
यमन में मातृत्व मृत्यु दर मध्य पूर्व क्षेत्र में सबसे अधिक है, जोकि सऊदी अरब या यमन की तुलना में 10 गुना से भी अधिक है. 15 लाख लड़कियाँ स्कूलों से बाहर हैं और उन्हें शिक्षा पाने के अधिकार से वंचित किया जा रहा है, और वे भेदभाव व हिंसा के चक्र में फँसी हैं.
टॉम फ़्लैचर ने आशंका जताई है कि जैसे-जैसे सहायता धनराशि की उपलब्धता में कमी आएगी, हालात और अधिक बिगड़ सकते हैं, मगर उपलब्ध संसाधनों से उनका समर्थन करने के प्रयास जारी रखे जाएंगे.
आगे बढ़ने की एकमात्र राह
संयुक्त राज्य अमेरिका ने हूथी लड़ाकों को विदेशी आतंकी संगठन के रूप में चिन्हित किया है, जिससे शान्ति प्रयासों में अन्तरराष्ट्रीय सहयोग जटिल साबित हो रहा है.
विशेष दूत हैंस ग्रुंडबर्ग ने कहा कि यमनी नागरिकों के लिए मध्यस्थता प्रयासों के इरादे से जगह सुरक्षित रखनी होगी, यूएन के तत्वाधान में एक न्यायोचित व समावेशी शान्ति अहम है.
हैंस ग्रुंडबर्ग ने दोहराया कि एक दशक से अधिक समय से जारी इस हिंसक टकराव का अन्त करने के लिए वह सभी पक्षों को एक साथ लाने के लिए तैयार हैं. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि किसी भी राजनैतिक प्रक्रिया में विविध पृष्ठभूमि के यमनी नागरिकों को शामिल करना होगा.
विशेष दूत के अनुसार, यह हासिल कर पाना सम्भव है, मगर इसके लिए अनुकूल माहौल की दरकार होगी. यह ज़रूरी है कि लाखों यमनी नागरिकों के लिए इसे साकार करने में हम अपने संकल्प में कमज़ोर ना हों.