सूडान: ज़मज़म विस्थापित शिविर में ज़रूरतमन्दों तक मदद पहुँचाना 'लगभग असम्भव'
सूडान में यूएन के शीर्ष मानवीय सहायता अधिकारी ने गुरूवार को चेतावनी जारी की है कि नॉर्थ दारफ़ूर प्रान्त में स्थित ज़मज़म विस्थापित शिविर में शरण लेने वाले आम नागरिकों तक मानवीय सहायता पहुँचा पाना लगभग असम्भव हो गया है.
रेज़िडेंट कोऑर्डिनेटर और मानवतावादी समन्वयक क्लेमेनटीन न्क्वेटा-सलामी ने नॉर्थ दारफ़ूर में घरों व आजीविकाओं के तबाह हो जाने की ख़बरों पर गहरी चिन्ता जताई है.
“आम नागरिक इसकी क़ीमत चुका रहे हैं. ज़मज़म शिविर तक पहुँचना लगभग असम्भव है, एक ऐसे समय जब लोगों को सबसे अधिक समर्थन की दरकार है. हमें जीवनरक्षक मदद पहुँचाने के लिए बेरोकटोक मानवतावादी मार्ग की आवश्यकता है.”
सूडान में सशस्त्र सेना और अर्द्धसैनिक बल (RSF) के बीच अप्रैल 2023 से हिंसक टकराव जारी है, जिससे देश में बड़े पैमाने पर मानवीय संकट उपजा है. विस्थापितों के लिए बनाया गया ज़मज़म शिविर, नॉर्थ दारफ़ूर प्रान्त की राजधानी अल फ़शर शहर से क़रीब 15 किलोमीटर दूर स्थित है.
पिछले सप्ताह, यूएन खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने बताया था कि इस शिविर में बच्चों की पहले से ही मौत हो रही है और आगामी हफ़्तों में हज़ारों लोग भूख का शिकार हो सकते हैं. भारी बमबारी के कारण यहाँ मानवीय सहायता को रोकने के लिए मजबूर होना पड़ा है.
सहयोगी बने शत्रु
15 अप्रैल 2023 को सूडान में नागरिक शासन बहाल किए जाने की प्रक्रिया में अवरोध पैदा हो गया, और सशस्त्र सेना व अर्द्धसैनिक बलों (RSF) के बीच हिंसक टकराव शुरू होगा, जबकि पहले दोनों पक्षों में पारस्परिक सहयोग था.
सूडानी सेना का उत्तरी व पूर्वी क्षेत्रों पर नियंत्रण है जबकि RSF मिलिशिया और उसके सहयोगी गुटों ने पश्चिमी क्षेत्र में स्थित दारफ़ूर प्रान्तों और दक्षिण के कुछ हिस्सों पर क़ब्ज़ा किया हुआ है.
RSF का अब दारफ़ूर क्षेत्र पर लगभग पूरी तरह से नियंत्रण है, और पिछले कई महीनों से उसने नॉर्थ दारफ़ूर के अल फ़शर शहर की घेराबन्दी की हुई है, जोकि ज़मज़म शिविर के पास.
RSF मिलिशिया ने 11 फ़रवरी को इस शिविर पर धावा बोला था, जिसके बाद कई दिनों तक सेना के साथ झड़पें होने की ख़बर थी.
मंगलवार शाम, नॉर्थ दारफ़ूर के अबू शौक शिविर में आम नागरिकों पर एक बार फिर से हमला किया गया, जिसमें मुख्यत: मुसलमानों की मौत होने की आशंका है. इस हमले के पीछे RSF का हाथ बताया गया है. उससे पहले, रविवार को शिविर पर गोलाबारी में कम से कम छह लोगों की जान गई थी.
2.2 करोड़ डॉलर की आपात सहायता
सूडान में 27 स्थानों पर 20 लाख से अधिक अकाल जैसे हालात का या तो सामना कर रहे हैं या फिर उसके कगार पर हैं.
यूएन आपात सहायता समन्वयक टॉम फ़्लैचर ने सर्वाधिक ज़रूरतमन्दों की मदद के लिए गुरूवार को 2.2 करोड़ डॉलर की मदद की घोषणा की है, जिसके ज़रिये जीवनरक्षक मानवीय सहायता प्रयासों को आगे बढ़ाया जाएगा.
इस बीच, सुरक्षा परिषद ने सूडान में विरोधी सैन्य बलों द्वारा एक चार्टर पर हस्ताक्षर किए जाने पर चिन्ता जताई है, जिसमें एक समानान्तर प्रशासनिक तंत्र स्थापित किए जाने की योजना है.
सुरक्षा परिषद के अनुसार, ऐसे किसी भी क़दम से सूडान में मौजूदा हिंसक टकराव और अधिक पैना होगा, देश में विभाजन बढ़ेगा और पहले से ही गम्भीर हालात, बदतरीन रूप धारण कर सकते हैं.
बच्चों के साथ बलात्कार
इस सप्ताह, संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने क्षोभ जताया था कि सूडान में हिंसक टकराव के बीच, हथियारबन्द लड़ाके बच्चों के बलात्कार समेत अन्य प्रकार से यौन हिंसा को अंजाम दे रहे हैं. कुछ पीड़ितों में एक वर्ष के बच्चे भी हैं.
सूडान में लिंग-आधारित हिंसा पर नज़र रखने वाले संगठनों के अनुसार, वर्ष 2024 से अब तक बच्चों के साथ बलात्कार के 220 से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जोकि मौजूदा हालात की भयावहता को दर्शाता है.
यूनीसेफ़ की कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसैल ने कहा कि एक वर्ष की आयु वाले छोटे बच्चों को भी हथियारबन्द गुट अपना शिकार बना रहे हैं, जोकि किसी को भी झकझोर सकता है. इसकी तत्काल रोकथाम के लिए तुरन्त क़दम उठाए जाने होंगे.